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Home»Uncategorized»चौरीचौरा के शताब्दी वर्ष पर पीएम ने जारी किया डाक टिकट, बोले- प्रणाम करत बानीं…जानिए पूरा मामला
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चौरीचौरा के शताब्दी वर्ष पर पीएम ने जारी किया डाक टिकट, बोले- प्रणाम करत बानीं…जानिए पूरा मामला

Sunil MauryaBy Sunil MauryaFebruary 4, 2021Updated:February 4, 2021No Comments5 Mins Read
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लखनऊ/चौरीचौरा : आजादी से पहले चौरी चौरी कांड स्वतः स्फूर्त संग्राम था। इतिहास के पन्‍नों में भले जगह नहीं दी गई। आजादी के स्‍वतंत्रता संग्राम में उनका खून देश की माटी में मिला हुआ है। ये बात आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौरी चौरा कांड पर वर्चुअली डाक टिकट जारी करते हुए कही। इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने यूपी के लोगों को अपने ही अंदाज में अभिवादन किया। पहली बार भोजपुरी में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि …प्रणाम करत बानीं। उन्‍होंने कहा सौ वर्ष पहले चौरी चौरा में जो हुआ वो सिर्फ एक थाने में आग लगा देने की घटना नहीं थी। यह आग थाने में नहीं लगी थी। देश के जन-जन में प्रज्‍जवलित हो चुकी थी। आजादी का जज्‍बा जगा दिया था। चौरीचौरा का संदेश बहुत बड़ा था। अनेक वजहों से इसे सिर्फ एक आगजनी के स्‍वरूप में ही देखा गया। दुर्भाग्‍य है कि चौरी चौरा के शहीदों की इतनी चर्चा नहीं हुई जितनी होनी चाहिए थी लेकिन यह एक स्‍वत: स्‍फूर्त संग्राम था।

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चौरी चौरा शताब्दी वर्ष पर जारी किया गया डाक टिकट

इससे पहले चौरी चौरा शताब्‍दी वर्ष महोत्‍सव के शुभांरभ के मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में 50 हजार लोगों ने एक साथ वंदेमातरम् गाकर विश्‍व रिकार्ड बनाया। सीएम योगी समारोह स्‍थल पर सुबह पौने दस बजे ही पहुंच गए थे। आयोजन समिति की अध्‍यक्ष और राज्‍यपाल आनंदीबेन पटेल लखनऊ से वर्चुअली समारोह से जुड़ीं रहीं।

क्या था चौरी चौरा कांड

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चौरी चौरा कांड की एक तस्वीर (फाइल)

1857 की क्रांति के बाद चौरीचौरा कांड ऐसा पहला मौका था, जिसने पूरी ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिलाकर रख दी। आजादी के आंदोलन का बिगुल तो पहले ही फूंका जा चुका था, लेकिन 4 फरवरी 1922 को गोरखपुर की घरती पर हुए इस घटना ने पूरे आंदोलन की दिशा ही बदल दी। इस प्रकरण से महात्मा गांधी इनते विचलित हुए कि उन्होंने अपना असहयोग आंदोलन। इसी घटना के बाद स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारियों का दो दल बन गया। शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, राम प्रसाद बिस्मिल और चंद्र शेखर आजाद समेत कई क्रांतिकारी गरम दल के नायक थे।

चौरीचौरा कांड की गूंज ब्रिटेन के हाउस आफ कामन तक सुनाई दी थी। स्वतंत्रता आंदोलन की चिंगारी भड़कने से रोकने के लिए अंग्रेजी सरकार ने इसको दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसमें शामिल 172 लोगों को सेशन कोर्ट ने जैसे ही फांसी की सजा सुनाई, इसके खिलाफ दुनियाभर से तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। इससे डरे अंग्रेजी अफसरों ने सजा पाने वाले लोगों को अलग-अलग जेलों में बंद कर दिया।

गांधी टोपी को पांव से रौंदने पर आक्रोशित हुए आंदोलनकारी

4 फरवरी 1922 को गोरखपुर का चौरी चौरा कांड ऐसे समय में हुआ जब महात्मा गांधी का सत्याग्रह आंदोलन पूरे देश में रंग ला रहा था। उन्होंने विदेशी कपड़ों के बहिष्कार, अंग्रेजी पढ़ाई छोड़ने और चरखा चलाकर कपड़े बनाने का अह्वान किया था। इस दिन चौरीचौरा के भोपा बाजार में सत्याग्रही इकट्ठा हुए और उन्होंने जुलूस निकाली। जुलूस थाने से गुजर था। तभी तत्कालीन थानेदार ने जुलूस को अवैध घोषित कर दिया। एक सिपाही ने इसमें शामिल एक व्यक्ति की गांधी टोपी को पांव से रौंद दिया। इसे देखकर सत्याग्रही आक्रोशित हो गए। उन्होंने इसका विरोध किया। पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें 11 सत्याग्रही मौके पर ही शहीद हो गए। वहीं, 50 से ज्यादा घायल हो गए।

थाने को आग के हवाले कर दिया

गोली खत्म होने पर पुलिसकर्मी थाने की तरफ भागे। फायरिंग से आंक्रोशित भीड़ ने उन्हें दौड़ा लिया। थाने के पास ही मौजूद एक दुकान से केरोसीन तेल उठा लिया और थाने को आग के हवाले कर दिया। नेदार ने भागने की कोशिश की तो भीड़ ने उसे आग में फेंक दिया। एक सिपाही यहां से जान बचाकर जैसे-तैसे भागा और झंगहा पहुंचकर गोरखपुर के तत्कालीन कलेक्टर को इस घटना की जानकारी दी। इस घटना में 23 पुलिसवालों की मौत हो गई थी। गोरखपुर जिला कांग्रेस कमेटी के उपसभापति प. दशरथ प्रसाद द्विवेदी ने गांधी जी को घटना की सूचना चिट्ठी लिखकर दी। गांधी जी ने घटना को हिंसक मानते हुए आंदोलन स्थगित कर दिया था।

172 अभियुक्तों को सजा-ए-मौत का फैसला सुनाया गया

चौरीचौरा कांड के लिए सैकड़ों लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। गोरखपुर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश मिस्टर एचई होल्मस ने 9 जनवरी 1923 को 418 पेज के निर्णय में 172 अभियुक्तों को सजाए मौत का फैसला सुनाया। दो को दो साल की जेल और 47 को संदेह के लाभ में दोषमुक्त कर दिया। जिला कांग्रेस कमेटी गोरखपुर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अभियुक्तों की तरफ से अपील दाखिल की। पंडित मदन मोहन मालवीय ने मामले में पैरवी की। 30 अप्रैल 1923 को फैसला आया। 19 अभियुक्तों को मृत्यु दण्ड, 16 को काला पानी की सजा सुनाई गई। इसके अलावा बचे लोगों को आठ, पांच व दो साल की सजा दी गई। तीन को दंगा भड़काने के लिए दो साल की सजा और 38 को छोड़ दिया गया।

चौरी-चौरा के शताब्दी समारोह की शुरुआत

चौरीचौरा के शताब्दी समारोह का गुरुवार से शुरुआत हुई। चौरीचौरा शहीदों के सम्मान में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर यह ऐतिहासिक आयोजन हुआ। मुख्य कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली किया। वह शहीदों की याद में डाक टिकट एवं विशेष आवरण जारी कर लोगों को संबोधित किए। मुख्यमंत्री योगी मौके पर मौजूद रहें। यह महोत्सव पूरे वर्ष चलेगा योगी सरकार चौरीचौरा की घटना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की तैयारियां कर रही है। घटना के सभी अनछुए पहलुओं, तथ्यों को खोज कर उसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।

दुनिया जानेगी चौरी-चौरा का स्वर्णिम इतिहास

योगी सरकार ने चौरी चौरा स्मारक की दीवारों पर इसके स्वर्णिम इतिहास की कहानिया दर्ज कराने का फैसला लिया है। सभी जिलों के शहीद स्थल, ग्राम व स्मारक दीयों से जगमगाएंगे। चार फरवरी 2021 से पूरे एक साल तक मनाया जाएगा। शताबंदी महोत्व का पूरे प्रदेश में होगा सीधा प्रसारण। आंदोलन से जुड़े शहीदों के परिजनों का सम्मान होगा।

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Sunil Maurya

Deputy Editor, BHARAT SPEAKS

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