एशिया की दो सबसे बड़ी सैन्य शक्तियाँ—भारत और चीन—एक बार फिर चर्चा में हैं। सैनिकों की संख्या से लेकर एयरफोर्स, आर्मर्ड फोर्स, आर्टिलरी और नौसेना तक, दोनों देशों की सैन्य क्षमता दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञों की नजर में रहती है। हाल ही में सामने आए आंकड़े इस बात की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं कि कौन-सा देश किस क्षेत्र में आगे है और कहाँ मुकाबला लगभग बराबरी का है।
सक्रिय सैनिकों की संख्या
चीन के पास लगभग 20.35 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जबकि भारत के पास 14.55 लाख से अधिक सक्रिय जवान हैं। इस आंकड़े में चीन स्पष्ट रूप से आगे दिखता है, लेकिन भारत की सैन्य संरचना अनुभव और विविध युद्ध परिस्थितियों में दक्षता के लिए जानी जाती है।
वायुसेना (Air Force)
एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टरों की संख्या में चीन के पास लगभग 6,198 यूनिट्स हैं, जबकि भारत के पास 3,931। हालांकि भारत की वायुसेना में राफेल, सुखोई-30 MKI और तेजस जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान इसकी ताकत बढ़ाते हैं।

आर्मर्ड फोर्स (टैंक और कॉम्बैट वाहन)
इस क्षेत्र में भारत और चीन लगभग बराबरी पर हैं। चीन के पास 1,50,817 जबकि भारत के पास 1,52,791 आर्मर्ड वाहन हैं, जो यह दर्शाता है कि जमीनी युद्ध क्षमता में भारत किसी से कम नहीं है।
आर्टिलरी
तोपों और रॉकेट लॉन्चरों में चीन के पास 7,240 यूनिट्स हैं, जबकि भारत के पास 4,339। लेकिन भारत की स्वदेशी आर्टिलरी सिस्टम और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें इसे रणनीतिक बढ़त देती हैं।
नौसेना (Navy)
नौसैनिक ताकत में चीन आगे है, जिसके पास 1,177 जहाज और पनडुब्बियाँ हैं, जबकि भारत के पास 493। इसके बावजूद, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और अनुभव उसे मजबूत बनाते हैं।
कुल मिलाकर क्या कहती है तस्वीर?
संख्या के लिहाज से चीन कई क्षेत्रों में आगे है, लेकिन भारत की सैन्य शक्ति केवल आंकड़ों पर नहीं, बल्कि रणनीति, अनुभव, स्वदेशी तकनीक और जमीनी युद्ध क्षमता पर आधारित है। बदलते वैश्विक हालात में भारत तेजी से अपने रक्षा ढांचे को आधुनिक बना रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में यह संतुलन और रोचक हो सकता है।
