भारत की भूमि केवल संस्कृति और आध्यात्म का केंद्र नहीं, बल्कि विश्व की कुछ सबसे ऊंची और अद्भुत मूर्तियों का घर भी है। ये मूर्तियाँ सिर्फ धातु, पत्थर और शिल्प का मिश्रण नहीं, बल्कि भारत की विविधता, विरासत, वीरता और आध्यात्मिक शक्ति की भव्य पहचान हैं। हाल ही में एक वायरल लिस्ट सामने आई है, जिसमें भारत की शीर्ष 10 सबसे ऊंची और प्रतिष्ठित मूर्तियाँ शामिल हैं—जो देश की गौरवशाली कहानी से दुनिया को रूबरू कराती हैं।
1. विशाल बुद्ध प्रतिमा – बिहार
शांत सौम्यता और आध्यात्म का प्रतीक, यह मूर्ति वैश्विक बौद्ध समुदाय के लिए एक पवित्र स्थल है। इसकी दिव्यता दूर से ही मन को शांति प्रदान करती है।
2. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी – गुजरात
182 मीटर ऊंची यह मूर्ति दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित यह स्मारक भारत की एकता, नेतृत्व और संकल्प का प्रतीक है।
3. आदियोगी शिव प्रतिमा – कोयंबटूर, तमिलनाडु
112 फीट ऊंची यह प्रतिमा शिव को प्रथम योगी के रूप में दर्शाती है। युवाओं और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच यह सबसे आकर्षक आध्यात्मिक स्थल बन चुकी है।
4. तिरुवल्लुवर प्रतिमा – कन्याकुमारी
133 फीट ऊंची यह मूर्ति महान तमिल दार्शनिक तिरुवल्लुवर को समर्पित है, जिनकी रचनाएँ आज भी समाज को दिशा देती हैं।

5. रानी लक्ष्मीबाई प्रतिमा – झांसी, उत्तर प्रदेश
वीरता की साक्षात प्रतिमा—यह मूर्ति झांसी की रानी के पराक्रम, साहस और देशभक्ति को दर्शाती है।
6. शिवाजी महाराज प्रतिमा – महाराष्ट्र
भारत के महान योद्धा और राष्ट्रनिर्माता छत्रपति शिवाजी महाराज के शौर्य को सलामी देती यह विशाल प्रतिमा मराठी गौरव का प्रतीक है।
7. हनुमान प्रतिमा – दिल्ली
एक हाथ में गदा और चेहरे पर अटलभाव—हनुमान जी की यह मूर्ति शक्ति, सेवा और समर्पण का संदेश देती है।
8. गोमतेश्वर बहुबली प्रतिमा – कर्नाटक
983 ईस्वी में निर्मित यह ऐतिहासिक प्रतिमा जैन धर्म की सबसे महत्वपूर्ण धरोहरों में से एक है।
9. बिरला गीता मंदिर कृष्ण प्रतिमा – कुरुक्षेत्र, हरियाणा
कुरुक्षेत्र के धार्मिक इतिहास को जीवंत करती यह मूर्ति श्रीकृष्ण के उपदेश—”कर्म ही पूजा है”—का प्रतीक है।
10. बुद्ध प्रतिमा – हैदराबाद, तेलंगाना
हुसैन सागर झील के मध्य स्थित यह भव्य मूर्ति शांति, ध्यान और ज्ञान का अनोखा मिश्रण है।
भारत की ये 10 अद्भुत मूर्तियाँ न केवल पर्यटन का आकर्षण हैं, बल्कि देश की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान की जीवंत मिसाल भी हैं।
