भारत में विवाह को हमेशा से विश्वास, संस्कार और संगतता का पवित्र बंधन माना गया है। दशकों तक रिश्ते तय करने से पहले जनम कुंडली मिलाई जाती रही, ताकि ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर वर-वधू की अनुकूलता जाँची जा सके। लेकिन अब समय बदल चुका है।
आज के डिजिटल युग में इंसान की असली पहचान उसके सितारों में नहीं, बल्कि उसकी डिजिटल गतिविधियों में छुपी होती है। इसी बदलाव ने जन्म दिया है एक नए विचार को — “साइबर कुंडली”।
क्या है साइबर कुंडली?
साइबर कुंडली किसी व्यक्ति के डिजिटल व्यवहार का विश्लेषण है। यह बताती है कि कोई इंसान इंटरनेट की दुनिया में कैसा है — वह क्या देखता है, क्या खोजता है, किससे जुड़ता है और ऑनलाइन किस तरह का आचरण करता है।
इसमें निम्न बातों का अध्ययन किया जाता है:
●सोशल मीडिया पर व्यवहार और भाषा
●गूगल सर्च हिस्ट्री
●मोबाइल ऐप्स का उपयोग
●ऑनलाइन मित्र और नेटवर्क
●साइबर एथिक्स और प्राइवेसी के प्रति सोच
ये सभी संकेत मिलकर किसी व्यक्ति के स्वभाव, मानसिक परिपक्वता और नैतिक मूल्यों की सटीक तस्वीर पेश करते हैं।

क्यों जरूरी हो रही है डिजिटल अनुकूलता?
विशेषज्ञों का मानना है कि आज रिश्तों में सबसे बड़ा टकराव डिजिटल जीवन को लेकर होता है — जैसे गोपनीयता, ऑनलाइन आदतें, समय प्रबंधन और सोशल मीडिया पर सीमाएँ।
पूर्व IPS अधिकारी और साइबर अपराध विशेषज्ञ प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार,
“इंसान का असली चरित्र उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स में झलकता है। ऑनलाइन व्यवहार, वह सच दिखाता है जो आमने-सामने नहीं दिखता।”
आधुनिक विवाह में साइबर कुंडली की भूमिका
●यह भरोसे और पारदर्शिता की नींव रखती है
●डिजिटल असमानता से होने वाले भविष्य के तनाव को पहले ही उजागर करती है
●साइबर सुरक्षा और नैतिकता को रिश्ते का हिस्सा बनाती है
●भावनात्मक समझ और मानसिक संतुलन का आकलन करती है
डेटा से इमोशनल इंटेलिजेंस तक
AI और डेटा एनालिटिक्स के दौर में साइबर कुंडली अब केवल ट्रेंड नहीं, बल्कि एक व्यवहारिक विज्ञान बनती जा रही है। आने वाले समय में रिश्तों की मजबूती भावनाओं से ज्यादा डिजिटल समझदारी पर आधारित होगी।
जब सितारे नहीं, स्क्रीन बोलती है
आज संगतता तय करने वाले ग्रह नहीं, बल्कि
सर्च हिस्ट्री, ऐप यूसेज और डिजिटल नैतिकता हैं।
साइबर कुंडली इस बात का संकेत है कि अब रिश्ते आकाश में नहीं, बल्कि स्क्रीन पर लिखे जा रहे हैं — सच्चाई, समझ और तकनीक के साथ।
