देशभर में गणेश चतुर्थी की धूम के बीच मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा के चरणों में भक्ति का एक और अद्भुत दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी और नोटों ने दानपात्र को इस कदर भर दिया कि मंदिर परिसर एक खजाने की तरह चमक उठा।
परंपरा और भव्यता का संगम
लालबागचा राजा केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि मुंबई की आस्था और सामाजिक सहयोग का केंद्र है। हर वर्ष यहां भक्तजन छोटी-छोटी भेंट से लेकर लाखों रुपये मूल्य के गहनों और विदेशी मुद्रा तक अर्पित करते हैं। इस वर्ष भी दानपात्र में चढ़ावा देखकर भक्तों के साथ-साथ पूरे शहर की नजरें ठहर गईं।
भक्ति से सेवा तक
मंदिर ट्रस्ट की ओर से यह दान राशि केवल धार्मिक उपयोग तक सीमित नहीं रहती। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और राहत कार्यों में इन निधियों का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार, भक्ति से उपजा दान समाज सेवा का रूप लेता है, जो मुंबई जैसे महानगर में असमानताओं को पाटने का प्रयास भी है।
उत्सव जो जोड़ता है सबको
गणेश उत्सव मुंबई के लिए केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी है। लालबागचा राजा के दरबार में उमड़ते चढ़ावे और भीड़ इस बात का प्रमाण हैं कि यह परंपरा करोड़ों लोगों को एक साथ जोड़ने का कार्य करती है — आस्था, उत्सव और समाज सेवा के साझा सूत्र में।