उल्हासनगर (महाराष्ट्र)। महाराष्ट्र के उल्हासनगर में मेडिकल भरोसे से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक फैमिली डॉक्टर पर किडनी ट्रांसप्लांट और डोनर उपलब्ध कराने के नाम पर एक महिला से ₹31 लाख से अधिक की ठगी करने का आरोप लगा है। पुलिस ने इस मामले में सात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, हालांकि अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
शिकायत के अनुसार, आरोपी डॉक्टर ने एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवार की भावनात्मक मजबूरी का फायदा उठाया। पीड़ित महिला दीपाली चव्हाण ने पहले अपने पति की जान बचाने के लिए अपनी एक किडनी दान कर दी थी। लेकिन ऑपरेशन के बाद संक्रमण और स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण पति की हालत फिर बिगड़ गई, जिसके बाद परिवार दोबारा इलाज के लिए संघर्ष कर रहा था।
एफआईआर में आरोप है कि फैमिली डॉक्टर गौरव धर्मा नायर ने महिला को भरोसा दिलाया कि वह एक उपयुक्त किडनी डोनर उपलब्ध करा सकता है और सफल ट्रांसप्लांट करवा सकता है। डॉक्टर के इस आश्वासन पर परिवार ने इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, इसके बाद डॉक्टर ने पीड़िता की मुलाकात कुछ अन्य लोगों से कराई, जिनमें कौशल्या बिस्वास, जयदेव बिस्वास और अन्य शामिल बताए गए हैं। आरोप है कि इन्हीं लोगों के जरिए डोनर और ऑपरेशन की व्यवस्था के नाम पर पैसों का लेन-देन कराया गया।
2 जुलाई 2025 से 7 मार्च 2026 के बीच पीड़िता से नकद और डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए अलग-अलग किस्तों में रकम वसूली गई। कुल मिलाकर पीड़िता से लगभग ₹31.67 लाख लिए गए, लेकिन न तो कोई डोनर उपलब्ध कराया गया और न ही कोई ऑपरेशन हुआ।
मामला तब सामने आया जब लंबे समय तक इंतजार के बाद भी कोई मेडिकल प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और पीड़िता को शक हुआ। इसके बाद उसने विट्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर सात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में इस पूरे मामले के तार महाराष्ट्र से बाहर तक जुड़ते दिख रहे हैं। कुछ वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध गतिविधियों के संकेत ओडिशा के भुवनेश्वर तक मिले हैं, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
जांच एजेंसियों को शक है कि यह केवल एक मामला नहीं बल्कि कई राज्यों में फैले किसी संगठित किडनी रैकेट का हिस्सा हो सकता है, जो मरीजों को झूठे वादों के जरिए ठगता है।
हालांकि मामला गंभीर होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार में नाराजगी बढ़ा दी है। यह भी आरोप है कि मुख्य आरोपी डॉक्टर अब भी अपने क्लिनिक का संचालन कर रहा है।
पुलिस ने पूरे मामले की वित्तीय जांच शुरू कर दी है। बैंक खातों, डिजिटल पेमेंट ट्रेल और कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि पैसे के प्रवाह और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
स्वास्थ्य और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अंग प्रत्यारोपण भारत में सख्त कानूनों और सरकारी मंजूरी के तहत ही किया जा सकता है। किसी भी निजी स्तर पर डोनर या ट्रांसप्लांट का दावा संदिग्ध माना जाना चाहिए।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी मेडिकल ऑफर या डोनर व्यवस्था पर बिना आधिकारिक पुष्टि के भरोसा न करें और केवल मान्यता प्राप्त अस्पतालों और सरकारी प्रक्रियाओं के माध्यम से ही इलाज कराएं।
फिलहाल पुलिस इस मामले को गंभीर आर्थिक और मेडिकल फ्रॉड मानते हुए जांच आगे बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में और खुलासे और संभावित गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
