नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर टेक सेक्टर में जिस बड़े बदलाव की आशंका जताई जा रही थी, उसका असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है। इस साल अब तक दुनिया भर में टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार 29 जुलाई तक 322 छंटनी की घटनाओं में करीब 2.06 लाख कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन लगभग 985 टेक कर्मचारियों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी है।
टेक इंडस्ट्री में यह बदलाव केवल आर्थिक दबाव की वजह से नहीं, बल्कि कंपनियों द्वारा एआई आधारित तकनीकों को तेजी से अपनाने और अपने कामकाज के तरीकों में बदलाव के कारण भी देखा जा रहा है। कई कंपनियां अब पारंपरिक भूमिकाओं की जगह ऑटोमेशन, एआई टूल्स और मशीन लर्निंग आधारित सिस्टम को प्राथमिकता दे रही हैं।
Oracle में सबसे बड़ी छंटनी
इस साल टेक सेक्टर की सबसे बड़ी छंटनी में से एक Oracle में देखने को मिली। कंपनी ने जून के अंत में खुलासा किया कि पिछले 12 महीनों के दौरान उसने करीब 21,000 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया है। यह संख्या कंपनी के कुल कर्मचारियों का लगभग 13 प्रतिशत बताई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार Oracle समेत कई बड़ी टेक कंपनियां अपने संसाधनों को क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों की ओर स्थानांतरित कर रही हैं। इसके चलते पारंपरिक आईटी भूमिकाओं में कटौती की जा रही है और नई तकनीकी क्षमताओं वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है।
Microsoft में भी बड़े स्तर पर बदलाव
दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियों में शामिल Microsoft ने भी इस साल कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है। कंपनी ने 9 जुलाई को अपने वैश्विक कार्यबल के करीब 2.1 प्रतिशत हिस्से को कम करने की जानकारी दी थी। इसके तहत लगभग 4,800 पद समाप्त किए गए, जिनमें बड़ी संख्या Xbox गेमिंग डिवीजन से जुड़ी थी।
Microsoft समेत कई कंपनियां एआई आधारित सेवाओं, क्लाउड प्लेटफॉर्म और डिजिटल उत्पादों पर निवेश बढ़ा रही हैं। इसी रणनीति के तहत कई पुराने विभागों में पुनर्गठन किया जा रहा है।
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भारतीय आईटी सेक्टर पर भी असर
वैश्विक टेक बदलाव का असर भारतीय आईटी सेक्टर पर भी पड़ा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत में इस बदलाव से करीब 20 हजार से 35 हजार टेक प्रोफेशनल प्रभावित हो सकते हैं।
बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे प्रमुख आईटी केंद्रों में मौजूद वैश्विक कंपनियों के ग्लोबल डिलीवरी और डेवलपमेंट सेंटरों में भी छंटनी और पुनर्गठन की प्रक्रिया देखने को मिली है। Amazon, Microsoft, Dell और Atlassian जैसी कंपनियों ने अपने कुछ विभागों में बदलाव किए हैं।
भारतीय आईटी कंपनियां भी इस बदलाव से प्रभावित हैं। TCS, Infosys और Wipro जैसी बड़ी कंपनियों ने सामान्य इंजीनियरिंग और पारंपरिक सॉफ्टवेयर भूमिकाओं के लिए नई भर्तियों की गति धीमी कर दी है। कंपनियां अब ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिनके पास एआई, मशीन लर्निंग, क्लाउड और डेटा एनालिटिक्स जैसी नई तकनीकी क्षमताएं हैं।
नौकरियां खत्म नहीं, भूमिकाएं बदल रही हैं
टेक विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के कारण पूरी तरह से नौकरियां खत्म नहीं हो रही हैं, बल्कि उनमें बदलाव हो रहा है। पारंपरिक कोडिंग, टेस्टिंग और सपोर्ट जैसी भूमिकाओं में कमी आ सकती है, लेकिन एआई मॉडल डेवलपमेंट, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और ऑटोमेशन से जुड़ी नौकरियों की मांग बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में टेक प्रोफेशनल्स के लिए लगातार नई स्किल सीखना जरूरी होगा। कंपनियां ऐसे कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं, जो एआई टूल्स का इस्तेमाल करके बेहतर और तेज समाधान तैयार कर सकें।
टेक इंडस्ट्री में नई दिशा
एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच टेक सेक्टर एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। जहां एक ओर लाखों कर्मचारियों पर छंटनी का असर पड़ा है, वहीं दूसरी ओर नई तकनीकी भूमिकाओं के अवसर भी बढ़ रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में वही प्रोफेशनल आगे रहेंगे, जो बदलती तकनीक के साथ खुद को लगातार अपडेट करते रहेंगे।
