परभणी: महाराष्ट्र के परभणी जिले में किसानों से कथित तौर पर ₹5.56 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दो फरार आढ़त कारोबारियों को गिरफ्तार किया है। मामला पूर्णा तहसील के एरंडेश्वर के झिरोफाटा इलाके में संचालित जय किसान ट्रेडिंग कंपनी से जुड़ा है। आरोप है कि कारोबारियों ने किसानों से उधार पर सैकड़ों क्विंटल कृषि उपज खरीदी, लेकिन उसे बेचने के बाद किसानों को भुगतान नहीं किया। जांच के अनुसार, किसानों की बकाया राशि ₹5 करोड़ 56 लाख 49 हजार 300 बताई गई है।
मामला तब सामने आया जब कई किसानों को अपनी कृषि उपज का भुगतान नहीं मिला और संबंधित व्यापारी कथित तौर पर फरार हो गए। एरंडेश्वर निवासी किसान रामप्रसाद साहेबराव काले ने 18 जुलाई को पूर्णा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की। कथित धोखाधड़ी की राशि ₹5 करोड़ से अधिक होने के कारण मामले की विस्तृत वित्तीय जांच बाद में आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी गई।
EOW ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद आरोपियों की तलाश तेज कर दी। जांच टीम को उनके संभावित ठिकानों के बारे में गोपनीय जानकारी मिली, जिसके आधार पर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी गई। इसके बाद बीड जिले के केज पुलिस थाने के कर्मचारियों की सहायता से संयुक्त कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान एरंडेश्वर निवासी शेख हमीद उर्फ अमित और उसके पिता शेख सरू को 14 अगस्त को गिरफ्तार किया गया।
दोनों आरोपियों पर ट्रेडिंग कारोबार के जरिए किसानों से कृषि उपज खरीदने के बाद उनका भुगतान नहीं करने का आरोप है। जांचकर्ता अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि कृषि उपज बेचने से प्राप्त रकम को किसानों को देने के बजाय कहीं और स्थानांतरित, निवेश या इस्तेमाल तो नहीं किया गया। साथ ही, पैसों की पूरी आवाजाही का पता लगाने और मामले में अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच की जा रही है।
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें छह दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। हिरासत के दौरान जांच टीम उनसे खरीदी गई कृषि उपज की मात्रा, बिक्री मूल्य, बिक्री से प्राप्त रकम और किसानों को किए जाने वाले लंबित भुगतान के बारे में पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कारोबार में कितने किसानों से माल खरीदा गया था।
जांच में एक महत्वपूर्ण वित्तीय कड़ी भी सामने आई है। आर्थिक अपराध शाखा के अनुसार, आरोपियों ने कृषि उपज बेचकर प्राप्त रकम के एक हिस्से को बुलढाणा अर्बन क्रेडिट सोसायटी में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के रूप में निवेश किया था। जांच टीम ने इन FD से जुड़ी रकम जब्त करने में सफलता हासिल की है। अब अधिकारी यह सत्यापित कर रहे हैं कि जमा की गई रकम किसानों की कृषि उपज की बिक्री से प्राप्त धन का हिस्सा थी या नहीं।
जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या आरोपियों ने अन्य रकम बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित की या किसी दूसरे वित्तीय साधन में निवेश किया। बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि कथित धोखाधड़ी केवल शिकायत में बताई गई ₹5.56 करोड़ की बकाया राशि तक सीमित है या वित्तीय लेनदेन का कुल दायरा इससे भी बड़ा है।
मामले ने क्षेत्र के किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि कथित तौर पर करोड़ों रुपये मूल्य की कृषि उपज ट्रेडिंग कंपनी को सौंपी गई थी। किसान आम तौर पर कृषि उपज बेचने के लिए आढ़तियों और स्थानीय व्यापारियों पर निर्भर रहते हैं। समय पर भुगतान से उन्हें घरेलू खर्च, कृषि ऋण और अगली फसल के लिए बीज, खाद तथा अन्य जरूरी सामग्री खरीदने में मदद मिलती है। ऐसे में करोड़ों रुपये का भुगतान अटकना किसानों के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर सकता है।
EOW अब उन अन्य किसानों के बयान भी दर्ज कर सकती है, जिन्होंने आरोपियों के माध्यम से अपनी कृषि उपज बेची थी। इससे प्रभावित किसानों की वास्तविक संख्या और कथित फर्जीवाड़े की पूरी सीमा सामने आने की संभावना है। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या इसी तरह के लेनदेन एरंडेश्वर के अलावा आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी किए गए थे।
जांच का फोकस आरोपियों से जुड़े बैंक खातों, FD, कृषि उपज की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और संपत्तियों पर भी है। अधिकारी हल्दी, चना, गेहूं, तूर और सोयाबीन की बिक्री से प्राप्त रकम की पूरी वित्तीय कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी से बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे किसानों को राहत की उम्मीद जगी है। जब्त रकम कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और अदालत के निर्देश के बाद संबंधित किसानों को लौटाई जा सकती है। हालांकि, वास्तविक वसूली और राशि के वितरण का फैसला जांच तथा आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। आर्थिक अपराध शाखा दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्यों की जांच जारी रखे हुए है। यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो मामले में आगे गिरफ्तारी और वित्तीय कार्रवाई की जा सकती है।
