नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साइबर फ्रॉड की जांच से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कहा है कि किसी बैंक खाते में केवल एक संदिग्ध लेनदेन की जांच चल रही हो तो पूरी रकम और खाते के संचालन पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी यदि किसी खास रकम को संदिग्ध मानती है तो सामान्य तौर पर उतनी ही राशि पर लियन लगाया जाना चाहिए और खाताधारक को बाकी वैध धन का इस्तेमाल करने दिया जाना चाहिए। अदालत ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रभावी व्यवस्था रखने तथा खाते फ्रीज होने की स्थिति में उपलब्ध उपायों की स्पष्ट जानकारी देने का निर्देश भी दिया।
यह आदेश लखनऊ के एक कारोबारी की याचिका पर 6 अगस्त को सुनाया गया। कारोबारी का निर्माण क्षेत्र से जुड़ा कारोबार है और वह कमीशन के आधार पर निर्माण सामग्री की आपूर्ति करता है। वह ‘वृंदा ट्रेडर्स’ नाम से कारोबार करता है। मामले में उसके एक बैंक खाते में केवल ₹36,000 के संदिग्ध लेनदेन की जांच चल रही थी, लेकिन इस आधार पर उसके कई बैंक खातों को प्रतिबंधित कर दिया गया था। इससे वह अपने नियमित कारोबारी लेनदेन और वैध धन का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था।
₹36,000 के लेनदेन से शुरू हुआ पूरा विवाद
अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों के अनुसार, कारोबारी ने 3 मार्च 2026 को नियमित व्यावसायिक लेनदेन के दौरान अपने एक बैंक खाते पर ‘लियन मार्क’ देखा। प्रतिबंध के कारण उसका लेनदेन पूरा नहीं हो सका। इसके बाद उसने 5 मार्च को UCO Bank से संपर्क कर खाते पर लगी रोक का कारण पूछा। बैंक की ओर से उसे बताया गया कि किसी संदिग्ध लेनदेन के कारण खाते पर लियन लगाया गया है।
कारोबारी ने 7 मार्च को हजरतगंज स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में संपर्क किया। वहां उसे बताया गया कि उसके खातों को उत्तर प्रदेश के बाहर की एक साइबर अपराध एजेंसी के निर्देश पर फ्रीज किया गया है। इसके बाद उसके Bandhan Bank, ICICI Bank और Axis Bank के अन्य खातों पर भी रोक लग गई। कारोबारी का कहना था कि कई खातों के प्रतिबंधित होने से वह अपनी सामान्य कारोबारी गतिविधियां संचालित नहीं कर पा रहा था।
लगातार जानकारी जुटाने के बाद उसे 10 जून को बताया गया कि Bandhan Bank खाते में जमा ₹36,000 का एक लेनदेन संदिग्ध पाया गया है। यह रकम कर्नाटक के विजयपुरा स्थित Cyber, Economic and Narcotics Crime Police Station में दर्ज FIR से जुड़ी साइबर फ्रॉड जांच के दायरे में थी।
कारोबारी ने कहा- संदिग्ध रकम पर रोक रखें, बाकी पैसा छोड़ें
कारोबारी ने बैंकों और जांच अधिकारी से कहा कि यदि ₹36,000 की रकम जांच के दायरे में है तो उस पर लियन बरकरार रखा जा सकता है, लेकिन बाकी रकम को इस्तेमाल के लिए जारी किया जाए। उसका तर्क था कि पूरी बैंकिंग व्यवस्था रोक देने से उसके कारोबार और वैध वित्तीय गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ रहा है। अनुरोध स्वीकार नहीं होने के बाद उसने हाईकोर्ट का रुख किया।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अब्धेश कुमार चौधरी की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि साइबर अपराध जैसे मामलों में जांच एजेंसियों के पास बैंक खाते फ्रीज करने की शक्ति है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति की पूरी वैध वित्तीय गतिविधियां ठप हो जाएं। जब जांच एजेंसी खुद किसी निश्चित रकम को विवादित बता रही है, तो पूरे खाते को रोकने का औचित्य अलग से स्थापित करना होगा।
कोर्ट ने ₹36,000 पर लियन रखने का आदेश दिया
अदालत ने बैंकों को निर्देश दिया कि कारोबारी को ₹36,000 से अधिक की रकम का इस्तेमाल करने दिया जाए और विवादित ₹36,000 पर लियन बरकरार रखा जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे जांच एजेंसी की जांच या कानून के तहत आगे की कार्रवाई की शक्ति प्रभावित नहीं होगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो एजेंसी कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठा सकती है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि उसे ऐसे कई मामले मिल रहे हैं, जिनमें साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान लोगों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाते हैं। अदालत ने केंद्र के गृह मंत्रालय की ओर से बनाए गए Standard Operating Procedure के तहत उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था का भी उल्लेख किया।
इस व्यवस्था के तहत प्रभावित खाताधारक पहले संबंधित बैंक से शिकायत कर सकता है। यदि बैंक को खाताधारक की पहचान और लेनदेन वास्तविक प्रतीत होते हैं, तो बैंक शिकायत को National Cybercrime Reporting Portal-Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System की grievance प्रक्रिया के माध्यम से आगे भेज सकता है। इसके बाद जांच अधिकारी शिकायत की जांच कर सकता है और जरूरत पड़ने पर जिला तथा राज्य स्तर के grievance officers के स्तर पर भी समीक्षा हो सकती है।
बैंकों को शिकायत प्रक्रिया सार्वजनिक करने का निर्देश
कोर्ट ने कहा कि ग्राहकों को यह जानकारी मिलना जरूरी है कि उनका खाता किस कारण से फ्रीज किया गया है और शिकायत कहां दर्ज करनी है। अदालत ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपने अधिकार क्षेत्र में खातों के फ्रीज होने से संबंधित शिकायतों के लिए उचित व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया। शाखाओं और आधिकारिक वेबसाइटों पर ग्राहक शिकायत, साइबर फ्रॉड, खाते पर रोक और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं के निलंबन से जुड़ी जानकारी प्रमुखता से उपलब्ध कराने को भी कहा गया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश साइबर अपराध की रकम को सुरक्षित रखने या संदिग्ध खातों पर कानूनी कार्रवाई करने की जांच एजेंसियों की शक्ति को खत्म नहीं करता। हालांकि, जांच और खाताधारक के वैध वित्तीय अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर कारोबारी को ₹36,000 छोड़कर अपने खातों में उपलब्ध बाकी वैध रकम का संचालन करने की अनुमति दी और याचिका का निपटारा कर दिया।
