भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कथित बड़े पैमाने के अकाउंटिंग फ्रॉड मामले में Debock Industries और उसके प्रमोटर-मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश मनवीर सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। नियामक ने दोनों को सात साल के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अलावा कंपनी से जुड़े कई निदेशकों और सहयोगियों पर तीन से पांच साल तक बाजार में कारोबार करने की पाबंदी लगाई गई है।
SEBI के अंतिम आदेश के अनुसार, कंपनी ने कथित तौर पर सर्कुलर ट्रांजैक्शन, फर्जी एंट्री और अन्य अकाउंटिंग अनियमितताओं के जरिए अपने वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर किया। नियामक के मुताबिक, इन लेनदेन के माध्यम से बिक्री और खरीद के आंकड़ों को बढ़ाया गया, जिससे कंपनी की वित्तीय स्थिति वास्तविकता से बेहतर दिखाई दे। यह कथित हेरफेर वर्ष 2022 में Debock Industries के NSE मेनबोर्ड में माइग्रेशन से पहले किया गया था।
SEBI ने मुकेश मनवीर सिंह और संबंधित निदेशकों को संयुक्त रूप से ₹59.30 करोड़ के कथित अवैध लाभ की भरपाई करने का आदेश दिया है। इस राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। इसके साथ ही Debock Industries को 2023 के राइट्स इश्यू से कथित तौर पर डायवर्ट किए गए ₹49 करोड़ को ब्याज समेत वापस लाने का निर्देश दिया गया है।
नियामक ने अलग से कंपनी और मामले में जिम्मेदार ठहराए गए व्यक्तियों पर कुल ₹28 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया है। इनमें मुकेश मनवीर सिंह पर अकेले ₹20.10 करोड़ की पेनल्टी लगाई गई है।
SEBI की जांच में ऐसे कई लेनदेन सामने आए, जिन्हें नियामक ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को कथित तौर पर गलत तरीके से पेश करने वाली योजना का हिस्सा माना। आदेश के अनुसार, सर्कुलर ट्रांजैक्शन और फर्जी अकाउंटिंग एंट्री के जरिए बिक्री और खरीद को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। इस तरह के लेनदेन से बिना वास्तविक कारोबारी गतिविधि के कंपनी के कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन को मजबूत दिखाया जा सकता है।
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नियामक के अनुसार, कथित अकाउंटिंग हेरफेर का इस्तेमाल Debock Industries के 2022 में NSE मेनबोर्ड में माइग्रेशन के दौरान भी किया गया। SEBI ने यह भी पाया कि कथित अनियमितताओं के तहत बैंक स्टेटमेंट के साथ छेड़छाड़ और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था।
SEBI ने कंपनी द्वारा जारी किए गए प्रेफरेंशियल वारंट और बोनस शेयरों की भी जांच की। नियामक के मुताबिक, इन सिक्योरिटीज को जारी करने के बदले कंपनी को वास्तविक और उचित प्रतिफल प्राप्त नहीं हुआ। इसे भी कथित वित्तीय और प्रतिभूति लेनदेन में हेरफेर से जुड़े व्यापक मामले का हिस्सा माना गया।
मामले का एक अहम हिस्सा 2023 का राइट्स इश्यू है। SEBI के अनुसार, इस इश्यू से जुटाई गई रकम को कथित तौर पर संबंधित इकाई Impex Agrotech के माध्यम से रूट किया गया। इसके बाद यह रकम प्रमोटरों तक पहुंची और अंततः विदेशी संस्थाओं को ट्रांसफर की गई।
राइट्स इश्यू के जरिए कंपनियां मौजूदा शेयरधारकों से अतिरिक्त पूंजी जुटाती हैं। ऐसे में जुटाई गई रकम का कथित डायवर्जन निवेशकों के हितों, कंपनी के खुलासे और फंड के घोषित इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
Debock Industries और मुकेश मनवीर सिंह पर लगाया गया सात साल का प्रतिबंध उन्हें निर्धारित अवधि तक प्रतिभूति बाजार में भाग लेने से रोकता है। मामले से जुड़े अन्य निदेशकों और सहयोगियों पर भी तीन से पांच साल तक की अलग-अलग पाबंदियां लगाई गई हैं।
SEBI की कार्रवाई वित्तीय रिपोर्टिंग, अकाउंटिंग प्रथाओं, संबंधित पक्षों के लेनदेन और सार्वजनिक बाजार से जुटाई गई पूंजी के इस्तेमाल पर नियामक की सख्ती को दर्शाती है। बाजार नियामक ने प्रतिबंध, अवैध लाभ की वसूली और आर्थिक जुर्माने के जरिए कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ निवेशकों की रकम की रिकवरी पर भी जोर दिया है।
इस मामले में कथित अनियमितताएं वित्तीय रिपोर्टिंग, शेयर बाजार में लिस्टिंग, सिक्योरिटीज जारी करने और राइट्स इश्यू से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल तक फैली हुई हैं। SEBI का आदेश सूचीबद्ध कंपनियों के लिए यह स्पष्ट करता है कि वित्तीय रिकॉर्ड में गलत जानकारी, फंड के कथित डायवर्जन और निवेशकों को प्रभावित करने वाली गलत गतिविधियों पर नियामकीय कार्रवाई के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
