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Home»Fraud Alert»नकली तांत्रिक बनकर साइबर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया, नालंदा में छह गिरफ्तार
Fraud Alert

नकली तांत्रिक बनकर साइबर ठगी करने वाला गिरोह पकड़ा गया, नालंदा में छह गिरफ्तार

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 12, 2026No Comments4 Mins Read
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वशीकरण के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठने और सोशल मीडिया पर एस्कॉर्ट सेवा में नौकरी का झांसा देकर ठगी का आरोप; 10 स्मार्टफोन बरामद, डिजिटल लेनदेन और सोशल मीडिया खातों की जांच जारी
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पटना। बिहार के नालंदा जिले में पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले छह सदस्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य कभी खुद को तांत्रिक बताकर वशीकरण कराने का झांसा देते थे तो कभी सोशल मीडिया पर एस्कॉर्ट सेवा में आकर्षक नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से रकम वसूलते थे। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे 10 स्मार्टफोन बरामद किए गए हैं।
यह कार्रवाई जिले में चलाए जा रहे विशेष साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि गिरोह के कुछ सदस्य चुलिहारी पुल के पास साइबर ठगी की योजना बना रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर इलाके की घेराबंदी की और चार संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर बाद में उगावां गांव में छापेमारी की गई, जहां से दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चुलिहारी निवासी बंटी कुमार (21), सोनू कुमार (19), सोनेलाल पासवान (36) और लकी कुमार (18) के रूप में हुई है। इनके अलावा उगावां निवासी दीपक कुमार (19) और एक अन्य सोनू कुमार (20) को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब गिरोह के सदस्यों के मोबाइल फोन और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर उसके नेटवर्क का विस्तार पता लगाने में जुटी है।
जांच के अनुसार, गिरोह ने साइबर ठगी के लिए अलग-अलग तरीके अपना रखे थे। इनमें एक प्रमुख तरीका खुद को आध्यात्मिक साधक या तांत्रिक बताकर लोगों को वशीकरण कराने का झांसा देना था। आरोपी दावा करते थे कि विशेष पूजा या तांत्रिक अनुष्ठान के जरिए किसी व्यक्ति को उनकी ओर आकर्षित या प्रभावित किया जा सकता है। इसके बाद पीड़ितों से पूजा, अनुष्ठान और अन्य कथित सेवाओं के नाम पर अलग-अलग रकम जमा कराई जाती थी।
ठगी का दूसरा तरीका सोशल मीडिया के जरिए एस्कॉर्ट सेवा में आकर्षक और अधिक वेतन वाली नौकरी का लालच देना था। गिरोह के सदस्य नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को ऑनलाइन विज्ञापन या संदेशों के जरिए संपर्क करते थे। रुचि दिखाने वाले लोगों से पंजीकरण, सुरक्षा राशि, दस्तावेज सत्यापन या अन्य बहानों से पैसे जमा कराए जाते थे। रकम मिलने के बाद आरोपी संपर्क बंद कर देते थे।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

पुलिस के मुताबिक, गिरोह संभावित पीड़ितों की पहचान करने और उनसे संपर्क बनाए रखने के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता था। मोबाइल फोन के जरिए बातचीत और संदेशों का सिलसिला तब तक जारी रखा जाता था, जब तक पीड़ित से रकम हासिल नहीं हो जाती थी। इसके बाद संपर्क तोड़ दिया जाता था।
तकनीकी जांच में भी आरोपियों के एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पुलिस ने बरामद स्मार्टफोन को जांच के लिए सुरक्षित कर लिया है। इनमें मौजूद कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया खातों, चैट, संपर्क सूची, बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से संबंधित जानकारी की जांच की जा रही है।
जांचकर्ताओं को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं, जो पीड़ितों की जानकारी जुटाने, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल या विज्ञापन तैयार करने और रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कराने में मदद करते थे। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऑनलाइन ठगी के ऐसे मामलों में अपराधी लोगों की धार्मिक आस्था, व्यक्तिगत समस्याओं और रोजगार की जरूरत को निशाना बनाकर भरोसा कायम करते हैं। इसके बाद अलग-अलग बहानों से पैसे जमा कराए जाते हैं। नालंदा में सामने आए इस मामले में भी आरोपियों ने कथित तौर पर इसी तरह अलग-अलग समूहों को निशाना बनाया। जांच पूरी होने के बाद गिरोह की ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की संख्या स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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