वॉशिंगटन। अमेरिका में H-1B वीजा और विदेशी श्रमिकों से जुड़े रोजगार कार्यक्रमों पर जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी’एस्पोसिटो ने दावा किया है कि जांचकर्ताओं ने H-1B वीजा और विदेशी श्रम कार्यक्रमों में करीब 20 अरब डॉलर यानी लगभग ₹1.65 लाख करोड़ की संदिग्ध धोखाधड़ी का पता लगाया है। हालांकि, इस रकम का विस्तृत ब्योरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि बताए गए आंकड़े में कितनी कंपनियों, वीजा याचिकाओं या कथित योजनाओं को शामिल किया गया है।
डी’एस्पोसिटो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने कार्यवाहक श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग के साथ मिलकर H-1B और विदेशी श्रम से जुड़ी संदिग्ध धोखाधड़ी का पता लगाया है। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की व्हाइट हाउस धोखाधड़ी उन्मूलन टास्क फोर्स के साथ मिलकर की जा रही है। पोस्ट में उन्होंने कहा कि मामलों को तैयार किया जा रहा है और आगे गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
H-1B और PERM कार्यक्रम जांच के केंद्र में
श्रम विभाग के महानिरीक्षक कार्यालय की जांच H-1B और PERM रोजगार-आधारित आव्रजन कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी और दुरुपयोग पर केंद्रित है। जांच में कथित फर्जी वीजा आवेदन, अनुचित वेतन व्यवस्था, किकबैक और विदेशी श्रमिकों को प्रायोजित करने वाले नियोक्ताओं तथा श्रम बिचौलियों की गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।
H-1B कार्यक्रम के तहत अमेरिकी नियोक्ता कुछ विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में काम करने के लिए प्रायोजित कर सकते हैं। वहीं, PERM श्रम प्रमाणन प्रक्रिया उन मामलों में महत्वपूर्ण होती है जहां नियोक्ता विदेशी कर्मचारी के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसी वजह से इन प्रक्रियाओं में नौकरी, वेतन और भर्ती से जुड़े दस्तावेज जांच का अहम हिस्सा बन सकते हैं।
डलास में 500 से अधिक स्वीकृत याचिकाओं से जुड़े ठिकाने की जांच
जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों ने कुछ कार्यस्थलों का भौतिक निरीक्षण भी किया है। अगस्त में डी’एस्पोसिटो ने डलास में ऐसे स्थानों के निरीक्षण की जानकारी दी थी, जो सैकड़ों स्वीकृत H-1B याचिकाओं वाली कंपनियों से जुड़े थे।
महानिरीक्षक कार्यालय के अनुसार, एक इमारत 500 से अधिक स्वीकृत H-1B याचिकाओं से जुड़ी हुई थी। निरीक्षण के दौरान कई कार्यालय निष्क्रिय या नियमित कारोबारी गतिविधियों के बिना दिखाई दिए। अधिकारियों ने ऐसे मामलों में यह जांचने की जरूरत बताई है कि वीजा आवेदनों में दर्ज रोजगार और वास्तविक कार्यस्थल की स्थिति के बीच कोई अंतर तो नहीं है।
Cognizant और Cloudera की PERM प्रक्रिया भी जांच में
जांच का असर PERM श्रम प्रमाणन व्यवस्था पर भी पड़ा है। श्रम विभाग ने Cognizant और Cloudera से संबंधित PERM दाखिलों पर कार्रवाई की है। इन कंपनियों से जुड़ी प्रक्रियाओं की जांच कथित वीजा और रोजगार संबंधी अनियमितताओं के संदर्भ में की जा रही है।
इस कार्रवाई के बीच नियोक्ताओं के नौकरी प्रस्ताव, कर्मचारियों को दिया जाने वाला वेतन, कार्यस्थल के पते, भर्ती के रिकॉर्ड और आव्रजन दस्तावेज जांच के दायरे में आ सकते हैं। H-1B कर्मचारियों के लिए भी रोजगार की वास्तविक परिस्थितियों और अधिकारियों के पास जमा दस्तावेजों के बीच समानता महत्वपूर्ण होगी।
जांच जारी, ₹1.65 लाख करोड़ के दावे का पूरा ब्योरा बाकी
श्रम विभाग के महानिरीक्षक कार्यालय ने संकेत दिया है कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। अधिकारी विदेशी श्रमिकों को प्रायोजित करने वाली कंपनियों, श्रम बिचौलियों और संबंधित रोजगार व्यवस्थाओं की पड़ताल कर रहे हैं।
हालांकि, 20 अरब डॉलर की संदिग्ध धोखाधड़ी का दावा सामने आने के बावजूद अभी तक इस आंकड़े का विस्तृत वित्तीय विश्लेषण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कथित धोखाधड़ी में कौन-कौन से मामले शामिल हैं, कितनी रकम वास्तव में नुकसान या अवैध लाभ के रूप में सामने आई और कितने मामलों में आपराधिक कार्रवाई की स्थिति बनी है। जांच आगे बढ़ने के साथ इन पहलुओं पर और जानकारी सामने आने की संभावना है।
