रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में कथित सेटिंग और गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी के सामने आरोपी सौरभ कुमार उर्फ सौरभ पांडेय की भूमिका सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, सौरभ मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी का रिश्तेदार होने के साथ कथित परीक्षा सेटिंग नेटवर्क में एजेंट और महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर काम कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि रांची में 50 हजार रुपये मासिक किराये पर लिया गया एक मकान कथित तौर पर पूरे नेटवर्क के संचालन का बेस कैंप बना हुआ था। इसी ठिकाने से अभ्यर्थियों को चयन का भरोसा दिलाने, रकम जुटाने और परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों में कथित हेराफेरी की गतिविधियां संचालित होने का दावा किया गया है।
सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, सौरभ ने छह जनवरी 2026 को मकान मालकिन के साथ 11 महीने का किरायानामा किया था। किरायानामे में उसने खुद को टीडीपीएल का कर्मचारी बताया था। मकान की ऊपरी मंजिल को 50 हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर लिया गया था। जांच एजेंसी का कहना है कि बाद में इसी फ्लैट में टीडीपीएल से जुड़े कई कर्मियों और बाहरी लोगों के ठहरने की जानकारी मिली। रणवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, पीके सिंह, हेमंत, संजय, उस्मान और एबाद समेत कई लोगों के इस मकान में रहने की बात जांच में सामने आई है।
जांच में कथित परीक्षा सेटिंग नेटवर्क के काम करने के तरीके पर भी फोकस किया जा रहा है। सीआईडी को संदेह है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफलता दिलाने का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूली जाती थी। इसके साथ ही कुछ अभ्यर्थियों से ब्लैंक चेक, सादे स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर और मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र लिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इन दस्तावेजों और रकम का इस्तेमाल कथित नेटवर्क में किस तरह किया जाता था, इसकी कड़ियां सीआईडी जोड़ रही है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, अप्रैल 2026 में होने वाली परीक्षा में चयन कराने का झांसा देकर 24 से अधिक अभ्यर्थियों को कथित तौर पर इस नेटवर्क से जोड़ा गया था। इनमें से 11 अभ्यर्थियों से चयन के नाम पर करीब 1.20 करोड़ रुपये वसूले जाने की बात जांच में सामने आई है। जब कुछ अभ्यर्थियों को कथित ठगी का पता चला और उन्होंने अपने मूल प्रमाणपत्र वापस मांगे, तो सौरभ के उमेश कुमार के माध्यम से दस्तावेज निकलवाने की बात भी जांच में सामने आई है।
सीआईडी अब इस बात की जांच कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेराफेरी किस स्तर तक पहुंची थी। जांच में ओएमआर शीट से लेकर सर्वर तक में गड़बड़ी किए जाने का शक जताया गया है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। एजेंसी दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा के किस चरण में और किन लोगों की मदद से कथित हेराफेरी की कोशिश की गई।
रांची में किराये पर लिए गए मकान को जांच में इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां कथित नेटवर्क से जुड़े कई लोगों के एक साथ रहने की जानकारी सामने आई है। सीआईडी इस मकान से जुड़े किरायानामे, वहां रहने वाले लोगों, उनके मोबाइल नंबरों और आपसी संपर्क की जांच कर रही है। साथ ही अभ्यर्थियों से जुड़े बैंक लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि रकम किसके खाते में गई और बाद में उसका इस्तेमाल या बंटवारा किस तरह हुआ।
सौरभ कुमार की गिरफ्तारी के लिए सीआईडी लगातार प्रयास कर रही है। जांच अधिकारी ने अदालत से उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट हासिल कर लिया है। एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए सौरभ लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है। सीआईडी का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद कथित परीक्षा सेटिंग नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, अभ्यर्थियों से रकम जुटाने के तरीके और परीक्षा प्रक्रिया में संभावित हस्तक्षेप से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं।
इसी बीच झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) सीजीएल परीक्षा मामले में भी सीआईडी की जांच जारी है। गिरफ्तार किए गए सफल अभ्यर्थी कुंदन कुमार और समीर कुमार से पूछताछ की गई। दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच के अनुसार, दोनों ने कथित तौर पर बोकारो जाकर परीक्षा से पहले प्रश्नोत्तर रटने की बात स्वीकार की है। एजेंसी का दावा है कि दोनों ने एजेंट के तौर पर कुछ अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने वाले कथित सिंडिकेट से भी जोड़ा था।
जमशेदपुर के फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार से भी सीआईडी लगातार पूछताछ कर रही है। उनके खिलाफ मिले साक्ष्यों का सत्यापन कराया जा रहा है। एजेंसी दोनों परीक्षा मामलों में आरोपियों की भूमिका, आपसी संपर्क, वित्तीय लेन-देन और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को जोड़कर आगे की जांच कर रही है।
