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Home»Fraud Alert»फ्रॉड बैंक खाता घोषित करने से पहले देना होगा पूरा ब्योरा: हाईकोर्ट
Fraud Alert

फ्रॉड बैंक खाता घोषित करने से पहले देना होगा पूरा ब्योरा: हाईकोर्ट

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksOctober 2, 2026No Comments3 Mins Read
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लखनऊ बेंच ने एसबीआई का कारण बताओ नोटिस और धोखाधड़ी श्रेणी में वर्गीकरण आदेश रद्द किया; खाताधारक को आरोपों से जुड़ी सामग्री और जरूरी होने पर फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट देनी होगी
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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बैंक खातों को धोखाधड़ी यानी फ्रॉड श्रेणी में वर्गीकृत करने को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस और संबंधित खाते को धोखाधड़ी श्रेणी में रखने के आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि किसी खाते को फ्रॉड घोषित करना खाताधारक के लिए गंभीर और दंडात्मक परिणाम वाला कदम है। इसलिए ऐसी कार्रवाई से पहले बैंक को आरोपों और उनके आधार से जुड़ी पर्याप्त जानकारी खाताधारक को उपलब्ध करानी होगी।
यह फैसला न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने ‘पारमार ट्रैवेल्स एंड ट्रांसपोर्ट’ की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। याचिकाकर्ता ने बैंक की कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा था कि उसे जारी कारण बताओ नोटिस में उन वित्तीय लेनदेन और घटनाओं का पर्याप्त विवरण नहीं दिया गया था, जिनके आधार पर फर्म को धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा था।
अदालत ने माना कि इस तरह की कार्रवाई में खाताधारक को केवल आरोपों की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। उसे उन तथ्यों और सामग्री की जानकारी भी मिलनी चाहिए, जिनके आधार पर बैंक धोखाधड़ी का निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इससे खाताधारक को आरोपों का प्रभावी तरीके से जवाब देने और अपना पक्ष रखने का वास्तविक अवसर मिल सकेगा।
मामले में बैंक की ओर से बताया गया कि फर्म को 10 ट्रकों की खरीद के लिए 4.90 करोड़ रुपये का टर्म लोन स्वीकृत किया गया था। हालांकि, याचिकाकर्ता ने 10 के बजाय नौ ट्रक खरीदे। बैंक ने यह भी बताया कि एक ट्रक के बीमा दस्तावेजों में विसंगति पाई गई थी। इन परिस्थितियों के आधार पर बैंक ने खाते को धोखाधड़ी की श्रेणी में वर्गीकृत करने की कार्रवाई की थी।
याचिकाकर्ता की ओर से इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि बैंक के कारण बताओ नोटिस में मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और कथित अनियमितताओं का पर्याप्त विवरण नहीं था। ऐसे में फर्म के लिए बैंक के आरोपों को समझकर उनका जवाब देना मुश्किल था।

सुनवाई का पर्याप्त अवसर जरूरी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बैंक को खाताधारक को विस्तृत कारण बताओ नोटिस देना होगा। इसके साथ आरोपों से संबंधित सभी प्रासंगिक सामग्री भी उपलब्ध करानी होगी। जहां मामले की परिस्थितियों में फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट प्रासंगिक हो, वहां उसकी पूरी रिपोर्ट भी खाताधारक को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद खाताधारक को अपना लिखित पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया जाना चाहिए। उसके जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद ही बैंक को अंतिम निर्णय लेना चाहिए।

कारणयुक्त आदेश के बाद ही कार्रवाई

खंडपीठ ने कहा कि खाते को धोखाधड़ी श्रेणी में रखने का निर्णय तर्कसंगत और कारणयुक्त होना चाहिए। यानी बैंक को यह स्पष्ट करना होगा कि उपलब्ध सामग्री और खाताधारक के जवाब पर विचार करने के बाद वह किस आधार पर निष्कर्ष पर पहुंचा है।
अदालत की इस व्यवस्था का सीधा असर उन मामलों पर पड़ता है, जहां बैंक किसी खाते या उधारकर्ता को धोखाधड़ी से जुड़ी श्रेणी में रखने की कार्रवाई करते हैं। ऐसे मामलों में प्रक्रिया की पारदर्शिता और खाताधारक को प्रभावी सुनवाई का अवसर देने को महत्वपूर्ण माना गया है। लखनऊ बेंच ने इसी आधार पर एसबीआई का कारण बताओ नोटिस और खाते के धोखाधड़ी श्रेणी में वर्गीकरण संबंधी आदेश रद्द कर दिया।
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