नई दिल्ली। अमेरिका ने इराक के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में निर्धारित सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करते हुए उड़ानें संचालित करने के मामले में एयर फ्रांस और केएलएम पर कुल 4.25 लाख डॉलर यानी करीब ₹3.8 करोड़ का जुर्माना लगाया है। अमेरिकी परिवहन विभाग के अनुसार, दोनों एयरलाइंस ने इराक के हवाई क्षेत्र में कई उड़ानें निर्धारित न्यूनतम ऊंचाई से नीचे संचालित कीं। यह न्यूनतम ऊंचाई जमीन से संभावित हमलों और अन्य सुरक्षा खतरों से विमानों को बचाने के उद्देश्य से तय की गई थी।
अमेरिकी परिवहन विभाग ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को जुर्माने की घोषणा की। यह मामला अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों पर सुरक्षा नियमों के पालन से जुड़ा है। इराक जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सैन्य संघर्ष, उग्रवादी गतिविधियों और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के कारण नागरिक विमानों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है। निर्धारित ऊंचाई संबंधी प्रतिबंधों का उद्देश्य विमानों को जमीन से होने वाले संभावित हमलों की पहुंच से दूर रखना है।
अमेरिकी सुरक्षा नियमों के दायरे में विदेशी एयरलाइंस भी
अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) ऐसे विदेशी हवाई क्षेत्रों में अमेरिकी विमान संचालकों की उड़ानों पर प्रतिबंध लगाता है, जहां सशस्त्र संघर्ष, उग्रवादी गतिविधियों या बढ़ते तनाव के कारण विमानन सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य यात्रियों, चालक दल और विमानों को संभावित हमलों से बचाना है।
ये नियम केवल अमेरिकी एयरलाइंस तक सीमित नहीं हैं। यदि कोई विदेशी एयरलाइन अमेरिकी एयरलाइन के कोड के तहत उड़ान संचालित करती है, तो उसे भी संबंधित सुरक्षा प्रतिबंधों का पालन करना होता है। इसका मतलब है कि किसी विदेशी विमानन कंपनी की उड़ान पर भी अमेरिकी विमानन सुरक्षा नियम लागू हो सकते हैं, यदि वह अमेरिकी साझेदार के कोड के साथ संचालित की जा रही हो।
एयर फ्रांस और केएलएम, दोनों ही डेल्टा एयरलाइंस के कोड के तहत उड़ानें संचालित करती हैं। इसी कारण इराक के हवाई क्षेत्र में उनकी संबंधित उड़ानें अमेरिकी सुरक्षा प्रतिबंधों के दायरे में आती हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन उड़ानों के दौरान निर्धारित न्यूनतम ऊंचाई के नियमों का पालन करना आवश्यक था।
जमीन से संभावित हमलों को लेकर तय की गई थी न्यूनतम ऊंचाई
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों के ऊपर उड़ान भरने वाले नागरिक विमानों के लिए ऊंचाई संबंधी प्रतिबंध महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय माने जाते हैं। जमीन से दागे जाने वाले हथियारों या अन्य हमलों का खतरा होने पर विमान को एक निश्चित ऊंचाई से नीचे उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाती। ऐसे नियमों का मकसद विमान को संभावित खतरे से दूर रखना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इराक में सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिकी विमानन प्रशासन ने संबंधित प्रतिबंध लागू किए थे। इन नियमों के बावजूद एयर फ्रांस और केएलएम की कई उड़ानें निर्धारित न्यूनतम ऊंचाई से नीचे संचालित हुईं। इसी आधार पर अमेरिकी परिवहन विभाग ने दोनों कंपनियों पर जुर्माना लगाया है।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में उन उड़ानों की सटीक संख्या, उनके संचालन की तारीखों और प्रत्येक एयरलाइन पर लगाए गए अलग-अलग जुर्माने का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि संबंधित उड़ानों के दौरान सुरक्षा जोखिम का कोई वास्तविक घटनाक्रम सामने आया था या नहीं। जुर्माने का मुख्य आधार प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में निर्धारित ऊंचाई संबंधी नियमों का उल्लंघन बताया गया है।
कोड-शेयर उड़ानों पर भी लागू होते हैं सुरक्षा मानक
अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में कोड-शेयर व्यवस्था के तहत एक एयरलाइन दूसरी कंपनी द्वारा संचालित उड़ान को अपने कोड के साथ यात्रियों के लिए उपलब्ध करा सकती है। ऐसी व्यवस्था में यात्री टिकट पर एक कंपनी का कोड देख सकते हैं, जबकि विमान का संचालन दूसरी कंपनी करती है। इस तरह की साझेदारी से एयरलाइंस अपने नेटवर्क का विस्तार करती हैं और यात्रियों को अधिक गंतव्यों तक पहुंच उपलब्ध कराती हैं।
लेकिन कोड-शेयर व्यवस्था सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों से छूट नहीं देती। अमेरिकी नियमों के अनुसार, अमेरिकी एयरलाइन के कोड के तहत संचालित विदेशी कंपनी की उड़ानों को भी लागू प्रतिबंधों का पालन करना पड़ता है। एयर फ्रांस और केएलएम की डेल्टा कोड वाली उड़ानों के मामले में यही प्रावधान महत्वपूर्ण रहा।
इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए यह संदेश भी सामने आया है कि संवेदनशील हवाई क्षेत्रों में संचालन के दौरान स्थानीय परिस्थितियों के साथ-साथ साझेदार एयरलाइंस पर लागू सुरक्षा नियमों का भी पालन करना जरूरी है। प्रतिबंधित क्षेत्रों में उड़ान की ऊंचाई और मार्ग से जुड़े निर्देश यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं और उनके उल्लंघन पर नियामकीय कार्रवाई हो सकती है।
अमेरिकी परिवहन विभाग का जुर्माना ऐसे समय में सामने आया है, जब संघर्ष और क्षेत्रीय तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों को कई मार्गों पर सुरक्षा जोखिमों का आकलन करना पड़ता है। एयरलाइंस को उड़ान योजनाएं तैयार करते समय प्रतिबंधित हवाई क्षेत्रों, निर्धारित ऊंचाई और लागू विमानन नियमों को ध्यान में रखना होता है। इराक के हवाई क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई का केंद्र भी इन्हीं सुरक्षा मानकों का कथित उल्लंघन है।
