दिल, दिमाग़ और जोड़ों की सेहत के लिए लाखों लोग फिश ऑयल कैप्सूल लेते हैं। लेकिन इसे सुबह लेना बेहतर है या रात में—इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं है।
“सही” समय की तलाश
सालों से स्वास्थ्य ब्लॉग और सप्लिमेंट ब्रांड्स यही सवाल पूछते रहे हैं—फिश ऑयल लेने का सही समय कौन-सा है? क्या सुबह ध्यान और ऊर्जा के लिए बेहतर है? या रात में दिल की सेहत के लिए?
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि इसका कोई सार्वभौमिक समय तय नहीं है। असल मायने रखता है कैसे और कितनी नियमितता से इसे लिया जाता है।
भोजन और वसा की भूमिका
फिश ऑयल कैप्सूल, जिनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड (EPA और DHA) होते हैं, तब सबसे अच्छे से शरीर में अवशोषित होते हैं जब इन्हें ऐसे भोजन के साथ लिया जाए जिसमें हेल्दी फैट मौजूद हो—जैसे अंडा, एवोकाडो, मेवे या ऑलिव ऑयल।
खाली पेट या केवल हाई-फाइबर भोजन के साथ लेने पर असर घट सकता है।
एक न्यूट्रिशनिस्ट के शब्दों में—“ओमेगा-3 को शरीर में पहुँचाने के लिए वसा की ज़रूरत होती है। इसके बिना, सप्लिमेंट का बड़ा हिस्सा यूं ही निकल जाता है।”
सुबह या रात? दोनों के अपने फायदे
सुबह लेने वालों के लिए यह आदत और सुविधा का हिस्सा बन जाता है—नाश्ते के साथ लेने से नियमितता बनी रहती है। दूसरी ओर, रात के खाने के साथ लेना भी लाभकारी माना जाता है। कुछ अध्ययनों में इशारा मिलता है कि शाम को लेने से हृदय स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर हो सकता है।
डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि डोज़ को दो हिस्सों में बाँट लिया जाए—आधा सुबह, आधा रात में। इससे एसिडिटी या “फिशी बर्प” जैसी दिक़्क़तें कम हो जाती हैं।
समय से ज़्यादा ज़रूरी है गुणवत्ता और नियमितता
विशेषज्ञों का मानना है कि घड़ी का समय उतना मायने नहीं रखता, जितनी नियमितता। ओमेगा-3 का असर तभी दिखता है जब इसे हफ़्तों और महीनों तक लगातार लिया जाए।
साथ ही, उत्पाद की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। फिश ऑयल जल्दी ऑक्सीडाइज़ हो सकता है, जिससे इसकी ताक़त कम हो जाती है और नुकसान भी हो सकता है।
ताज़गी, एक्सपायरी डेट और थर्ड-पार्टी टेस्टिंग वाले ब्रांड चुनने की सलाह दी जाती है।
बड़ी तस्वीर
चाहे दिल की सेहत हो, दिमाग़ की क्षमता या सूजन से राहत—ओमेगा-3 सप्लिमेंट का असर लंबे समय की आदतों पर टिका है। असली सवाल यह नहीं कि इसे सुबह लें या रात में—बल्कि यह है कि क्या आप इसे हर दिन, भोजन के साथ और नियमित रूप से ले रहे हैं।