एक हालिया अध्ययन बताता है कि आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दर्दनिवारक दवाएँ—जैसे इबुप्रोफेन और पैरासिटामोल—एंटीबायोटिक के साथ लेने पर बैक्टीरिया में ऐसे बदलाव ला सकती हैं जो एंटीबायोटिक प्रतिरोध को और तेज़ कर देते हैं।
दवा की अलमारी में छिपा ख़तरा
दक्षिण ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पाया कि हमारी रोज़मर्रा की भरोसेमंद दवाएँ भी एंटीबायोटिक प्रतिरोध को बढ़ावा दे सकती हैं। प्रयोगशाला परीक्षणों में दिखा कि जब इबुप्रोफेन और पैरासिटामोल को एंटीबायोटिक सिप्रोफ्लॉक्सासिन के साथ ई. कोलाई बैक्टीरिया पर आज़माया गया, तो उनमें आनुवांशिक म्यूटेशन की गति तेज़ हो गई। इससे साधारण संक्रमण भी मुश्किल इलाज़ योग्य हो गए।
कैसे बनते हैं ‘सुपरबग्स’
अध्ययन से पता चला कि इन पेनकिलर्स ने बैक्टीरिया की रक्षात्मक प्रणाली को सक्रिय कर दिया, जिससे वे एंटीबायोटिक को बाहर निकालने लगे और तेज़ी से बढ़ने लगे। नतीजा यह हुआ कि बैक्टीरिया न सिर्फ़ उस एक दवा के प्रति बल्कि दूसरी दवाओं के प्रति भी प्रतिरोधी हो गए। यह “क्रॉस-रेज़िस्टेंस” का ख़तरा विशेषज्ञों को सबसे ज़्यादा चिंतित कर रहा है।
बुज़ुर्गों के लिए बढ़ा जोखिम
विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह स्थिति बुज़ुर्गों के लिए और खतरनाक हो सकती है, खासकर नर्सिंग होम या केयर सेंटरों में, जहाँ मरीज़ों को कई दवाएँ एक साथ दी जाती हैं। पेनकिलर और एंटीबायोटिक का संयोजन अनजाने में दवा-प्रतिरोधी संक्रमण को बढ़ावा दे सकता है।
एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट की आहट
एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (AMR) पहले से ही सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में गिनी जाती है। द लांसेट की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक हर साल लगभग 4 करोड़ मौतें दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के कारण हो सकती हैं। ऐसे में यह खोज और भी गंभीर मानी जा रही है।
सतर्क रहें, पर घबराएँ नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन लोगों को तुरंत दर्द निवारक दवाएँ छोड़ने के लिए नहीं कहता। संदेश साफ़ है—दवाओं का उपयोग ज़िम्मेदारी से करें, और खासकर जब एंटीबायोटिक भी ली जा रही हो तो डॉक्टर की सलाह पर ही इन्हें साथ में लें।
यह शोध याद दिलाता है कि साधारण लगने वाली दवाएँ भी वैश्विक स्वास्थ्य पर अप्रत्याशित और गहरे असर डाल सकती हैं।