लंबे समय से बुजुर्गों को यह सलाह दी जाती रही है कि वे हड्डियों की मजबूती और गिरने से बचाव के लिए विटामिन-डी और कैल्शियम सप्लीमेंट लें। लेकिन अब नई सिफारिशें इस धारणा पर सवाल खड़ा कर रही हैं। यू.एस. प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स (USPSTF) ने अपने मसौदे में कहा है कि केवल इन सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहना कारगर साबित नहीं होता।
सीमित लाभ, उल्टा जोखिम भी संभव
कई क्लिनिकल ट्रायल और अध्ययनों से पता चला है कि अकेले कैल्शियम या विटामिन-डी देने से न तो गिरने के मामलों में खास कमी आती है और न ही फ्रैक्चर के जोखिम में। कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया कि विटामिन-डी की अधिक मात्रा उलटे जोखिम बढ़ा सकती है। कैल्शियम सप्लीमेंट्स से गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन) का खतरा भी हल्का बढ़ सकता है।
किन्हें है वास्तविक जरूरत
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिफारिश सभी पर लागू नहीं होती। जिन लोगों को विटामिन-डी की कमी, ऑस्टियोपोरोसिस या हड्डियों से जुड़ी बीमारियाँ हैं, वे डॉक्टर की देखरेख में इन सप्लीमेंट्स से लाभ उठा सकते हैं। लेकिन सामान्य रूप से स्वस्थ बुजुर्गों के लिए गिरने और फ्रैक्चर रोकने के लिए अन्य उपाय अधिक कारगर हैं।
समग्र रोकथाम की ओर ध्यान
चिकित्सक अब ज़ोर दे रहे हैं कि केवल दवाओं पर भरोसा करने के बजाय व्यापक रणनीति अपनाई जाए। इसमें वजन उठाने वाले व्यायाम, संतुलित आहार, घर के वातावरण को सुरक्षित बनाना और नियमित ऑस्टियोपोरोसिस जांच शामिल हैं।
नई सोच की ज़रूरत
USPSTF का यह मसौदा संकेत देता है कि अब स्वास्थ्य नीतियों को सप्लीमेंट-केंद्रित सोच से हटकर अधिक समग्र रोकथाम मॉडल की ओर बढ़ना होगा। संदेश साफ है: हड्डियों के लिए विटामिन-डी और कैल्शियम ज़रूरी तो हैं, लेकिन अपने आप में पर्याप्त नहीं।