मुंबई। भारतीय रेलवे के विदेशी पर्यटक (Foreign Tourist) कोटे में कथित फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन सतर्क हो गया है। सेंट्रल रेलवे (CR) ने जांच के दौरान पाया कि कई यात्री बिना वैध विदेशी दस्तावेजों के विदेशी पर्यटक कोटे के तहत यात्रा कर रहे थे। शुरुआती जांच में 31 ट्रेनों में दर्जनों संदिग्ध बुकिंग सामने आने के बाद अब रेलवे अधिकारियों को एक संगठित टिकट रैकेट की आशंका है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार, विदेशी पर्यटक कोटा विशेष रूप से विदेशी पासपोर्ट धारकों और वैध वीजा रखने वाले यात्रियों के लिए बनाया गया है। इस कोटे का उपयोग मुख्य रूप से प्रीमियम और लंबी दूरी की ट्रेनों में किया जाता है ताकि विदेशी यात्रियों को यात्रा के दौरान आरक्षित सीटें उपलब्ध कराई जा सकें। लेकिन हालिया जांच में पता चला कि इस सुविधा का कथित रूप से गलत इस्तेमाल कर सामान्य यात्रियों को अवैध तरीके से सीटें दिलाई जा रही थीं।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब टिकट जांच कर्मचारियों ने संगमित्रा एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे कुछ यात्रियों से विदेशी दस्तावेज मांगे। जांच के दौरान कई यात्री न तो विदेशी पासपोर्ट दिखा सके और न ही वैध वीजा प्रस्तुत कर पाए। इससे अधिकारियों को संदेह हुआ कि विदेशी पर्यटक कोटे का दुरुपयोग सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है।
इसके बाद सेंट्रल रेलवे ने व्यापक जांच शुरू की। अधिकारियों ने 24 अप्रैल से 11 जून के बीच निर्धारित यात्राओं से जुड़े 174 पीएनआर की समीक्षा की, जो CR नेटवर्क की 31 ट्रेनों से संबंधित थे। विस्तृत जांच के दौरान 39 बुकिंग ऐसी पाई गईं जो नियमों के अनुरूप नहीं थीं।
रेलवे प्रशासन ने इन मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब ₹3.56 लाख का जुर्माना वसूला। जिन यात्रियों के पास विदेशी पर्यटक कोटे के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं थे, उन्हें संबंधित सीटों से हटाया गया। बाद में ये सीटें आरएसी और वेटिंग सूची में मौजूद वैध यात्रियों को आवंटित कर दी गईं।
जांच अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती संकेत किसी बड़े नेटवर्क या एजेंट आधारित सिस्टम की ओर इशारा कर रहे हैं। रेलवे अब यह पता लगाने में जुटा है कि क्या अधिकृत टिकट एजेंटों या अन्य मध्यस्थों ने इस कथित फर्जीवाड़े में भूमिका निभाई। इसके लिए भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) से अतिरिक्त बुकिंग डेटा और तकनीकी जानकारी भी मांगी गई है।
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अधिकारियों के मुताबिक, विदेशी पर्यटक कोटे में टिकट बुक कराने के लिए विशेष पहचान और दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। ऐसे में बड़ी संख्या में गलत बुकिंग सामने आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया गया हो सकता है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों के यात्रा सीजन में ट्रेनों में भारी भीड़ रहती है और आरक्षित सीटों की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में कुछ लोग प्रीमियम कोटे का गलत फायदा उठाकर टिकट हासिल करने की कोशिश करते हैं। यदि इस तरह की गतिविधियों पर समय रहते रोक न लगाई जाए, तो वास्तविक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
रेलवे प्रशासन अब बुकिंग पैटर्न, एजेंट लॉगिन, भुगतान रिकॉर्ड और संदिग्ध पीएनआर के डिजिटल विश्लेषण में जुटा हुआ है। तकनीकी टीम यह जांच कर रही है कि क्या किसी संगठित तरीके से विदेशी पर्यटक कोटे की सीटें ब्लॉक कर बाद में अन्य यात्रियों को बेची जा रही थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे टिकटिंग सिस्टम में डिजिटल सत्यापन और रियल-टाइम डॉक्यूमेंट चेकिंग को और मजबूत करने की आवश्यकता है। यदि बुकिंग प्रक्रिया के दौरान ही पासपोर्ट और वीजा की स्वचालित पुष्टि हो जाए, तो इस तरह के मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
सेंट्रल रेलवे ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में भी विशेष जांच अभियान जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि रेलवे की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षित सीटों का लाभ केवल वास्तविक और पात्र यात्रियों को ही मिले।
