नई दिल्ली। Meta के स्वामित्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram ने अपने डायरेक्ट मैसेज (DMs) सिस्टम में बड़ा बदलाव करते हुए कुछ श्रेणी की चैट्स के लिए End-to-End Encryption (E2EE) सपोर्ट समाप्त कर दिया है। इस फैसले के बाद साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, डिजिटल प्राइवेसी एक्टिविस्ट्स और करोड़ों सोशल मीडिया यूजर्स के बीच डेटा सुरक्षा और ऑनलाइन गोपनीयता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूजर डेटा की सुरक्षा, निगरानी और AI आधारित मॉडरेशन को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। अब तक End-to-End Encryption को सबसे मजबूत डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था माना जाता था, जिसमें केवल संदेश भेजने वाला और प्राप्त करने वाला व्यक्ति ही चैट पढ़ सकता था। यहां तक कि प्लेटफॉर्म संचालित करने वाली कंपनी भी उस कंटेंट तक सीधे पहुंच नहीं रखती थी।
लेकिन Meta के नए सिस्टम के लागू होने के बाद कुछ Instagram चैट्स अब पहले की तरह पूरी तरह एन्क्रिप्टेड नहीं रहेंगी। टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कंपनी को मैसेजिंग डेटा, पैटर्न और कुछ कंटेंट संरचनाओं तक अधिक पहुंच मिल सकती है, जिसका इस्तेमाल AI आधारित मॉडरेशन, स्पैम डिटेक्शन और सुरक्षा निगरानी के लिए किया जा सकता है।
Meta का कहना है कि यह बदलाव प्लेटफॉर्म को अधिक सुरक्षित बनाने, ऑनलाइन दुरुपयोग रोकने और एडवांस AI फीचर्स को सक्षम करने के उद्देश्य से किया गया है। कंपनी का दावा है कि इससे फर्जी अकाउंट्स, स्पैम नेटवर्क, साइबर ठगी और ऑनलाइन शोषण जैसी गतिविधियों की पहचान अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।
हालांकि, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एन्क्रिप्शन सुरक्षा कमजोर होने से डेटा लीक, अनधिकृत एक्सेस और निगरानी के खतरे बढ़ सकते हैं। विशेष रूप से वे यूजर्स जो निजी, पेशेवर या संवेदनशील बातचीत के लिए सोशल मीडिया चैट्स का उपयोग करते हैं, उनके लिए यह बदलाव चिंता का कारण बन सकता है।
डिजिटल सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में डेटा दुरुपयोग, स्पाइवेयर हमलों और सोशल इंजीनियरिंग आधारित साइबर अपराधों के मामलों में वृद्धि के बाद एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सिस्टम को काफी महत्व मिला था। कई बड़ी टेक कंपनियों ने यूजर्स का भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन लागू किया था। ऐसे में Instagram का यह कदम Meta की मैसेजिंग रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
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साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अब यूजर्स को सोशल मीडिया चैट्स में बैंकिंग जानकारी, OTP, निजी दस्तावेज, पासवर्ड या संवेदनशील तस्वीरें साझा करने से पहले अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी। विशेषज्ञ नियमित रूप से प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखने और चैट हिस्ट्री में महत्वपूर्ण जानकारी स्टोर न करने की सलाह दे रहे हैं।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की प्राइवेसी नीतियां समय के साथ बदल सकती हैं। यूजर्स को यह समझना होगा कि हर निजी चैट हमेशा पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहती। इसलिए वित्तीय और अत्यधिक संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया चैट्स पर साझा करने से बचना चाहिए।”
इस फैसले के बाद डिजिटल अधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि मजबूत एन्क्रिप्शन केवल आम यूजर्स ही नहीं बल्कि पत्रकारों, एक्टिविस्ट्स, कारोबारियों और संवेदनशील पेशों से जुड़े लोगों के लिए भी बेहद जरूरी होता है। उनका तर्क है कि यदि एन्क्रिप्शन कमजोर होता है तो साइबर अपराधियों के लिए नए सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह बदलाव दुनियाभर की सरकारों और नियामक संस्थाओं के बढ़ते दबाव का परिणाम हो सकता है। कई देशों में सोशल मीडिया कंपनियों पर ऑनलाइन अपराध, वित्तीय फ्रॉड, बाल शोषण और संगठित साइबर नेटवर्क्स की निगरानी मजबूत करने का दबाव बढ़ रहा है।
फिलहाल Meta के इस फैसले पर टेक उद्योग और साइबर सुरक्षा समुदाय की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों ने यूजर्स से Instagram की नई प्राइवेसी पॉलिसी और मैसेजिंग सेटिंग्स को ध्यान से समझने की अपील की है। साथ ही अत्यधिक गोपनीय बातचीत के लिए सुरक्षित और समर्पित एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के उपयोग की सलाह भी दी जा रही है।
