नई दिल्ली। देश में साइबर अपराध का दायरा लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 से 2025 के बीच भारतीय नागरिकों को साइबर ठगी के कारण कुल ₹55,659.81 करोड़ का नुकसान हुआ, जिसमें से ₹45,344.16 करोड़, यानी 80 प्रतिशत से अधिक राशि केवल वर्ष 2024 और 2025 के दौरान साइबर अपराधियों द्वारा ठगी गई। आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तरीकों को अधिक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत बना लिया है।
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2025 के बीच देशभर में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी 67.32 लाख शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 43.22 लाख शिकायतें केवल पिछले दो वर्षों में दर्ज हुईं, जो कुल शिकायतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हैं। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि ऑनलाइन वित्तीय अपराधों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और आम नागरिकों के साथ-साथ आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग भी इनका शिकार बन रहा है।
आंकड़ों का विश्लेषण यह भी दर्शाता है कि अब केवल मामलों की संख्या ही नहीं बढ़ रही, बल्कि प्रत्येक मामले में होने वाला औसत आर्थिक नुकसान भी लगातार बढ़ रहा है। इससे संकेत मिलता है कि साइबर अपराधी पहले की तुलना में अधिक योजनाबद्ध और परिष्कृत तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं तथा पीड़ितों से बड़ी रकम ठगने में सफल हो रहे हैं। फर्जी निवेश योजनाएं, ट्रेडिंग ऐप, डिजिटल अरेस्ट, नौकरी का झांसा, ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी कस्टमर केयर, बैंक केवाईसी अपडेट, यूपीआई और क्यूआर कोड आधारित ठगी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में भी कई हाई-प्रोफाइल लोग साइबर अपराधियों के निशाने पर आए। अकेले दिल्ली में इस वर्ष दो बड़े साइबर ठगी मामलों में प्रमुख नागरिकों से ₹21 करोड़ से अधिक की रकम ठगी गई। इससे स्पष्ट है कि साइबर अपराध अब केवल आम लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावशाली और आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी इन संगठित गिरोहों के निशाने पर हैं।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग, फर्जी वेबसाइट, नकली मोबाइल एप, निवेश प्लेटफॉर्म और एआई आधारित तकनीकों का उपयोग कर लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर बैंक खातों से बड़ी रकम निकाल लेते हैं। डिजिटल लेनदेन के बढ़ते चलन के साथ ऐसे अपराधों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
प्रमुख साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आज अधिकांश बड़े साइबर अपराध तकनीकी हैकिंग से अधिक सोशल इंजीनियरिंग पर आधारित हैं। अपराधी लोगों के विश्वास, भय, लालच या जल्द मुनाफे की मानसिकता का फायदा उठाकर उन्हें स्वयं पैसा ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेनदेन करते समय किसी भी अनजान कॉल, लिंक, निवेश प्रस्ताव या ऐप पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करना चाहिए।
साइबर सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि बढ़ते खतरे से निपटने के लिए केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। इसके साथ व्यापक जनजागरूकता, मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा, तेज जांच, अंतरराज्यीय समन्वय और वित्तीय संस्थानों की सतर्कता भी जरूरी है। सरकारी आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि यदि समय रहते प्रभावी रोकथाम और जागरूकता अभियान नहीं चलाए गए, तो आने वाले वर्षों में साइबर वित्तीय अपराध देश के लिए और बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
