मुंबई: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से जुड़े ₹30.63 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में मुंबई स्थित एक निजी कंपनी और उसके निदेशकों से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की है। एजेंसी के अनुसार, आरोप है कि कंपनी के निदेशकों ने अज्ञात लोक सेवकों और अन्य निजी व्यक्तियों के साथ कथित आपराधिक साजिश रचकर गलत वित्तीय जानकारी प्रस्तुत की और बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया।
CBI ने यह मामला पंजाब नेशनल बैंक की स्पेशल एसेट मैनेजमेंट (SAM) शाखा, मुंबई की शिकायत के आधार पर दर्ज किया है। प्राथमिकी में संबंधित निजी कंपनी, उसके निदेशकों, अज्ञात लोक सेवकों और अन्य अज्ञात निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर लगभग ₹30.63 करोड़ का गलत नुकसान बैंक को पहुंचाया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों ने कथित रूप से देनदारों (Debtors) के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और अन्य गलत वित्तीय जानकारी प्रस्तुत कर पंजाब नेशनल बैंक तथा बैंकिंग कंसोर्टियम के अन्य सदस्य बैंकों से अपेक्षा से अधिक कैश क्रेडिट सुविधाएं हासिल कीं। इसके अलावा आरोप है कि उन्होंने बैंक से टर्म लोन भी स्वीकृत कराया और उस धनराशि का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में कर दिया, जिससे बैंक को वित्तीय नुकसान हुआ।
मामले की जांच के तहत CBI ने मुंबई में कंपनी और उसके निदेशकों से जुड़े कई परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के दौरान बैंकिंग लेनदेन से जुड़े दस्तावेज, संपत्ति संबंधी अभिलेख तथा जांच के लिए महत्वपूर्ण अन्य साक्ष्य बरामद कर जब्त किए गए हैं।
CBI के अनुसार, जब्त किए गए दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसी देनदार संस्थाओं (Debtor Entities) के अस्तित्व के संकेत मिले हैं, जिनकी साख और वास्तविकता का अब सत्यापन किया जा रहा है। एजेंसी ने उन दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में लिया है, जिनका कथित तौर पर उपयोग देनदारों के आंकड़े बढ़ाकर दिखाने और अधिक ऋण सुविधा प्राप्त करने के लिए किया गया था।
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जांच एजेंसी अब जब्त किए गए बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और अन्य डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित धोखाधड़ी की पूरी साजिश किस प्रकार संचालित की गई और इसमें किन-किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका रही।
प्रारंभिक जांच में यह भी देखा जा रहा है कि ऋण स्वीकृति प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत वित्तीय दस्तावेज वास्तविक थे या उनमें किसी प्रकार की हेराफेरी की गई थी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि ऋण की राशि को किन खातों में स्थानांतरित किया गया और उसका अंतिम उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया गया।
Future Crime Research Foundation (FCRF) के अनुसार, बैंक ऋण धोखाधड़ी के मामलों में फर्जी वित्तीय विवरण, बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए देनदार, काल्पनिक कारोबार और ऋण राशि का डायवर्जन सबसे सामान्य तरीके माने जाते हैं। ऐसे मामलों में मजबूत बैंकिंग ड्यू डिलिजेंस, स्वतंत्र वित्तीय सत्यापन और डिजिटल फोरेंसिक जांच वित्तीय अपराधों का समय रहते पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
CBI ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जब्त किए गए दस्तावेजों तथा अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
