नई दिल्ली: अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) और अन्य संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत पंजाब के भगवानपुरिया गिरोह से कथित रूप से जुड़े गैंगस्टर नीतीश कौशल को अमेरिका के वर्मोंट राज्य से गिरफ्तार किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वह हत्या, अपहरण, हथियारों एवं मादक पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क का कथित सदस्य है।
यह गिरफ्तारी अमेरिका में भारत से जुड़े संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ हाल के सबसे बड़े अभियानों में से एक मानी जा रही है। इससे कुछ सप्ताह पहले अमेरिकी एजेंसियों ने तीन भारतीय मूल के संगठित अपराध समूहों से जुड़े 15 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की थी।
अमेरिकी अधिकारियों ने भगवानपुरिया, बिश्नोई और ढांडा संगठित अपराध समूहों की गतिविधियों से जुड़े कुल 34 व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक की थी। इनमें नीतीश कौशल उन 11 आरोपियों में शामिल था जो या तो फरार थे या उस समय अमेरिकी एजेंसियों की हिरासत में नहीं थे। एफबीआई ने उसे अपनी मोस्ट वांटेड सूची में भी शामिल किया था।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (RICO) षड्यंत्र से जुड़े आरोपों के आधार पर कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की अमेरिकी जिला अदालत ने 25 जून को नीतीश कौशल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद संघीय एजेंसियों ने उसकी तलाश तेज कर दी थी।
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एफबीआई के अनुसार, भगवानपुरिया संगठित अपराध समूह की जड़ें भारत के पंजाब में हैं, लेकिन उसका नेटवर्क अमेरिका सहित कई देशों तक फैला हुआ है। एजेंसी का आरोप है कि यह गिरोह हत्या, अपहरण, हथियारों की तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली, मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों में शामिल रहा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि नीतीश कौशल इस गिरोह की ओर से हिंसक वारदातों, अपहरण और हमलों को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाता था।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, भगवानपुरिया गिरोह की स्थापना पंजाब में हुई थी और समय के साथ इसका नेटवर्क अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैल गया। अधिकारियों का दावा है कि इस गिरोह के विश्वभर में 1,000 से अधिक सदस्य और सहयोगी हैं, जिनमें 100 से अधिक अमेरिका में सक्रिय बताए जाते हैं।
जांच एजेंसियों का यह भी आरोप है कि गिरोह संगठित अपराध के जरिए अवैध वसूली और वित्तीय अपराधों को अंजाम देता रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोप सिद्ध होने पर इस मामले में शामिल अधिकांश आरोपियों को अमेरिकी संघीय कानून के तहत न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में अधिकतम वैधानिक सजा भी आजीवन कारावास है।
अमेरिकी एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन तथा अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सीमा-पार संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग आगे भी जारी रहेगा।
