नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी छात्रों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में भाग लेने वाले लोगों और विदेशी पत्रकारों के लिए वीजा नियमों में व्यापक बदलाव करने का निर्णय लिया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security-DHS) द्वारा जारी अंतिम नियमों के तहत अब F (स्टूडेंट), J (एक्सचेंज विजिटर) और I (विदेशी मीडिया) वीजा अनिश्चित अवधि के बजाय निर्धारित समय सीमा के लिए ही मान्य होंगे। नए नियम लागू होने के बाद वीजा धारकों को तय अवधि से अधिक अमेरिका में रहने के लिए अलग से अनुमति लेनी होगी। इन बदलावों का असर भारतीय छात्रों सहित बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय आवेदकों पर पड़ने की संभावना है।
डीएचएस के अनुसार, यह नियम संघीय रजिस्टर (Federal Register) में प्रकाशित होने के 60 दिन बाद प्रभावी होगा। हालांकि, इसके लागू होने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि हाल के वर्षों में छात्र और एक्सचेंज वीजा धारकों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है, जिसके कारण उनके प्रवास की निगरानी और आव्रजन नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
नए प्रावधानों के तहत F और J वीजा धारकों के लिए अधिकतम वीजा अवधि चार वर्ष निर्धारित की गई है। दूसरी ओर, विदेशी पत्रकारों को जारी किए जाने वाले I वीजा की अधिकतम वैधता अब 240 दिनों तक सीमित रहेगी। चीनी नागरिकों के लिए यह अवधि अधिकतम 90 दिन निर्धारित की गई है। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद यदि कोई व्यक्ति अमेरिका में रहना चाहता है, तो उसे डीएचएस से अवधि विस्तार की अनुमति प्राप्त करनी होगी या फिर अमेरिका से बाहर जाकर दोबारा प्रवेश के लिए नया अनुमोदन लेना होगा।
भारतीय छात्रों के लिए भी इन नियमों का विशेष महत्व है, क्योंकि अमेरिका उच्च शिक्षा के लिए भारतीय विद्यार्थियों की सबसे पसंदीदा मंजिलों में शामिल है। नए नियमों के अनुसार, स्नातकोत्तर (Graduate) छात्रों को बिना पूर्व अनुमति अपने शैक्षणिक उद्देश्य में बदलाव करने या किसी अन्य शैक्षणिक संस्थान में स्थानांतरण की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, पढ़ाई या प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अमेरिका छोड़ने के लिए मिलने वाली ग्रेस पीरियड को 60 दिनों से घटाकर 30 दिन कर दिया गया है।
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ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य वीजा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है। डीएचएस के अनुसार, कई मामलों में छात्र और एक्सचेंज विजिटर वर्षों तक अमेरिका में बने रहे, जिससे आव्रजन नियमों के अनुपालन की निगरानी कठिन हो गई। विभाग का दावा है कि सीमित अवधि वाले वीजा से रिकॉर्ड प्रबंधन, निगरानी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए प्रवासियों की स्थिति का सत्यापन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
हालांकि, इन नए नियमों की आलोचना भी शुरू हो गई है। आव्रजन नीति विशेषज्ञों का कहना है कि अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रियाएं अंतरराष्ट्रीय छात्रों, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए अनावश्यक जटिलताएं पैदा कर सकती हैं। आलोचकों का तर्क है कि संस्थान बदलने और अध्ययन कार्यक्रमों में संशोधन पर लगाए गए प्रतिबंध अकादमिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं तथा अमेरिका की वैश्विक शिक्षा प्रणाली की प्रतिस्पर्धात्मकता पर भी असर डाल सकते हैं।
डीएचएस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के दौरान अमेरिका में 18 लाख से अधिक छात्र वीजा प्रवेश दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं। इसी अवधि में पांच लाख से अधिक एक्सचेंज विजिटर और लगभग 37,300 विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को वीजा जारी किए गए। विभाग का कहना है कि इन बढ़ती संख्याओं को देखते हुए वीजा प्रणाली में अधिक जवाबदेही और निगरानी की आवश्यकता महसूस की गई।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये नियम अंतिम रूप से लागू होते हैं, तो विदेशी छात्रों, विश्वविद्यालयों और मीडिया संस्थानों को अपनी योजनाओं, वीजा नवीनीकरण और शैक्षणिक कार्यक्रमों की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। भारतीय छात्रों के लिए भी समयबद्ध दस्तावेजी प्रक्रिया, संस्थान परिवर्तन और पढ़ाई पूरी होने के बाद रोजगार या अन्य अवसरों की योजना पहले से अधिक सावधानी के साथ बनानी होगी। आने वाले समय में कांग्रेस की समीक्षा और संभावित कानूनी चुनौतियों के बाद इन नियमों के अंतिम स्वरूप पर सभी की नजर रहेगी।
