नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार का फैसला लिया है। नई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को पद से हटाए जाने को इसी सुधार प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद से ही परीक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं। केंद्र सरकार का लक्ष्य एनटीए की सभी राष्ट्रीय परीक्षाओं में ‘जीरो एरर’ यानी शून्य त्रुटि प्रणाली लागू करना है। इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और तकनीकी व्यवस्था में बड़े स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं।
नीट विवाद के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़े आक्रोश को देखते हुए सरकार ने परीक्षा सुधारों पर तेजी से काम शुरू किया है। सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर से लेकर संसद तक उठे विरोध के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी पूरे मामले की समीक्षा की थी। इसके बाद एनटीए की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए विशेषज्ञों की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
एनटीए सुधारों के लिए गठित समिति, जिसकी अध्यक्षता इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन ने की थी, ने परीक्षा प्रणाली में बदलाव को लेकर कई सुझाव दिए हैं। समिति ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों से सुझाव भी लिए थे। सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया में लगभग 37,000 सुझाव प्राप्त हुए, जिनके आधार पर नई परीक्षा व्यवस्था का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्था में यूपीएससी की तरह जिम्मेदारी और जवाबदेही का स्पष्ट ढांचा तैयार किया जाएगा। परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका तय होगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एनटीए के महासचिव अभिषेक सिंह पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
नई परीक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली में किया जा सकता है। वर्तमान कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग (CBT) मॉडल की जगह भविष्य में कंप्यूटर एडेप्टिव टेस्टिंग (CAT) प्रणाली लागू करने की तैयारी है। इस तकनीक में परीक्षा का स्तर उम्मीदवार की क्षमता के अनुसार बदलता रहता है, जिससे प्रश्नपत्र सुरक्षा और परीक्षा की निष्पक्षता बढ़ सकती है।
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इसके अलावा परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत परीक्षा केंद्रों की जिम्मेदारी संबंधित जिले के जिला मजिस्ट्रेट (DM) की तय की जा सकती है। केंद्रों की सुरक्षा, तकनीकी व्यवस्था और परीक्षा संचालन में किसी भी कमी के लिए स्थानीय प्रशासन को जवाबदेह बनाया जाएगा।
कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं के लिए केंद्रों के चयन की प्रक्रिया में भी बदलाव किया जाएगा। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और NTA की संयुक्त टीमें परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करेंगी। इन केंद्रों की तकनीकी क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा संचालन की विश्वसनीयता की जांच के बाद ही उन्हें परीक्षा के लिए मंजूरी दी जाएगी।
इसके साथ ही सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा में इस्तेमाल होने वाली ओएसएम (OSM) प्रणाली की भी समीक्षा की जाएगी। सरकार यह आकलन कर रही है कि उत्तर पुस्तिकाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया में इस प्रणाली को किस तरह अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है।
शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा सुधार केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एनटीए के अंतर्गत आयोजित सभी राष्ट्रीय परीक्षाओं में लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों का भरोसा बहाल करना, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाना और देश की प्रमुख परीक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की विश्वसनीयता प्रदान करना है। आने वाले समय में एनटीए की परीक्षा प्रणाली में तकनीक, निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को केंद्र में रखते हुए व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
