नई दिल्ली: संसद ने बुधवार को लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया, जिससे देश में पेपर लीक, संगठित नकल, प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ कानूनी ढांचे को और मजबूत किया गया है। यह संशोधन लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के प्रावधानों को सुदृढ़ करता है। हाल के वर्षों में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आए पेपर लीक और परीक्षा घोटालों को देखते हुए इस कानून को और प्रभावी बनाया गया है।
संशोधित कानून में पेपर लीक, संगठित नकल गिरोहों और परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई को तेजी से पूरा करने की व्यवस्था भी की गई है। केंद्र सरकार के अलावा कई राज्यों ने पहले ही अपने-अपने स्तर पर सख्त एंटी-चीटिंग कानून लागू कर दिए हैं, जिनमें लंबी कैद, आजीवन कारावास, भारी जुर्माना, परीक्षाओं से प्रतिबंध और अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों की जब्ती जैसे प्रावधान शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश ने वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू कर अपने पुराने कानून का स्थान लिया। इस कानून के तहत पेपर लीक, संगठित नकल, प्रतिरूपण, अनुचित साधनों के उपयोग और परीक्षा माफियाओं की गतिविधियों को दंडनीय अपराध बनाया गया है। अपराध की गंभीरता के आधार पर दो वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा तथा ₹1 लाख से ₹1 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा परीक्षा धोखाधड़ी से अर्जित संपत्तियों को कुर्क और जब्त करने की भी व्यवस्था है।
उत्तराखंड ने प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 लागू किया, जिसे देश के सबसे सख्त एंटी-चीटिंग कानूनों में गिना जाता है। पेपर लीक में शामिल संगठित गिरोह, प्रिंटिंग प्रेस, कोचिंग संस्थान और सेवा प्रदाता 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तथा ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का सामना कर सकते हैं। पहली बार अपराध करने वालों के लिए तीन वर्ष तक की सजा और न्यूनतम ₹5 लाख जुर्माना निर्धारित है, जबकि दोबारा अपराध करने वालों के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की सजा और ₹10 लाख जुर्माने का प्रावधान है। आरोपपत्र दाखिल होने पर अभ्यर्थियों को दो से पांच वर्ष तक राज्य की परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया जा सकता है, जबकि दोषसिद्धि होने पर 10 वर्ष तक प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने पर रोक लगाई जा सकती है।
राजस्थान ने राजस्थान लोक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 लागू किया, जिसे 2023 में और सख्त बनाया गया। इस कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक करने, संगठित परीक्षा माफियाओं के साथ साजिश रचने या भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों को 10 वर्ष से आजीवन कारावास तथा ₹10 लाख से ₹10 करोड़ तक जुर्माने की सजा हो सकती है। कानून में मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का भी प्रावधान है।
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गुजरात के लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2023 में पेपर लीक, संगठित नकल, प्रतिरूपण और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग को अपराध घोषित किया गया है। संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर पांच से 10 वर्ष तक की कैद और ₹10 लाख से ₹1 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है। अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले अभ्यर्थियों को तीन वर्ष तक की सजा, ₹1 लाख तक जुर्माना और दो वर्ष तक परीक्षा से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
बिहार ने बिहार लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 के माध्यम से अपने कानूनी ढांचे को मजबूत किया है। संगठित पेपर लीक गिरोहों को पांच से 10 वर्ष तक की कैद और ₹1 करोड़ तक जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों की लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर भारी जुर्माना, डिबारमेंट और संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है। इस कानून के तहत सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य हैं।
इसी प्रकार झारखंड के प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 में संगठित पेपर लीक गिरोहों, प्रिंटिंग प्रेस और सेवा प्रदाताओं के लिए आजीवन कारावास तथा ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं छत्तीसगढ़ लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2026 के तहत संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर 10 वर्ष तक की कैद, ₹1 करोड़ तक जुर्माना और संपत्ति जब्त करने की व्यवस्था है। दोषी सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
ओडिशा ने लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू कर परीक्षा अपराधों की परिभाषा का विस्तार किया और सजा को अधिक कठोर बनाया। वहीं आंध्र प्रदेश का लोक परीक्षाएं (कदाचार एवं अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 1997 पेपर लीक, प्रश्नपत्रों की बिक्री और संगठित नकल जैसे गंभीर अपराधों के लिए तीन से सात वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान करता है। परीक्षा ड्यूटी में जानबूझकर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।
केंद्र सरकार के संशोधित कानून और राज्यों द्वारा लागू सख्त एंटी-पेपर लीक कानूनों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना, योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना और भर्ती तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इन प्रावधानों के जरिए सरकारें परीक्षा माफियाओं और संगठित धोखाधड़ी नेटवर्क के खिलाफ कड़ा कानूनी संदेश देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
