बैंकॉक: थाईलैंड में तीन भारतीय पर्यटकों के अपहरण और उनसे जुड़े अंतरराष्ट्रीय फिरौती गिरोह का सनसनीखेज मामला सामने आया है। थाई पुलिस ने इस मामले में पांच भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जबकि जांच में सामने आया है कि पूरी साजिश कथित तौर पर दुबई में बैठे एक पाकिस्तानी नागरिक के निर्देश पर रची गई थी। आरोप है कि भारतीय पर्यटकों को सस्ते सात दिन के टूर पैकेज का लालच देकर पटाया बुलाया गया, जहां उन्हें बंधक बनाकर उनके परिवारों से कुल ₹1.20 करोड़ की फिरौती मांगी गई।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीड़ितों की पहचान 23 वर्षीय मोहित, 24 वर्षीय आशीष और 20 वर्षीय हिमांशु के रूप में हुई है। तीनों को कथित तौर पर पर्यटन पैकेज के बहाने थाईलैंड बुलाया गया था। पटाया पहुंचने के बाद उन्हें एक मकान में बंद कर दिया गया और उनके परिजनों से प्रत्येक के बदले ₹40 लाख, यानी कुल ₹1.20 करोड़ की फिरौती की मांग की गई।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अवतार सिंह (38), जगजीत सिंह (38), रंभालक कुमार (24), सुखबीर सिंह (37) और कुलरा सिंह (27) के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे पिछले करीब एक महीने से एक चैट एप्लीकेशन के जरिए दुबई में मौजूद एक पाकिस्तानी नागरिक के संपर्क में थे। उसी ने अपहरण की योजना बनाई और फिरौती वसूलने के निर्देश दिए।
जांच में यह भी सामने आया है कि फिरौती की रकम क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से लेने की योजना बनाई गई थी, ताकि लेनदेन का पता लगाना कठिन हो। आरोपियों को कथित तौर पर इस काम के बदले नकद रकम, कीमती सामान और थाईलैंड से बाहर जाने के लिए हवाई टिकट देने का लालच दिया गया था।
रेस्क्यू के बाद पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उन्हें कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। उनके हाथ-पैर रस्सियों और केबल से बांध दिए गए, कई बार भोजन नहीं दिया गया और उन्हें उल्टा लटकाकर बेरहमी से पीटा गया। आरोपियों ने कथित तौर पर एक पीड़ित के कपड़े उतरवाकर उसकी पिटाई भी की, ताकि परिवारों पर मानसिक दबाव बनाया जा सके।
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परिजनों से अधिक रकम वसूलने के लिए आरोपियों ने एक और तरीका अपनाया। पीड़ितों के शरीर पर लाल स्प्रे पेंट लगाया गया, जिससे वीडियो कॉल के दौरान ऐसा लगे कि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और उनके शरीर से खून बह रहा है। इन वीडियो के जरिए परिवारों को डराकर जल्द से जल्द फिरौती देने का दबाव बनाया जा रहा था।
मामले की जानकारी मिलने पर पीड़ितों के परिजनों ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया। इसके बाद दूतावास ने स्थानीय अधिकारियों को सतर्क किया। खुफिया सूचना और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पटाया के एक टाउनहाउस में छापेमारी की गई, जहां तीनों भारतीय अलग-अलग कमरों में बंधे मिले। उनके मुंह पर टेप लगा था और शरीर पर चोट के निशान थे। मौके से टेप, लकड़ी का डंडा और लाल स्प्रे पेंट भी बरामद किया गया। तीनों पीड़ितों को सुरक्षित मुक्त करा लिया गया।
पूछताछ के दौरान पीड़ितों ने यह भी दावा किया कि उनके वहां पहुंचने से पहले एक अन्य भारतीय नागरिक को भी उसी मकान में बंधक बनाया गया था। उसे कथित तौर पर तब छोड़ा गया, जब उसके परिवार ने करीब ₹30 लाख की फिरौती का भुगतान कर दिया।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय साइबर और संगठित अपराध गिरोह अब सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप और सस्ते विदेशी टूर पैकेज के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में अपहरण, डिजिटल ब्लैकमेल और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से फिरौती वसूली एक ही नेटवर्क के तहत संचालित होती है। उन्होंने कहा कि विदेश यात्रा या नौकरी से जुड़े किसी भी प्रस्ताव की प्रामाणिकता की स्वतंत्र जांच करना और केवल अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ही यात्रा की योजना बनाना बेहद जरूरी है।
थाई पुलिस अब इस मामले के कथित पाकिस्तानी मास्टरमाइंड और उससे जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इसी नेटवर्क ने पहले भी भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है।
