नई दिल्ली: विदेश भेजने के नाम पर कथित धोखाधड़ी और अवैध इमिग्रेशन नेटवर्क को लेकर पंजाब एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। संसद में केंद्र सरकार द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच पंजाब में अवैध इमिग्रेशन एजेंटों के खिलाफ कुल 154 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन इस पूरी अवधि में किसी भी मामले में अभियोजन स्वीकृति न तो मांगी गई और न ही प्रदान की गई। इससे शिकायतों और कानूनी कार्रवाई के बीच मौजूद अंतर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
लोकसभा में विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, पंजाब में वर्ष 2023 के दौरान 56 शिकायतें दर्ज की गईं। वर्ष 2024 में शिकायतों की संख्या 18 रही, जबकि वर्ष 2025 में यह बढ़कर 80 तक पहुंच गई। तीन वर्षों में कुल 154 शिकायतों का दर्ज होना यह संकेत देता है कि विदेश भेजने के नाम पर कथित धोखाधड़ी और अवैध इमिग्रेशन एजेंटों की गतिविधियां राज्य में लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।
आंकड़ों के अनुसार, शिकायतों की संख्या के आधार पर पंजाब उन राज्यों में शामिल है जहां अवैध इमिग्रेशन एजेंटों के खिलाफ सबसे अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। इस सूची में आंध्र प्रदेश 448 शिकायतों के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद केरल में 238, दिल्ली में 153, तेलंगाना में 111, तमिलनाडु में 99 और राजस्थान में 97 शिकायतें दर्ज की गईं। पंजाब भी उच्च शिकायत वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल रहा।
हालांकि सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि पंजाब में दर्ज 154 शिकायतों के बावजूद किसी भी मामले में अभियोजन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के दौरान राज्य से किसी भी मामले में अभियोजन स्वीकृति का अनुरोध नहीं किया गया और न ही किसी मामले में स्वीकृति प्रदान की गई। इसका अर्थ है कि शिकायतों के बावजूद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो सकी।
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इसके विपरीत, कई अन्य राज्यों में शिकायतों के साथ अभियोजन संबंधी कार्रवाई भी आगे बढ़ी। दिल्ली ने वर्ष 2024 में 11 और वर्ष 2025 में 13 मामलों में अभियोजन स्वीकृति मांगी तथा सभी मामलों में स्वीकृति भी प्राप्त की। केरल ने 2023 में सात तथा 2024 में 15 मामलों में अभियोजन स्वीकृति का अनुरोध किया, जिनमें क्रमशः सात और एक मामले में स्वीकृति दी गई। इसके अलावा कर्नाटक, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और तमिलनाडु में भी संबंधित अवधि के दौरान अभियोजन से जुड़ी कार्रवाई दर्ज की गई।
सरकारी आंकड़ों ने पंजाब में सक्रिय कथित अवैध इमिग्रेशन नेटवर्क को लेकर लंबे समय से जताई जा रही चिंताओं को एक बार फिर सामने ला दिया है। राज्य के अनेक परिवारों में विदेश जाकर रोजगार या स्थायी निवास प्राप्त करने की मजबूत इच्छा के कारण वीजा और इमिग्रेशन सेवाओं का बड़ा बाजार विकसित हुआ है। इसी के साथ फर्जी एजेंटों और कथित धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।
विशेष रूप से दोआबा क्षेत्र के जालंधर, होशियारपुर और कपूरथला जिलों को लंबे समय से विदेश प्रवासन का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इसके अलावा मोहाली, लुधियाना और अमृतसर जैसे शहरों से भी हाल के वर्षों में इमिग्रेशन धोखाधड़ी की शिकायतों में वृद्धि दर्ज की गई है। हाल के महीनों में अमेरिका से कई भारतीय नागरिकों के निर्वासन के मामलों के बाद अवैध प्रवासन नेटवर्क और फर्जी इमिग्रेशन एजेंटों की भूमिका पर भी व्यापक चर्चा हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायत दर्ज होने और अभियोजन प्रक्रिया शुरू होने के बीच का बड़ा अंतर कानून प्रवर्तन प्रणाली के सामने मौजूद चुनौतियों को दर्शाता है। शिकायतों की जांच, पर्याप्त साक्ष्य जुटाने, अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने और न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने में होने वाली देरी कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई को प्रभावित करती है। संसद में प्रस्तुत ताजा आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि केवल शिकायतें दर्ज होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी जांच, समयबद्ध अभियोजन और सख्त कानूनी कार्रवाई के माध्यम से ही अवैध इमिग्रेशन नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
