गाजियाबाद: टीला मोड़ थाना क्षेत्र में बच्चों का अपहरण कर उन्हें निसंतान दंपतियों को कथित तौर पर लाखों रुपये में बेचने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में दो महिलाओं समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह पर बच्चों को अगवा कर उनकी खरीद-फरोख्त करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, गिरोह का सरगना नौशाद है। इस नेटवर्क का खुलासा चार महीने के बच्चे के अपहरण के बाद हुआ, जिसे कथित तौर पर शामली के एक दंपती को ₹5 लाख में बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने बच्चे को सकुशल बरामद कर उसके माता-पिता को सौंप दिया है।
मामले की शुरुआत 9 अगस्त को हुई, जब करन गेट चौकी के पास किराए के मकान में रहने वाले मुस्कान और फुरकान का चार महीने का बेटा अल्लाबख्श अचानक गायब हो गया। बच्चे के लापता होने के बाद परिवार ने पुलिस से शिकायत की। जांच शुरू होने पर पुलिस को बच्चे के अपहरण के पीछे संगठित गिरोह की भूमिका का संदेह हुआ।
नौ बार कॉल कर शिकायत न करने का दबाव
पुलिस के मुताबिक, बच्चे के गायब होने के बाद नौशाद और उसकी पत्नी रुखसार ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से बच्चे के माता-पिता को कुल नौ बार फोन किया। कॉल के दौरान उन्होंने बच्चे के सकुशल होने की बात कही और पुलिस में शिकायत नहीं करने का दबाव बनाया। पुलिस ने इन नंबरों की जांच शुरू की, लेकिन शुरुआती ट्रेसिंग में नंबर कुछ राहगीरों के नाम या इस्तेमाल से जुड़े मिले।
इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और पूछताछ के जरिए आरोपियों की गतिविधियों का सुराग जुटाया। जांच में आरोपियों के शामली में होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने कांधला क्षेत्र में दबिश दी और वहां से गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद बच्चे के ठिकाने का पता लगाया गया और उसे बरामद कर लिया गया।
सात आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में ऐनुल निवासी पानीपत, हरियाणा, नौशाद और उसकी पत्नी रुखसार निवासी मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश, नागेंद्र उर्फ सुक्का निवासी मुजफ्फरपुर, बिहार, नसीम निवासी कैराना, शामली, आबिद निवासी आदर्श मंडी, शामली और सुमित्रा निवासी किशनगंज, बिहार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, नौशाद इस कथित नेटवर्क का मुख्य संचालक था और अन्य आरोपी अलग-अलग स्तर पर उसके साथ काम करते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह कथित तौर पर ऐसे दंपतियों की तलाश करता था, जिनके बच्चे नहीं थे। इसके बाद बच्चों को हासिल करने के लिए अपहरण या अन्य माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता और उन्हें मोटी रकम लेकर सौंपने की योजना बनाई जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितने बच्चों को निशाना बनाया।
अजन्मी बच्ची का भी किया था सौदा
पूछताछ में नौशाद ने कथित तौर पर एक पुराने मामले का भी खुलासा किया। उसके अनुसार, करीब डेढ़ वर्ष पहले उसने अपनी पत्नी की कोख में पल रही बच्ची का जन्म से पहले ही सोनीपत के एक निसंतान दंपती से ₹2.40 लाख में सौदा कर लिया था। बच्ची के जन्म के करीब 15 दिन बाद उसे कथित तौर पर उस दंपती को सौंप दिया गया था।
नौशाद ने यह भी बताया कि ऐनुल, आबिद और अन्य साथियों की मदद से उसने अपने छोटे भाई के तीन बच्चों का भी कथित तौर पर सौदा किया था। हालांकि, पुलिस के अनुसार, इन बच्चों को अभी संबंधित लोगों को सौंपा नहीं गया था। इस जानकारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।
दो आरोपी अभी फरार
पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है, जिन्होंने कथित तौर पर बच्चे को खरीदने में भूमिका निभाई। मामले में बच्चे को खरीदने वाली बताई जा रही मौसीना और गिरोह की एक अन्य सदस्य सितारा फिलहाल फरार हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
जांच एजेंसी गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, संपर्कों और कथित आर्थिक लेनदेन की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरोह का नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला था और इसमें और कितने लोग शामिल हैं। चार महीने के बच्चे की सकुशल बरामदगी के बाद पुलिस अब सामने आए अन्य मामलों और कथित खरीदारों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
