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Home»Fraud Alert»व्हाट्सऐप हैक कर कारोबारी के खाते से ₹3.31 लाख साफ, तीन ट्रांजेक्शन में निकाली रकम; FIR दर्ज
Fraud Alert

व्हाट्सऐप हैक कर कारोबारी के खाते से ₹3.31 लाख साफ, तीन ट्रांजेक्शन में निकाली रकम; FIR दर्ज

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksAugust 15, 2026No Comments4 Mins Read
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बस्ती के वाल्टरगंज में साइबर ठगी का मामला; मोबाइल के व्हाट्सऐप पर कब्जे के बाद डेटा हासिल करने का आरोप, पुलिस ने बैंक खाते और डिजिटल लेनदेन की जांच शुरू की
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बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में साइबर ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने एक निर्माण एवं सर्विस प्रोवाइडर के संचालक का व्हाट्सऐप कथित तौर पर हैक कर उसके बैंक खाते से ₹3.31 लाख से अधिक की रकम निकाल ली। ठगी की वारदात 13 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 1.19 से 1.20 बजे के बीच हुई। पीड़ित को खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद उसने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर वाल्टरगंज थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गंगापुर निवासी 48 वर्षीय दिनेश कुमार पांडेय ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका ‘डीपी कंस्ट्रक्शन एंड सर्विस प्रोवाइड’ के नाम से बैंक खाता है। आरोप है कि 13 अगस्त को अज्ञात साइबर ठग ने उनके मोबाइल फोन में मौजूद व्हाट्सऐप अकाउंट पर कब्जा कर लिया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर मोबाइल में मौजूद डिजिटल डेटा तक पहुंच बनाई और बैंक खाते से रकम निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों ने खाते से एक बार में पूरी रकम निकालने के बजाय तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन किए। इन तीन लेनदेन के माध्यम से कुल ₹3,31,319.27 खाते से निकाले गए। पीड़ित को जब बैंक खाते से रकम कम होने की जानकारी मिली तो उसने मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस अब इन तीनों ट्रांजेक्शन की अलग-अलग जांच कर रही है, ताकि रकम किन खातों में गई और उसके बाद उसे कहां स्थानांतरित किया गया, इसका पता लगाया जा सके।

इस मामले में 14 अगस्त 2026 को दोपहर 12.36 बजे वाल्टरगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधी के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप अकाउंट, बैंक खाते और डिजिटल लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने व्हाट्सऐप तक पहुंच कैसे बनाई और क्या पीड़ित के मोबाइल या बैंकिंग से जुड़ी किसी अन्य जानकारी का भी इस्तेमाल किया गया।

जांच का एक अहम हिस्सा रकम के डिजिटल ट्रेल को खंगालना है। साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर चोरी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजकर उसकी पहचान और वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में पुलिस तीनों ट्रांजेक्शन के लाभार्थी खातों, खाताधारकों की जानकारी और आगे हुए लेनदेन की जांच कर सकती है। इससे संभावित साइबर गिरोह और उसके अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

मामले में यह भी जांच की जा रही है कि व्हाट्सऐप अकाउंट से जुड़े किसी संवेदनशील डेटा का इस्तेमाल बैंक खाते तक पहुंच बनाने या ठगी की रकम निकालने में किया गया था या नहीं। पुलिस मोबाइल डिवाइस, व्हाट्सऐप गतिविधियों और बैंकिंग रिकॉर्ड के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश कर रही है। यदि जांच में किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है तो मामले का दायरा बढ़ सकता है।

यह घटना इस बात को भी सामने लाती है कि व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग अकाउंट पर अनधिकृत कब्जा होने के बाद अपराधी पीड़ित की निजी और वित्तीय जानकारी का दुरुपयोग कर सकते हैं। खासकर कारोबारी मोबाइल नंबरों से जुड़े बैंकिंग और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड साइबर अपराधियों के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य बन सकते हैं। ऐसे मामलों में समय पर बैंक को सूचना देना और संदिग्ध लेनदेन की जानकारी पुलिस को देना रकम की आगे की निकासी रोकने में मदद कर सकता है।

पुलिस फिलहाल आरोपी की पहचान और ठगी की पूरी प्रक्रिया का पता लगाने में जुटी है। बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप अकाउंट और तीनों लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी सत्यापित करेगी कि घटना में केवल एक आरोपी शामिल था या इसके पीछे कई लोगों का नेटवर्क काम कर रहा था। रकम की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी जांच में सामने आने वाले डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।

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