कोट्टायम: केरल में कनाडा में नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों से कथित तौर पर करीब ₹3.5 करोड़ की ठगी के मामले में पुलिस ने 64 वर्षीय कनाडाई नागरिक जेम्स कुट्टी कुरियाकोस को गिरफ्तार किया है। आरोपी मूल रूप से चंगनाशेरी का रहने वाला है और वर्तमान में एर्नाकुलम के पनंगड में रह रहा था। पुलिस के अनुसार, कुरियाकोस ने कनाडा में नर्सिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर कई लोगों से बड़ी रकम हासिल की। आरोप है कि रकम लेने के बाद उसने न तो वादा की गई नौकरियां दिलाईं और न ही पीड़ितों की रकम वापस की।
चिंगवनम पुलिस ने आरोपी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। इसके बाद उसकी तलाश तेज की गई। जांच के दौरान पुलिस को उसके बांग्लादेश सीमा की ओर होने की जानकारी मिली। इसके बाद सीमा सुरक्षा बल यानी BSF की इमिग्रेशन विंग की सहायता से उसकी गतिविधियों का पता लगाया गया और उसे सीमा क्षेत्र के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, कुरियाकोस ने कनाडा में रोजगार दिलाने का वादा कर कई लोगों से रकम ली थी। इनमें नर्सिंग से जुड़ी नौकरियों के अलावा अन्य रोजगार उपलब्ध कराने का भी कथित आश्वासन दिया गया था। पीड़ितों ने जब नौकरी मिलने का इंतजार किया और लंबे समय तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया, तब उन्होंने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद मामले में धोखाधड़ी की जांच शुरू हुई।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कुल कितने लोगों से रकम ली और प्रत्येक व्यक्ति से कितनी राशि वसूली गई। जांच में कथित वित्तीय लेनदेन, पीड़ितों से संपर्क के माध्यम, नौकरी के प्रस्तावों से जुड़े दस्तावेज और कनाडा में रोजगार उपलब्ध कराने के उसके दावों की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस कथित धोखाधड़ी में किसी एजेंट, बिचौलिए या अन्य व्यक्ति ने उसकी मदद की थी।
जांच का एक अहम हिस्सा आरोपी के खिलाफ केरल के अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज पुराने मामलों की पड़ताल भी है। पुलिस को उसके खिलाफ अन्य स्थानों पर इसी तरह की वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों और मामलों की जानकारी मिली है। इन मामलों के रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या सभी घटनाओं में ठगी का तरीका एक जैसा था और क्या आरोपी लंबे समय से विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को निशाना बना रहा था।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने ऐसे मामलों के संदर्भ में कहा कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी में आरोपी अक्सर आकर्षक वेतन, आसान वीजा प्रक्रिया और तत्काल नियुक्ति का भरोसा देकर पीड़ितों को आर्थिक रूप से फंसाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विदेशी नौकरी के प्रस्ताव पर रकम देने से पहले नियोक्ता कंपनी, भर्ती एजेंसी, नियुक्ति पत्र, वीजा प्रक्रिया और भुगतान की वैधता की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।
विदेशी रोजगार से जुड़े फर्जीवाड़े में कई बार आरोपी सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप, फोन कॉल या व्यक्तिगत संपर्क के जरिए पीड़ितों तक पहुंचते हैं। इसके बाद उन्हें नौकरी, वीजा और विदेश भेजने की प्रक्रिया के नाम पर अलग-अलग चरणों में रकम देने के लिए तैयार किया जाता है। जब पीड़ित भुगतान कर देते हैं तो आरोपी संपर्क से बचने लगता है या नए बहाने बनाकर अतिरिक्त रकम मांगता रहता है।
कुरियाकोस की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब कथित तौर पर वसूली गई ₹3.5 करोड़ की रकम के वित्तीय प्रवाह की भी जांच कर सकती है। अधिकारियों का प्रयास होगा कि रकम किन बैंक खातों में पहुंची, उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या इसे अन्य लोगों या संस्थाओं तक स्थानांतरित किया गया था। इससे मामले में संभावित सहयोगियों और कथित नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
पुलिस के सामने अब अलग-अलग शिकायतों और मामलों को जोड़कर कथित ठगी के पूरे दायरे का पता लगाने की चुनौती है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में अभी तक सामने आए पीड़ितों के अलावा और कितने लोग प्रभावित हुए हैं। पुराने मामलों की जानकारी सामने आने के बाद आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
कुरियाकोस की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों को लेकर लगातार सतर्कता की जरूरत महसूस की जा रही है। पुलिस लोगों से अपील करती है कि विदेश में रोजगार के किसी भी प्रस्ताव पर बड़ी रकम देने से पहले संबंधित कंपनी और भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। फिलहाल चिंगवनम पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ सामने आए अन्य मामलों की भी पड़ताल जारी है।
