मैहर: मध्य प्रदेश के मैहर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की चार शासकीय उचित मूल्य दुकानों में बड़े पैमाने पर खाद्यान्न की कमी सामने आने के बाद पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। ताला थाना क्षेत्र की इन दुकानों में जांच के दौरान कुल करीब ₹59.30 लाख मूल्य का खाद्यान्न कम पाया गया। आरोप है कि दुकानों से राशन लेने वाले हितग्राहियों की POS मशीन पर बायोमेट्रिक उपस्थिति और अंगूठा लगवाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती थी, लेकिन इसके बाद उन्हें निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध नहीं कराया जाता था। मामला सामने आने के बाद खाद्य विभाग ने संबंधित दुकानों के रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक का सत्यापन कराया।
कार्रवाई कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी के निर्देश पर खाद्य विभाग की जांच के बाद की गई। कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी प्रियंका अग्रवाल की रिपोर्ट के आधार पर ताला थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया। जांच में बिंधुई खुर्द, अमझर, बिछिया खुर्द और रामगढ़ की उचित मूल्य दुकानों में दर्ज स्टॉक और मौके पर उपलब्ध खाद्यान्न के बीच बड़ा अंतर पाया गया। अधिकारियों ने दस्तावेजों, POS मशीन से संबंधित रिकॉर्ड और भौतिक स्टॉक का मिलान किया, जिसके बाद कथित अनियमितता का खुलासा हुआ।
जांच के मुताबिक बिंधुई खुर्द की राशन दुकान में करीब ₹12.92 लाख मूल्य का खाद्यान्न कम मिला। इसी तरह अमझर की दुकान में ₹14.88 लाख, बिछिया खुर्द में ₹14.74 लाख और रामगढ़ की दुकान में करीब ₹16.74 लाख मूल्य का खाद्यान्न कम पाया गया। चारों दुकानों में सामने आई कमी की कुल अनुमानित कीमत ₹59.30 लाख बताई गई है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि रिकॉर्ड में दर्ज और वास्तविक स्टॉक के बीच यह अंतर किस तरह पैदा हुआ और कथित तौर पर कम खाद्यान्न का क्या किया गया।
मामले की जांच में यह भी सामने आया कि करीब चार महीने से हितग्राहियों से POS मशीन पर अंगूठा लगवाने के बावजूद उन्हें राशन की पूरी निर्धारित मात्रा नहीं दी जा रही थी। आरोप है कि गेहूं, चावल, नमक और शक्कर के वितरण में अनियमितता की गई। बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राशन वितरण दर्ज होने की स्थिति में हितग्राही के हिस्से का खाद्यान्न वास्तविक रूप से मिला या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। इस बिंदु पर विभागीय रिकॉर्ड और लाभार्थियों के बयानों को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
पुलिस ने बिंधुई खुर्द और अमझर की दुकानों से जुड़े विक्रेता अवधेश चतुर्वेदी और सहायक विक्रेता दीपक को आरोपी बनाया है। वहीं, बिछिया खुर्द और रामगढ़ की दुकानों के विक्रेता अतुल सिंह के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपियों से राशन के स्टॉक, वितरण रिकॉर्ड, POS मशीन से हुए लेनदेन और खाद्यान्न की कथित कमी के संबंध में पूछताछ करेगी। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि अनियमितता में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 316(5) के साथ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत पुलिस कथित धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आवश्यक वस्तुओं के वितरण से संबंधित अनियमितताओं की जांच कर रही है। खाद्य विभाग ने संबंधित संचालकों के खिलाफ कथित नुकसान की वसूली की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।
मामले में अब पुलिस और खाद्य विभाग की जांच का दायरा बढ़ सकता है। अधिकारी यह सत्यापित कर रहे हैं कि जिन हितग्राहियों के नाम पर POS मशीन में राशन वितरण दर्ज हुआ, उन्हें वास्तव में कितना खाद्यान्न मिला। यदि बड़ी संख्या में लाभार्थियों के बयानों और डिजिटल रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो मामले में अतिरिक्त तथ्य सामने आ सकते हैं। विभाग अन्य उचित मूल्य दुकानों के स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड की भी जांच कर सकता है।
कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करने की बात कही है। उन्होंने राशन दुकानों की जांच लगातार जारी रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का जोर स्टॉक सत्यापन, POS रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर है, ताकि पात्र हितग्राहियों को उनके हिस्से का राशन समय पर मिल सके। पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई पूरी होने के बाद कथित खाद्यान्न कमी की जिम्मेदारी और वास्तविक आर्थिक नुकसान की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
