पटना: NEET-UG 2026 और री-NEET UG परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने दो अंतिम वर्ष के MBBS छात्रों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर ऐसे संगठित नेटवर्क का हिस्सा होने का आरोप है, जो अभ्यर्थियों की जगह ‘सॉल्वर’ बैठाकर उन्हें परीक्षा पास कराने की व्यवस्था करता था। जांच में सामने आया है कि गिरोह कथित तौर पर प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹12 लाख से ₹30 लाख तक वसूलता था। परीक्षा केंद्रों पर पहचान सत्यापन को चकमा देने के लिए बायोमेट्रिक विवरण में हेरफेर, तस्वीरों में बदलाव और फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पूर्वी चंपारण के मोतिहारी निवासी उज्ज्वल राज और पटना के शाहजहांपुर निवासी रविशंकर उर्फ सम्राट के रूप में हुई है। उज्ज्वल को 11 अगस्त को पटना स्थित आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी के परीक्षा केंद्र के बाहर गिरफ्तार किया गया। वह वहां MBBS तृतीय वर्ष की सप्लीमेंट्री परीक्षा देने पहुंचा था। उज्ज्वल नालंदा के पावापुरी स्थित महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का अंतिम वर्ष का छात्र है।
रविशंकर को 12 अगस्त को इसी परीक्षा केंद्र के बाहर पकड़ा गया। वह भी उसी संस्थान में MBBS अंतिम वर्ष का छात्र है। जांच एजेंसी के अनुसार, वह लखीसराय री-NEET रैकेट का कथित प्रमुख संचालक है। EOU अब दोनों की भूमिका के साथ-साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अभ्यर्थियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
EOU की जांच चार मामलों के आधार पर आगे बढ़ रही है। इनमें एक मामला 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जबकि तीन मामले 21 जून को हुई री-NEET UG परीक्षा के संबंध में दर्ज किए गए थे। मामलों की गंभीरता को देखते हुए EOU ने जांच अपने हाथ में ली और आगे की पड़ताल के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया।
जांच में आरोप है कि गिरोह परीक्षा से पहले मूल अभ्यर्थी और सॉल्वर की पहचान को इस तरह तैयार करता था कि परीक्षा केंद्र पर वास्तविक अभ्यर्थी की जगह दूसरा व्यक्ति परीक्षा दे सके। अधिकृत आधार एजेंटों और कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों की कथित मदद से मूल अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक विवरण को सॉल्वर के डेटा से बदलने की बात सामने आई है। तस्वीरों में भी कथित तौर पर बदलाव या मिश्रण किया जाता था, ताकि परीक्षा केंद्र पर पहचान सत्यापन प्रक्रिया को पार किया जा सके।
कथित फर्जीवाड़ा केवल सॉल्वर बैठाने तक सीमित नहीं था। जांच एजेंसी को ऐसे फर्जी आय, दिव्यांगता और जाति प्रमाणपत्र तैयार किए जाने के साक्ष्य मिले हैं, जिनका इस्तेमाल मेडिकल कॉलेजों में काउंसलिंग के दौरान दाखिला हासिल करने के लिए किया जा सकता था। रविशंकर की पत्नी मधु प्रिया पर भी री-NEET परीक्षा में सॉल्वर का इस्तेमाल करने और कथित फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र हासिल करने का आरोप है। जांच के अनुसार, यह प्रमाणपत्र पटना के एक प्रखंड कार्यालय के माध्यम से कथित तौर पर तैयार कराया गया था। गर्भावस्था के कारण उसकी गिरफ्तारी पर अदालत ने फिलहाल रोक लगा रखी है।
उज्ज्वल राज के खिलाफ पहले से भी सॉल्वर नेटवर्क से जुड़ा मामला दर्ज है। 2024 में उस पर कटिहार जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय में NEET-UG परीक्षा के दौरान करीब सात फर्जी सॉल्वर की व्यवस्था कराने का आरोप लगा था। वह इस मामले में पटना हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत पर है। 2024 में CBI ने भी उससे पूछताछ की थी। जांच के दौरान उसके पास से एक SUV और कथित तौर पर फर्जी सॉल्वर की व्यवस्था के लिए जुटाई गई ₹2.95 लाख की नकदी जब्त की गई।
रविशंकर पर राजस्थान के डीग में दर्ज रेलवे ग्रुप-D भर्ती परीक्षा धोखाधड़ी मामले में भी आरोपी होने की बात सामने आई है। वह उस मामले में भी जमानत पर बाहर है। जांच के अनुसार, उसने 2012 में 12वीं कक्षा पास की और 2022 में NEET क्वालिफाई किया। इसके बाद वह कथित तौर पर NEET समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से पास कराने वाले नेटवर्क में सक्रिय हो गया। आरोप है कि गिरोह प्रत्येक अभ्यर्थी से ₹12 लाख से ₹30 लाख तक वसूलता था।
EOU ने जांच के दौरान पटना में कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच में मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों के छात्रों, बायोमेट्रिक मैनपावर सप्लायरों तथा लखीसराय, हाजीपुर, नवादा और नालंदा में सक्रिय कुछ वेंडरों की कथित भूमिका सामने आई है। फर्जी आधार और अन्य दस्तावेज तैयार करने वालों की भी जांच की जा रही है।
छापेमारी के दौरान जिन लोगों से जुड़े एडमिट कार्ड, जाति प्रमाणपत्र, दिव्यांगता प्रमाणपत्र और खाली चेक बरामद हुए हैं, उन्हें पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क ने कितने अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया और परीक्षा की पहचान सत्यापन व्यवस्था में कितनी गहरी सेंध लगाई गई। डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
