नई दिल्ली: Bournvita बनाने वाली Mondelez India Foods ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की आपत्तियों के बाद अपने कुछ स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावों को वापस ले लिया है। कंपनी ने संबंधित विज्ञापनों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित सामग्री में भी बदलाव किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब FSSAI ने खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रचार में किए जा रहे भ्रामक दावों के खिलाफ निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है।
FSSAI की ओर से खाद्य कंपनियों को भेजे गए नोटिसों की संख्या 150 से अधिक हो चुकी है। इनमें कथित तौर पर भ्रामक विज्ञापन, तथ्यहीन या अप्रमाणित दावे और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामले शामिल हैं। Mondelez के अलावा Nestlé India, PepsiCo, Coca-Cola India, Abbott India, Red Bull India, Danone India, Monster Energy India, Ferrero India और Kenvue जैसी कंपनियां भी नियामक की कार्रवाई के दायरे में आई हैं।
2023 में भी विवादों में रहा था Bournvita
Bournvita पहले भी अपने शुगर कंटेंट और पोषण संबंधी दावों को लेकर सवालों के घेरे में आ चुका है। वर्ष 2023 में सोशल मीडिया पर इसके चीनी की मात्रा और बच्चों के लिए किए जाने वाले पोषण संबंधी प्रचार को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। इसके बाद उत्पाद की मार्केटिंग और उसमें किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों पर भी ध्यान गया।
हालिया कार्रवाई में कंपनियों को अपने प्रचार में ऐसे दावों से बचने को कहा जा रहा है जिन्हें वैज्ञानिक या नियामकीय आधार पर पर्याप्त रूप से साबित नहीं किया जा सकता। FSSAI का जोर इस बात पर है कि उपभोक्ताओं को किसी खाद्य उत्पाद के पोषण, स्वास्थ्य लाभ या गुणवत्ता के बारे में ऐसी जानकारी न दी जाए जिससे उत्पाद की वास्तविक विशेषताओं को लेकर भ्रम पैदा हो।
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‘100%’ दावे पर भी FSSAI की आपत्ति
FSSAI की कार्रवाई केवल Bournvita तक सीमित नहीं है। Amway India ने अपने “100% Pure Coconut Oil” उत्पाद की पैकेजिंग और प्रचार सामग्री से “100%” शब्द हटाने पर सहमति जताई है। कंपनी के कैफीनयुक्त XS उत्पादों से “Energy Drink” विवरण हटाने की कार्रवाई भी सामने आई है।
केरल की Juza Foods ने अपने बेबी-फूड उत्पादों से “boost immunity”, “support stronger bones” और कैल्शियम की तुलना से जुड़े दावों को हटाने की सहमति दी है।
यह कार्रवाई FSSAI की मई 2025 की उस एडवाइजरी के बाद तेज हुई है, जिसमें खाद्य कारोबारियों को लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में “100%” जैसे शब्दों के इस्तेमाल से बचने को कहा गया था। नियामक का तर्क है कि ऐसा दावा उपभोक्ता के बीच उत्पाद की पूर्ण शुद्धता या दूसरे उत्पादों की तुलना में श्रेष्ठता का भ्रम पैदा कर सकता है।
ई-कॉमर्स कंपनियां और रेस्तरां भी निगरानी में
FSSAI ने अपनी निगरानी का दायरा अब केवल खाद्य निर्माताओं तक सीमित नहीं रखा है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और फूड-सर्विस प्रतिष्ठानों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। नियामक ने ई-कॉमर्स कंपनियों को 12 नोटिस जारी किए हैं, जबकि 30 से अधिक नोटिस फूड-सर्विस प्रतिष्ठानों को दिए गए हैं। इनमें बड़े रेस्तरां समूह भी शामिल हैं।
नियामक की कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य उत्पादों से जुड़े स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावों को अधिक पारदर्शी बनाना है। कंपनियों द्वारा आपत्तिजनक दावे हटाए जाने के बावजूद बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि भविष्य में वही या इसी तरह के दावे दोबारा प्रचार सामग्री में शामिल न किए जाएं।
Bournvita मामले में Mondelez की ओर से उठाया गया सुधारात्मक कदम इस व्यापक नियामकीय अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। FSSAI अब खाद्य क्षेत्र में विज्ञापन और लेबलिंग को लेकर अनुपालन पर अधिक लगातार निगरानी रख रहा है, जिससे कंपनियों पर अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त आधार उपलब्ध कराने का दबाव बढ़ गया है।
