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Home»Fraud Alert»₹21 करोड़ के मॉर्गेज फ्रॉड का खुलासा, दंपती समेत हाउसिंग फाइनेंस कंपनी का मैनेजर गिरफ्तार
Fraud Alert

₹21 करोड़ के मॉर्गेज फ्रॉड का खुलासा, दंपती समेत हाउसिंग फाइनेंस कंपनी का मैनेजर गिरफ्तार

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksAugust 26, 2026No Comments4 Mins Read
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₹3 करोड़ के पुराने लोन की फर्जी अदायगी दिखाकर आठ संपत्तियों के मूल दस्तावेज वापस लेने का आरोप; इन्हीं कागजात के आधार पर दूसरे बैंक से ₹21 करोड़ का कर्ज हासिल किया गया
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चेन्नई: सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने करीब ₹21 करोड़ के कथित मॉर्गेज फ्रॉड मामले में एक दंपती और निजी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी के एक मैनेजर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दंपती ने पहले एक हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से लिए गए मॉर्गेज लोन के बदले जमा आठ संपत्तियों के मूल दस्तावेज फर्जी तरीके से वापस हासिल किए और बाद में उन्हीं संपत्ति दस्तावेजों को दूसरी बैंकिंग संस्था के पास गिरवी रखकर ₹21 करोड़ का कर्ज ले लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अन्ना नगर निवासी 51 वर्षीय देवेंद्रन, उनकी 43 वर्षीय पत्नी शशिकला और पेरुंगुडी निवासी 51 वर्षीय आर.जी. हरिनाथ कार्तिक के रूप में हुई है। कार्तिक रिपको होम फाइनेंस लिमिटेड की अन्ना नगर शाखा में मैनेजर के पद पर कार्यरत था। पुलिस के अनुसार मामले में तीनों की भूमिका की जांच की जा रही है।

जांच के मुताबिक देवेंद्रन और शशिकला ने वर्ष 2016 में रिपको होम फाइनेंस से दो मॉर्गेज लोन लिए थे। दोनों ऋणों की कुल राशि करीब ₹3 करोड़ थी। इसके लिए दंपती ने आठ संपत्तियों के मूल दस्तावेज ऋणदाता के पास बतौर जमानत जमा किए थे। समय बीतने के बाद भी लोन की करीब ₹2.26 करोड़ की राशि बकाया थी।

पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान शाखा मैनेजर कार्तिक ने कथित तौर पर लोन पूरी तरह चुकता होने की फर्जी रसीद तैयार की। इस दस्तावेज के आधार पर मॉर्गेज रद्द कर दिया गया और आठों संपत्तियों के मूल दस्तावेज दंपती को वापस मिल गए। जबकि कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार उस समय लोन की बड़ी रकम अभी भी बकाया थी।

मामला उस समय सामने आया जब हाउसिंग फाइनेंस कंपनी में नियमित ऑडिट के दौरान अधिकारियों को दस्तावेजों और लोन रिकॉर्ड में गड़बड़ी का पता चला। शीर्ष अधिकारियों के स्तर पर जांच किए जाने के बाद यह सामने आया कि जिन संपत्तियों के दस्तावेज कंपनी के पास होने चाहिए थे, वे कथित तौर पर दंपती को वापस दिए जा चुके थे।

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पुलिस के अनुसार दस्तावेज वापस हासिल करने के बाद दंपती ने उन्हीं संपत्तियों को दूसरी निजी बैंकिंग संस्था के पास गिरवी रखा। इसके आधार पर उन्होंने करीब ₹21 करोड़ का नया लोन हासिल किया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दूसरे ऋणदाता के सामने संपत्तियों की स्थिति और पहले से मौजूद ऋण के बारे में क्या जानकारी प्रस्तुत की गई थी।

मामले में कार्रवाई रिपको होम फाइनेंस के लीगल असिस्टेंट मैनेजर एम. विजयकुमार की शिकायत के आधार पर शुरू हुई। उन्होंने 8 जुलाई को चेन्नई पुलिस आयुक्त के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कथित फर्जी दस्तावेज, मॉर्गेज रद्द करने और कंपनी की संपत्तियों से संबंधित मूल कागजात वापस लेने की प्रक्रिया में अनियमितताओं की जानकारी दी गई थी।

CCB ने शिकायत की जांच के बाद मामला दर्ज किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब कथित धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों, लोन रिकॉर्ड और बैंकिंग लेनदेन की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी रसीद तैयार करने और मॉर्गेज हटाने की प्रक्रिया में किन स्तरों पर नियमों का उल्लंघन हुआ।

पुलिस ने बताया कि देवेंद्रन और शशिकला के खिलाफ दो अन्य कथित धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए हैं। इन मामलों में कुल करीब ₹9.19 करोड़ की राशि शामिल होने की बात कही गई है। जांच एजेंसी इन मामलों और मौजूदा ₹21 करोड़ के मॉर्गेज फ्रॉड के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।

यह मामला डिजिटल और दस्तावेज आधारित वित्तीय धोखाधड़ी के साथ-साथ संपत्ति के कागजात की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े जोखिम को भी सामने लाता है। जांचकर्ताओं का फोकस अब यह पता लगाने पर है कि मूल दस्तावेजों की वापसी, मॉर्गेज रद्द करने और दूसरे ऋणदाता से वित्त जुटाने की पूरी प्रक्रिया किस तरह अंजाम दी गई।

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