चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के लोक निर्माण और खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन की ओर से दायर ₹1 करोड़ के दीवानी मानहानि मुकदमे पर DMK अध्यक्ष एमके स्टालिन और पार्टी के IT Wing को नोटिस जारी किया है। मामला 8 जून 2026 को किए गए एक X पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर नशीले पदार्थों के मामले में आरोपी जॉन ब्रिटो को आधव अर्जुन का रिश्तेदार बताया गया था। मंत्री ने इस दावे को झूठा और मानहानिकारक बताते हुए अदालत से ₹1 करोड़ के हर्जाने की मांग की है।
न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलकावती ने 28 अगस्त को मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद नोटिस जारी करने का आदेश दिया। अदालत ने नोटिस को 15 सितंबर 2026 को वापस किए जाने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि उस तारीख तक प्रतिवादी पक्ष को मंत्री की ओर से लगाए गए आरोपों और दायर मुकदमे पर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
मंत्री की ओर से पेश अधिवक्ता एपी सूर्यप्रकाशम ने अदालत के समक्ष प्रारंभिक दलीलों में कहा कि संबंधित X पोस्ट प्रथम दृष्टया झूठा और अत्यधिक मानहानिकारक है। उनका तर्क था कि पोस्ट में लगाए गए आरोप से मंत्री की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है और इसलिए इसके खिलाफ कानूनी राहत की आवश्यकता है।
विवाद का केंद्र 8 जून 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रकाशित वह पोस्ट है, जिसमें जॉन ब्रिटो और मंत्री के बीच कथित पारिवारिक संबंध का दावा किया गया था। ब्रिटो एक नशीले पदार्थों से जुड़े मामले में आरोपी बताया गया है। आधव अर्जुन ने इस कथित संबंध से साफ इनकार किया है और आरोप लगाया है कि उनके बारे में गलत जानकारी सार्वजनिक कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मंत्री की ओर से रखी गई प्रारंभिक दलीलों पर विचार किया और स्टालिन तथा DMK IT Wing को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। अदालत की कार्यवाही के अनुसार, प्रतिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे. रवींद्रन पहले ही पेश हो चुके हैं। अब मामले में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें और दस्तावेज अदालत के सामने आने की उम्मीद है।
मंत्री ने अपने मुकदमे में कथित सोशल मीडिया पोस्ट के कारण हुई प्रतिष्ठा की क्षति के लिए ₹1 करोड़ के मुआवजे की मांग की है। हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से नोटिस जारी किया जाना इस बात का निष्कर्ष नहीं है कि मंत्री द्वारा लगाए गए आरोप अदालत में साबित हो गए हैं। यह मामला अभी प्रारंभिक चरण में है और प्रतिवादी पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना बाकी है।
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मामले में मुख्य कानूनी सवाल यह होगा कि X पोस्ट में किया गया कथित दावा तथ्यात्मक रूप से गलत और मानहानिकारक था या नहीं तथा क्या उससे मंत्री की प्रतिष्ठा को ऐसी क्षति हुई, जिसके लिए कानून के तहत हर्जाने का दावा किया जा सकता है। अदालत आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्क और उपलब्ध सामग्री के आधार पर इन पहलुओं पर विचार करेगी।
प्रतिवादी पक्ष को भी यह बताने का अवसर मिलेगा कि संबंधित पोस्ट किस आधार, संदर्भ और सामग्री के आधार पर प्रकाशित किया गया था। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि दीवानी मानहानि के मुकदमे को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए।
यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच सामने आया है। राजनीतिक दल और उनके समर्थक X जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आरोप-प्रत्यारोप और सार्वजनिक बहस के लिए करते हैं। ऐसे में किसी सार्वजनिक व्यक्ति से संबंधित कथित गलत या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले दावों के खिलाफ अदालत का रुख अपनाने के मामले भी सामने आते रहे हैं।
आधव अर्जुन का वर्तमान मुकदमा विशेष रूप से जॉन ब्रिटो के साथ कथित रिश्ते से संबंधित दावे पर केंद्रित है। मंत्री ने इस दावे को चुनौती देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप और ₹1 करोड़ के हर्जाने की मांग की है।
अब मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 15 सितंबर है। उस दिन नोटिस का जवाब अदालत के समक्ष आने की संभावना है। इसके बाद हाईकोर्ट दोनों पक्षों की दलीलों और दस्तावेजों पर विचार करते हुए दीवानी कार्यवाही की आगे की दिशा तय करेगा। फिलहाल अदालत ने न तो सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावे को सही माना है और न ही मानहानि के आरोप को अंतिम रूप से स्थापित किया है।
