कलाबुरागी। कर्नाटक के कलाबुरागी में 67 वर्षीय एक रिटायर्ड डॉक्टर कथित ‘Digital Arrest’ साइबर ठगी का शिकार हो गए। साइबर अपराधियों ने पहले Courier कंपनी के कर्मचारी बनकर संपर्क किया और बाद में खुद को Enforcement Directorate (ED) तथा National Investigation Agency (NIA) के अधिकारी बताकर डॉक्टर को कथित आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने डॉक्टर और उनकी पत्नी का प्रतिबंधित Popular Front of India (PFI) से संबंध होने का दावा किया और करीब ₹2.5 करोड़ के कथित अवैध फंड की जांच का डर दिखाकर उनसे कुल ₹1.79 करोड़ ट्रांसफर करा लिए।
Courier Call से शुरू हुआ जांच का डर
पुलिस के अनुसार, ठगी की शुरुआत 14 जुलाई को हुई। डॉक्टर की पत्नी को एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को Courier कंपनी से जुड़ा कर्मचारी बताया। कॉल करने वाले ने कथित तौर पर कहा कि उनके नाम से एक अवैध पैकेज मुंबई भेजा जा रहा है। इसके बाद कॉल को दूसरे व्यक्ति से जोड़ दिया गया, जिसने दावा किया कि यह पैकेज एक गंभीर आपराधिक जांच से जुड़ा है।
इसके बाद कथित ठगों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसियों के अधिकारी बताया। डॉक्टर को कथित तौर पर बताया गया कि Courier मामले की जांच के दौरान उनके परिवार का नाम सामने आया है। इसके बाद PFI से संबंध और कथित अवैध वित्तीय गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाकर उन पर दबाव बनाया गया।
₹2.5 करोड़ के कथित फंड का डर
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने डॉक्टर से कहा कि उनके नाम से करीब ₹2.5 करोड़ का कथित अवैध फंड जुड़ा हुआ है और इसकी जांच चल रही है। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर इस रकम का 10 प्रतिशत भुगतान करने की मांग की।
इसके बाद डॉक्टर को लगातार फोन और ऑनलाइन माध्यमों से संपर्क में रखा गया। उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि वह केंद्रीय जांच एजेंसियों की निगरानी में हैं और निर्देशों का पालन नहीं करने पर गिरफ्तारी तथा अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
अलग-अलग खातों में ट्रांसफर हुए ₹1.79 करोड़
Digital Arrest Scam में अपराधी आमतौर पर पुलिस, जांच एजेंसियों या अन्य सरकारी विभागों के अधिकारी बनकर पीड़ित को मानसिक दबाव में लेते हैं। इस मामले में भी डॉक्टर को कथित जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाकर लगातार दबाव में रखा गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के निर्देश पर डॉक्टर ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹1.79 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। बाद में उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
अब जांचकर्ताओं का मुख्य फोकस उन बैंक खातों पर है, जिनमें रकम भेजी गई। पुलिस खातों को फ्रीज कराने और ट्रांसफर की गई रकम को ट्रेस करने का प्रयास कर रही है। आरोपियों के मोबाइल नंबर, Call Records, Transaction Details और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
Money Trail खंगाल रही पुलिस
जांच में ₹1.79 करोड़ की पूरी Money Trail को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किन खातों में पहुंची और वहां से उसे आगे किन खातों या माध्यमों के जरिए ट्रांसफर किया गया।
साइबर ठगी के मामलों में रकम अक्सर कई बैंक खातों के जरिए तेजी से आगे भेज दी जाती है। ऐसे में जांचकर्ता शुरुआती Beneficiary Accounts के साथ उनसे जुड़े आगे के Transactions की भी पड़ताल कर रहे हैं। इससे कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और रकम के अंतिम लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
‘डर पैदा करना अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार’
Renowned cyber crime expert and former IPS officer Prof. Triveni Singh ने कहा कि Digital Arrest Scam में तकनीक के साथ Psychological Manipulation का इस्तेमाल किया जाता है। अपराधी पहले Courier कंपनी, बैंक या किसी अन्य विश्वसनीय संस्था के नाम से बातचीत शुरू करते हैं और फिर पीड़ित को गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने का डर दिखाकर नियंत्रण में लेने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि ED, NIA या पुलिस जैसी एजेंसियों का नाम सुनकर पीड़ित घबरा सकता है और फर्जी अधिकारियों की बातों पर भरोसा कर सकता है। फोन या Video Call पर गिरफ्तारी रोकने, जांच पूरी करने या Account Verification के नाम पर पैसे मांगे जाएं तो इसे गंभीर Red Flag मानना चाहिए। ऐसी स्थिति में रकम ट्रांसफर करने के बजाय संबंधित एजेंसी से आधिकारिक माध्यम से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना जरूरी है।
बैंक खातों और Call Records की जांच जारी
पुलिस ने बताया कि आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तकनीकी जांच जारी है। Bank Accounts, Transaction Records, Call Details और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। जांचकर्ताओं का प्रयास ठगी की रकम को अधिकतम स्तर तक ट्रेस करने के साथ पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान करना है।
यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब केवल OTP या फर्जी बैंक कॉल तक सीमित नहीं हैं। Courier Delivery से शुरू होने वाली बातचीत को कथित केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई में बदलकर पीड़ित को कई चरणों में मानसिक दबाव में लिया जा रहा है। किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर फोन या Video Call के जरिए कानूनी कार्रवाई रोकने के बदले पैसे की मांग की जाए तो उसे तत्काल ठगी का संकेत मानकर पुलिस या आधिकारिक साइबर अपराध सहायता व्यवस्था से संपर्क करना चाहिए।
