बिश्केक: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और आतंकवाद, अलगाववाद, उग्रवाद, अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और दूरसंचार ठगी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई मजबूत करने का आह्वान किया।
बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य सदस्य देशों के नेताओं की मौजूदगी में शी ने पारंपरिक और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने परमाणु सुरक्षा, सूचना सुरक्षा, जैव सुरक्षा और अंतरिक्ष सुरक्षा के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की बात कही।
शी ने कहा कि संगठन को साझा सुरक्षा का वातावरण तैयार करने के लिए विभिन्न खतरों से निपटने के वास्ते समन्वित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के अलावा अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और दूरसंचार ठगी को ऐसे क्षेत्र बताया, जहां सदस्य देशों को मिलकर अधिक प्रभावी कार्रवाई करने की जरूरत है।
चीनी राष्ट्रपति ने SCO सदस्य देशों के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को ऐसी बाहरी ताकतों को रोकना चाहिए जो उनकी राजनीतिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं या क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर सकती हैं।
शी का यह बयान ऐसे समय आया है जब SCO पारंपरिक सुरक्षा सहयोग से आगे बढ़कर आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने संगठन की 25 साल की यात्रा का उल्लेख करते हुए इसे दक्षिण-दक्षिण सहयोग का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उनके मुताबिक, संगठन का विशाल भौगोलिक क्षेत्र, बड़ी आबादी और विकास की व्यापक संभावनाएं इसे महत्वपूर्ण बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि SCO का सहयोग गैर-गुटबंदी, टकराव से बचने और किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाने के सिद्धांत पर आधारित है। शी ने आपसी विश्वास, पारस्परिक लाभ, समानता, परामर्श, विभिन्न सभ्यताओं के सम्मान और साझा विकास पर आधारित ‘शंघाई भावना’ को संगठन की महत्वपूर्ण ताकत बताया।
SCO में वर्तमान में चीन, रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस शामिल हैं। चीन ने रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ मिलकर इस संगठन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। संगठन का मुख्यालय बीजिंग में है।
शी ने शिखर सम्मेलन के दौरान SCO सदस्य देशों के साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की चीन की योजनाओं का भी खाका पेश किया। उन्होंने डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित ऊर्जा, तकनीक, व्यापार और परिवहन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही।
उन्होंने कहा कि चीन SCO देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुप्रयोग सहयोग केंद्र विकसित करेगा। इसके अलावा चीन सदस्य देशों के साथ मिलकर सौर और पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता में अगले चरण में 1-1 करोड़ किलोवाट की वृद्धि करने के लिए सहयोग करेगा।
शी ने अगले तीन वर्षों में SCO देशों के साथ 100 तकनीकी सहयोग परियोजनाएं लागू करने और हरित उद्योगों के लिए अधिक कुशल मानव संसाधन तैयार करने की योजना भी बताई।
व्यापार और परिवहन संपर्क के मुद्दे पर शी ने ट्रांस-कैस्पियन अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारे की क्षमता और दक्षता बढ़ाने का समर्थन किया। उन्होंने तियानजिन में चीन-SCO बंदरगाह आर्थिक सहयोग केंद्र स्थापित करने की योजना की भी घोषणा की, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार और माल परिवहन को बढ़ावा देना है।
शी के संबोधन में सुरक्षा सहयोग के साथ आर्थिक और तकनीकी साझेदारी का व्यापक एजेंडा भी दिखाई दिया। आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की उनकी अपील ऐसे समय आई है जब दूरसंचार ठगी और तकनीक आधारित अपराध कई देशों के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
चीनी राष्ट्रपति ने परमाणु सुरक्षा के लिए बहुपक्षीय सहयोग मजबूत करने की भी वकालत की। उन्होंने परमाणु सुरक्षा के लिए संतुलित, समन्वित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई।
शी के 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने की भी व्यापक संभावना जताई जा रही है। SCO में उनका संबोधन सुरक्षा समन्वय, बाहरी हस्तक्षेप के विरोध और तकनीक, ऊर्जा, व्यापार तथा क्षेत्रीय संपर्क के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रहा।
