कंपाला: युगांडा में करीब ₹60 अरब के कथित सरकारी भुगतान घोटाले में वित्त मंत्रालय और बैंक ऑफ युगांडा के नौ अधिकारियों पर मुकदमा चल रहा है। आरोप है कि सरकारी भुगतान प्रणाली में कथित हेरफेर कर विश्व बैंक के अंतरराष्ट्रीय विकास संघ और अफ्रीकी विकास बैंक के अफ्रीकी विकास कोष को किए जाने वाले ऋण भुगतान की रकम विदेशी कंपनियों की ओर मोड़ दी गई। मामले में अदालत ने अभियोजन पक्ष को बचाव पक्ष के साथ सभी संबंधित दस्तावेज और सबूत साझा करने का निर्देश दिया है।
भ्रष्टाचार निरोधक प्रभाग के न्यायाधीश डेविड मकुंबी ने अभियोजन पक्ष को 1 सितंबर 2026 तक सबूतों का खुलासा पूरा करने और 2 सितंबर तक सभी प्रदर्शों की सूची दाखिल करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष को मुकदमे की पर्याप्त तैयारी के लिए सभी साक्ष्य समय पर मिलना जरूरी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान अचानक नए सबूत पेश कर बचाव पक्ष को कठिन स्थिति में नहीं डाला जा सकता।
अभियोजन पक्ष ने एक ऑडिटर जनरल की रिपोर्ट और दो बयानों को बचाव पक्ष के साथ साझा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। बचाव पक्ष ने इसका विरोध किया और कहा कि अदालत पहले ही 13 जुलाई 2026 तक पूर्ण खुलासा करने का निर्देश दे चुकी थी। बचाव पक्ष के मुताबिक, दस्तावेज अब भी चरणबद्ध तरीके से दिए जा रहे हैं, जिससे मुकदमे में देरी हो रही है।
आरोपियों ने कहा कि उन्हें उनके पदों से निलंबित कर आधे वेतन पर रखा गया है। बचाव पक्ष ने मुकदमे में तेजी लाने की मांग करते हुए आरोपियों के शीघ्र सुनवाई के संवैधानिक अधिकार का हवाला दिया। बचाव पक्ष की ओर से एक कथित ‘सर्वोच्च प्राधिकरण’ के निर्देश का भी उल्लेख किया गया, जिसमें आरोपियों को मुकदमे से बचाने और बहाल करने की बात कही गई। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने ऐसे किसी निर्देश की जानकारी होने से इनकार किया।
अदालत ने अभियोजन की ओर से दस्तावेजों के टुकड़ों में खुलासे पर आपत्ति दर्ज की। न्यायाधीश ने कहा कि पूर्ण खुलासा निष्पक्ष सुनवाई के लिए जरूरी है और इससे बचाव पक्ष को अपने मामले की तैयारी करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। अदालत ने सभी नौ आरोपियों की जमानत 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है। इसी दिन मामला फिर सुनवाई के लिए अदालत के सामने आएगा।
मामले में पूर्व महालेखाकार लॉरेंस सेमाकुला, जेनिफर मुहुरुजी, सिस्टम आईटी अधिकारी पॉल न्कालुबो लुमाला, कोषागार सेवा विभाग की वरिष्ठ लेखाकार डेबोरा डोरोथी कुसीमा, लेखाकार जूडिथ अशाबा, शोध सहायक बेट्टीना नायबारे, आईटी सिस्टम अधिकारी मार्क कासीकू, वरिष्ठ आईटी अधिकारी टोनी यावे और वित्त मंत्रालय के सहायक आयुक्त पेडिसन ट्वेसिगोम्वे आरोपी हैं।
अभियोजन के अनुसार, मामला सितंबर 2024 में किए गए दो सरकारी भुगतानों से जुड़ा है। इन भुगतानों की कुल रकम 1.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक थी, जो उस समय करीब ₹52 अरब के बराबर थी। आरोप है कि यह रकम अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं को भेजे जाने के बजाय विदेशी कंपनियों की ओर मोड़ दी गई।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि सरकारी एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली से तैयार इलेक्ट्रॉनिक भुगतान फाइलों में कथित तौर पर बदलाव किए गए। वास्तविक लाभार्थियों की जानकारी बदलकर विदेशी संस्थाओं के नाम दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष का दावा है कि सिस्टम में विशेष लिनक्स कार्यक्रम डाले गए, जिनका इस्तेमाल भुगतान संबंधी जानकारी बदलने के लिए किया गया।
जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि बैंक ऑफ युगांडा से संबंधित भुगतान और मिलान प्रक्रिया के ईमेल संदेशों में कथित छेड़छाड़ की गई। कुछ सर्वर लॉग हटाए जाने का भी दावा है, ताकि भुगतान फाइलों में किए गए बदलावों के डिजिटल सबूत मिटाए जा सकें। अभियोजन पक्ष मामले में फोरेंसिक और सूचना प्रौद्योगिकी ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की तैयारी में है।
एक अन्य मामले में विश्व बैंक को भेजी जाने वाली 66 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की रकम कथित तौर पर गलत दिशा में चली गई। ऋण की किस्त नहीं पहुंचने पर विश्व बैंक की शिकायत के बाद स्विफ्ट संदेश प्रणाली ने भुगतान रोक दिया।
अभियोजन का आरोप है कि बैंक ऑफ युगांडा की आंतरिक जांच में अनियमितताओं का संकेत मिलने के बावजूद सेमाकुला और मुहुरुजी ने पर्याप्त सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। जांचकर्ताओं के अनुसार, एमजेएस इंटरनेशनल को भेजी गई रकम में से 82 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक बरामद किए गए। हालांकि, रोडवे कंपनी लिमिटेड को कथित तौर पर भेजी गई 61 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की रकम और 3,91,720 अमेरिकी डॉलर की अन्य रकम अब भी बरामद नहीं हो सकी है।
मामले की शुरुआत में इसे बैंक ऑफ युगांडा पर साइबर हमले के तौर पर देखा गया था, लेकिन बाद की जांच में इसे बाहरी हैकिंग के बजाय सरकारी भुगतान प्रणाली के भीतर कथित हेरफेर बताया गया। आपराधिक जांच निदेशालय ने रक्षा खुफिया एवं सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर बैंक, वित्त मंत्रालय और महालेखाकार कार्यालय के कर्मचारियों से पूछताछ की। 2024 के अंत तक कम से कम 21 कर्मचारियों से पूछताछ और उनके मोबाइल फोन तथा लैपटॉप की फोरेंसिक जांच की गई थी।
जांचकर्ता ब्रिटेन और एशियाई देशों में भेजी गई रकम को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं। अभियोजन के मुताबिक, कथित ₹60 अरब की हेराफेरी में से आधे से अधिक रकम ब्रिटेन के बैंकों के साथ समन्वय के जरिए बरामद की जा चुकी है। हालांकि, एशियाई देशों में भेजी गई रकम की वसूली अब भी चुनौती बनी हुई है। जांच एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि विदेश भेजी गई कुछ रकम वापस युगांडा पहुंचाकर नकद या सामान के रूप में लाभार्थियों तक पहुंचाई गई हो।
