लखनऊ। पाकिस्तान से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। एजेंसी के अनुसार, आरोपी भारत के संवेदनशील स्थानों और रेलवे परिसरों की निगरानी के लिए सोलर ऊर्जा से चलने वाले जासूसी कैमरे लगाने, उनकी लाइव पहुंच पाकिस्तान में मौजूद संदिग्ध आतंकियों और संचालकों तक पहुंचाने तथा संवेदनशील सूचनाएं साझा करने की साजिश में शामिल थे। आरोपपत्र लखनऊ की विशेष आतंकवाद रोधी अदालत में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत दाखिल किया गया है।
यह मामला 14 मार्च 2026 को गाजियाबाद कमिश्नरेट के कौशांबी थाने में दर्ज प्राथमिकी से सामने आया था। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों और बाद में मिले साक्ष्यों के आधार पर मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई। जांच के दौरान एजेंसी ने कथित नेटवर्क की गतिविधियों, आरोपियों के आपसी संपर्क, संवेदनशील स्थानों पर लगाए गए उपकरणों और विदेश में बैठे संदिग्ध संचालकों के साथ संपर्क के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क का उद्देश्य केवल सामान्य निगरानी तक सीमित नहीं था। आरोपियों ने कथित तौर पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के लिए आपराधिक साजिश रची। इसके तहत संवेदनशील स्थानों की निगरानी, वहां की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग और संबंधित सूचनाओं को दुश्मन देश से जुड़े तत्वों तक पहुंचाने का काम किया गया।
सोलर कैमरों से संवेदनशील ठिकानों की निगरानी
एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने कुछ संवेदनशील स्थानों और रेलवे स्टेशनों में कथित रूप से अवैध तरीके से प्रवेश किया। इसके बाद वहां सोलर ऊर्जा से संचालित जासूसी कैमरे लगाए गए। इन कैमरों का उद्देश्य ऐसे स्थानों की लगातार निगरानी करना था, जहां सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियां होती हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने में भी जुटी है कि कितने स्थानों पर ऐसे उपकरण लगाए गए और उनके माध्यम से कितनी अवधि तक निगरानी की गई।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कैमरों से प्राप्त तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान में बैठे संदिग्ध संचालकों तक पहुंचाए जाते थे। आरोपियों ने संवेदनशील स्थानों की जियो-टैग वाली तस्वीरें, वीडियो और सटीक जीपीएस निर्देशांक साझा किए। इससे कथित तौर पर पाकिस्तान में बैठे लोगों को संबंधित स्थानों की वास्तविक स्थिति और भौगोलिक जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती थी।
भारतीय सिम कार्ड उपलब्ध कराने का आरोप
एनआईए ने आरोपपत्र में यह भी कहा है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों ने पाकिस्तान से जुड़े तत्वों को भारतीय सिम कार्ड हासिल करने और उनका इस्तेमाल करने में सहायता की। जांच एजेंसी इस पहलू की पड़ताल कर रही है कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल किन लोगों ने किया, उन्हें किस माध्यम से हासिल किया गया और उनसे किन नंबरों या डिजिटल खातों से संपर्क किया गया।
आरोपपत्र में नामित आरोपियों में प्रवीण, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि, ऋतिक गंगवार, समीर उर्फ शूटर, दुर्गेश निषाद, नौशाद, गगन कुमार, विवेक, शिवराज, मीरा ठाकुर और शेन इरम उर्फ महक के नाम शामिल हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार आरोपपत्र में 13 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
मामले में शामिल पांच नाबालिगों को लेकर भी जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। उनके संबंध में विस्तृत जांच रिपोर्ट 18 मई को गाजियाबाद के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष पहले ही पेश की जा चुकी है।
एनआईए अब आरोपियों के बीच संपर्क के नेटवर्क, डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक लेनदेन और कैमरों से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि संवेदनशील सूचनाएं पाकिस्तान में बैठे संदिग्ध संचालकों तक किस माध्यम से पहुंचाई जाती थीं और इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग सक्रिय थे।
एजेंसी के आरोपों के अनुसार, पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से संवेदनशील स्थानों की निगरानी और जानकारी बाहर भेजने के लिए बनाया गया था। हालांकि, आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।
