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Home»राष्ट्रीय»रेल से अग्नि मिसाइलों की तैनाती की तैयारी, डीआरडीओ और रेलवे ने शुरू किया महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
राष्ट्रीय

रेल से अग्नि मिसाइलों की तैनाती की तैयारी, डीआरडीओ और रेलवे ने शुरू किया महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 6, 2026No Comments4 Mins Read
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नए डिजाइन के रेल-कंटेनर कैप्सूल पर काम जारी; शुरुआती चरण में एक-दो प्रायोगिक वैगन तैयार किए जा रहे, सफल परीक्षण के बाद विशेष मिसाइल ट्रेनों को सेना में शामिल करने की योजना
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नई दिल्ली। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच भारत अपनी रणनीतिक और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रेलवे के मिलिट्री ट्रैफिक डायरेक्टरेट के बीच रेल-आधारित मिसाइल प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने को लेकर काम शुरू होने की जानकारी सामने आई है। प्रस्तावित व्यवस्था में विशेष रूप से तैयार रेल-कंटेनर कैप्सूल के जरिये अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों को देश के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से स्थानांतरित करने और जरूरत पड़ने पर वहीं से प्रक्षेपित करने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।
रेल मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, परियोजना के शुरुआती चरण में डीआरडीओ एक-दो प्रायोगिक और परीक्षण वैगन तैयार कर रहा है। इन वैगनों के परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के बाद प्रणाली को आगे बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा। सफल परीक्षण की स्थिति में एक से दो पूर्ण मिसाइल रेजिमेंट गठित किए जाने की संभावना है। इनमें लगभग छह से 12 विशेष मिसाइल ट्रेनें शामिल हो सकती हैं। दीर्घकालिक योजना के तहत रेल-आधारित प्रक्षेपण क्षमता के लिए 15 से 20 विशेष कैप्सूल का बड़ा बेड़ा तैयार करने की संभावना भी जताई गई है।
इस परियोजना की सबसे अहम विशेषता इसका कैनिस्टर आधारित डिजाइन बताया जा रहा है। प्रस्तावित रेल-कैप्सूल को बाहरी रूप से सामान्य मालगाड़ी के डिब्बे जैसा रखने का उद्देश्य इसकी पहचान को कम करना है। इससे निगरानी के दौरान किसी विशेष डिब्बे की वास्तविक भूमिका का पता लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मिसाइलों को सीलबंद कैनिस्टर में रखने से उनके लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण और संचालन की सुविधा भी मिल सकती है।
प्रस्तावित व्यवस्था में प्रक्षेपण के समय रेल वैगन के ऊपरी हिस्से को खोलकर मिसाइल को निर्धारित स्थिति में लाने की परिकल्पना की गई है। इसके बाद विशेष यांत्रिक व्यवस्था के जरिये वैगन को स्थिर किया जा सकता है। हालांकि इस प्रणाली की वास्तविक तकनीकी संरचना, परीक्षण प्रक्रिया और परिचालन क्षमताओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

रेल-आधारित मिसाइल प्रणाली का एक प्रमुख संभावित लाभ इसकी गतिशीलता है। मौजूदा समय में रेलवे का इस्तेमाल मुख्य रूप से रक्षा उपकरणों और मिसाइल प्रणालियों के घटकों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए मालगाड़ियों या विशेष वैगनों के माध्यम से किया जाता है। वहीं, रणनीतिक परमाणु प्रतिरोधक ढांचे में सड़क आधारित भारी वाहनों और ट्रेलरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रस्तावित रेल-लॉन्चर व्यवस्था परिवहन और प्रक्षेपण, दोनों क्षमताओं को एक ही मंच पर जोड़ने की दिशा में कदम हो सकती है।
भारत के लिए ऐसी प्रणाली का महत्व देश के विशाल रेल नेटवर्क के कारण भी बढ़ जाता है। लंबी दूरी तक भारी सैन्य प्रणालियों को तेजी से ले जाने के लिए रेलवे पहले से ही महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि रेल आधारित प्रक्षेपण प्रणाली सफलतापूर्वक विकसित और प्रमाणित होती है, तो रणनीतिक परिसंपत्तियों की तैनाती के विकल्प बढ़ सकते हैं और उनकी गतिशीलता में सुधार हो सकता है।
दुनिया में रेल-आधारित रणनीतिक मिसाइल प्रणालियों का प्रयोग पहले भी हो चुका है। शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ ने रेल आधारित अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली विकसित की थी। ऐसी प्रणालियों का उद्देश्य मिसाइलों को लगातार स्थान बदलने की क्षमता देकर उनकी पहचान और संभावित हमले को कठिन बनाना था। चीन ने भी मोबाइल मिसाइल प्रणालियों और सुरंग आधारित बुनियादी ढांचे के साथ अपनी रणनीतिक क्षमता का विस्तार किया है।
हालांकि भारत की प्रस्तावित प्रणाली को लेकर कई दावे अभी प्रारंभिक जानकारी और परियोजना से जुड़े सूत्रों पर आधारित हैं। इसकी वास्तविक क्षमता, मिसाइलों के प्रकार, संख्या, तैनाती का स्थान और परिचालन समयसीमा जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं हैं। इसलिए परियोजना के अंतिम स्वरूप का आकलन इसके परीक्षण और आधिकारिक स्वीकृति के बाद ही किया जा सकेगा।
यदि यह प्रणाली सफल होती है, तो यह भारत की रणनीतिक गतिशीलता और परमाणु प्रतिरोधक ढांचे में एक नया आयाम जोड़ सकती है। रेल नेटवर्क पर आधारित मोबाइल प्रक्षेपण क्षमता से सैन्य योजनाकारों को रणनीतिक परिसंपत्तियों की आवाजाही और तैनाती के लिए अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे। साथ ही, स्वदेशी कैनिस्टर तकनीक और आधुनिक रेल प्लेटफॉर्म का संयोजन भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी क्षमता को भी नई दिशा दे सकता है।
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