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धूम्रपान करने वालों के साथ दूसरों की भी जिंदगी खतरे में, भारत में 44.4 करोड़ लोग प्रभावित

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 9, 2026No Comments4 Mins Read
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पैसिव स्मोकिंग से 2023 में 3.25 लाख से अधिक मौतें; 1990 के मुकाबले मृतकों की संख्या करीब 50% बढ़ी, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा संवेदनशील
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नई दिल्ली। धूम्रपान का नुकसान केवल सिगरेट पीने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसके आसपास मौजूद लोग भी तंबाकू के धुएं में मौजूद जहरीले पदार्थों की चपेट में आते हैं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं। एक वैश्विक अध्ययन के मुताबिक, भारत में वर्ष 2023 के दौरान करीब 44.4 करोड़ लोग सेकंड-हैंड स्मोक यानी पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आए। इस दौरान 3,25,600 से अधिक लोगों की मौत पैसिव स्मोकिंग से जुड़ी रही। 1990 के मुकाबले 2023 में ऐसी मौतों में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अध्ययन के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आने वाले लोगों की संख्या चीन के बाद दुनिया में सबसे अधिक है। पिछले तीन दशकों में हालांकि आबादी के अनुपात में धुएं के संपर्क की दर में कमी आई है। वर्ष 1990 में भारत की आयु-मानकीकृत एक्सपोजर दर 43.2 प्रतिशत थी, जो 2023 में घटकर 30.6 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद जनसंख्या में वृद्धि के कारण प्रभावित लोगों की कुल संख्या 37.5 करोड़ से बढ़कर 44.4 करोड़ हो गई।

मौतों में महिलाओं और पुरुषों दोनों की हिस्सेदारी बढ़ी

पैसिव स्मोकिंग से होने वाली मौतों में भी तीन दशकों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्ष 1990 में इससे करीब 2,17,700 मौतें दर्ज की गई थीं, जबकि 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 3,25,600 से अधिक हो गया। महिलाओं में मौतों की संख्या 1,13,400 से बढ़कर 1,56,900 हो गई। वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 1,04,300 से बढ़कर 1,68,700 तक पहुंच गया।
इससे यह स्पष्ट होता है कि तंबाकू के धुएं का असर केवल सक्रिय धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं है। परिवार के सदस्य, सहकर्मी और सार्वजनिक या साझा स्थानों पर रहने वाले लोग भी लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने पर स्वास्थ्य जोखिम का सामना करते हैं।

9.28 करोड़ स्वस्थ जीवन-वर्षों का नुकसान

पैसिव स्मोकिंग से होने वाला नुकसान केवल मौतों के आंकड़े तक सीमित नहीं है। वर्ष 2023 में भारत में इसके कारण करीब 9.28 करोड़ स्वस्थ जीवन-वर्षों का नुकसान हुआ। इस आंकड़े में समय से पहले हुई मौतों के साथ बीमारी और विकलांगता के कारण खोए स्वस्थ वर्षों को शामिल किया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सेकंड-हैंड स्मोक का लंबे समय तक संपर्क शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम वाले लोगों के लिए इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

बच्चों के फेफड़ों पर ज्यादा असर

बच्चों को पैसिव स्मोकिंग से सबसे अधिक जोखिम वाले समूहों में माना जाता है। बचपन में फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए तंबाकू के धुएं के लगातार संपर्क में रहने से सांस संबंधी संक्रमण और अन्य फेफड़ों की समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
घर के अंदर धूम्रपान करना बच्चों के लिए विशेष रूप से नुकसानदायक माना जाता है। विशेषज्ञों ने धूम्रपान को साझा और बंद स्थानों से दूर रखने तथा परिवार के सदस्यों को इसके खतरों के प्रति जागरूक करने की जरूरत पर जोर दिया है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी धुएं का संपर्क चिंता का विषय है।

कई गंभीर बीमारियों से जुड़ा पैसिव स्मोकिंग

अध्ययन में सेकंड-हैंड स्मोकिंग को कई गंभीर बीमारियों से जोड़ा गया है। इनमें इस्केमिक हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, स्तन कैंसर, टाइप-2 मधुमेह और अस्थमा शामिल हैं।
बच्चों में बीमारी के बोझ का एक बड़ा हिस्सा सांस की निचली नली के संक्रमण से जुड़ा पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की आदत का प्रभाव उसके आसपास रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर लंबे समय तक पड़ सकता है।

दुनिया में 2.71 अरब लोग धुएं की चपेट में

वैश्विक स्तर पर वर्ष 2023 में करीब 2.71 अरब लोग सेकंड-हैंड स्मोक के संपर्क में आए। इसके कारण लगभग 16.6 लाख मौतें हुईं और करीब 4.48 करोड़ स्वस्थ जीवन-वर्षों का नुकसान हुआ। दुनिया की लगभग आधी प्रभावित आबादी चीन, भारत और इंडोनेशिया में रहती है। चीन में करीब 66.4 करोड़ लोग पैसिव स्मोकिंग के संपर्क में आए।
आंकड़े बताते हैं कि धूम्रपान नियंत्रण की चुनौती केवल सक्रिय धूम्रपान करने वालों की संख्या घटाने तक सीमित नहीं है। उन करोड़ों लोगों को तंबाकू के धुएं से बचाना भी जरूरी है, जो स्वयं धूम्रपान नहीं करते लेकिन दूसरों की आदत के कारण लगातार इसके संपर्क में आते हैं। सार्वजनिक जागरूकता, धूम्रपान-मुक्त साझा स्थान और घरों में धुएं से बचाव इस जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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