कानपुर। काकादेव स्थित एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी की शाखा में मिलावटी सोने को असली बताकर करीब ₹1.99 करोड़ का गोल्ड लोन कराने के मामले में नामजद स्वर्ण मूल्यांकनकर्ता को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कानपुर देहात क्षेत्र के रहने वाले आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। मामले में शाखा स्तर पर कथित मिलीभगत और सोने की गुणवत्ता की गलत रिपोर्ट के जरिए लोन स्वीकृत कराने के आरोपों की जांच की जा रही है।
मामला उस समय सामने आया जब कंपनी की फ्रॉड कंट्रोल यूनिट और गोल्ड ऑडिट टीम ने शाखा में गिरवी रखे आभूषणों की दोबारा जांच की। जांच में कई आभूषणों में सोने की शुद्धता बेहद कम पाई गई। कुछ मामलों में शुद्धता महज 8 से 15 फीसदी थी, जबकि कुछ अन्य आभूषणों में यह 60 से 70 फीसदी के बीच मिली। इसके बाद कंपनी स्तर पर किए गए ऑडिट के आधार पर शाखा में स्वीकृत किए गए गोल्ड लोन की प्रक्रिया और संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई।
शिकायत के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच काकादेव शाखा में कुल 16 ग्राहकों ने सोने के आभूषण गिरवी रखकर अलग-अलग गोल्ड लोन लिए थे। इन ग्राहकों से जुड़े 30 ऋण खातों में लगभग ₹1.99 करोड़ की राशि जारी की गई। लोन मंजूर करते समय गिरवी रखे गए आभूषणों की गुणवत्ता और शुद्धता का मूल्यांकन किया गया था। बाद में ऑडिट में सामने आए तथ्यों ने इन मूल्यांकन रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर दिए।
कंपनी के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक की ओर से काकादेव थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में शाखा प्रबंधक और स्वर्ण मूल्यांकनकर्ता को आरोपी बनाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि दोनों ने गिरवी रखे गए आभूषणों की वास्तविक गुणवत्ता की जानकारी होने के बावजूद उन्हें असली सोना बताकर स्वीकार किया। इसके बाद इन्हीं आभूषणों के आधार पर ग्राहकों के गोल्ड लोन स्वीकृत किए गए और कंपनी से करोड़ों रुपये की राशि जारी हुई।
पुलिस जांच में अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरवी रखे गए आभूषणों की वास्तविक गुणवत्ता का मूल्यांकन किस तरह किया गया था और कम शुद्धता वाले आभूषणों को लोन के लिए योग्य कैसे माना गया। जांच अधिकारी ऋण खातों, स्वर्ण मूल्यांकन से संबंधित दस्तावेजों, आभूषणों के रिकॉर्ड और लोन स्वीकृति प्रक्रिया से जुड़े अन्य अभिलेखों की पड़ताल कर रहे हैं।
मामले में गिरफ्तार किए गए स्वर्ण मूल्यांकनकर्ता की भूमिका को लेकर पुलिस ने उपलब्ध रिकॉर्ड और कंपनी की जांच रिपोर्ट के आधार पर पूछताछ की है। पुलिस यह भी देख रही है कि कथित तौर पर गलत मूल्यांकन के आधार पर कितने ऋण स्वीकृत हुए और इस प्रक्रिया में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
गोल्ड लोन में आभूषण की शुद्धता और वजन के आधार पर ऋण की राशि तय होती है। ऐसे में मूल्यांकन में जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज किए जाने की स्थिति में वित्तीय संस्था को सीधे आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसी वजह से कंपनी की आंतरिक जांच में सामने आई अनियमितताओं के बाद पुलिस कार्रवाई शुरू हुई।
जांच के दौरान यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जिन 16 ग्राहकों के नाम पर 30 ऋण खाते संचालित हुए, उनमें सभी मामलों में एक जैसी प्रक्रिया अपनाई गई थी या अलग-अलग तरीके से मूल्यांकन किया गया। पुलिस ऋण वितरण से लेकर आभूषणों की दोबारा जांच तक की पूरी प्रक्रिया का क्रमवार मिलान कर रही है।
फिलहाल मामले में स्वर्ण मूल्यांकनकर्ता की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि प्राथमिकी में नामजद शाखा स्तर के अन्य आरोपी की भूमिका की भी जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों और ऑडिट रिपोर्ट की विस्तृत पड़ताल के बाद ही कथित फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। कंपनी की ओर से कराए गए गोल्ड ऑडिट और फ्रॉड कंट्रोल जांच में सामने आए निष्कर्ष अब पुलिस विवेचना का अहम हिस्सा हैं।
