शामली। उत्तर प्रदेश के शामली जिले में फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पासऑन किए जाने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की जांच में शामली सेक्टर-1 और एसी-1 सर्किल से जुड़ी 11 फर्में बोगस पाई गई हैं। विभाग के अनुसार, इन फर्मों के जरिए करीब ₹27 करोड़ की संदिग्ध आईटीसी का खेल सामने आया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इन सभी फर्मों का जीएसटी पंजीयन निरस्त कर दिया गया है और संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
विभागीय जांच में तीन फर्मों के मामलों में ही ₹11 करोड़ 80 लाख 45 हजार 372 की फर्जी आईटीसी पासऑन किए जाने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा अन्य बोगस फर्मों से जुड़े मामलों में करीब ₹15 करोड़ 19 लाख 59 हजार 298 की देनदारी सामने आई है। विभाग अब इन मामलों में फर्जी बिलिंग, आईटीसी के दावों और लेनदेन की पूरी कड़ी की जांच कर रहा है।
शामली में 12 हजार से अधिक कारोबारियों का जीएसटी पंजीयन है। चारों खंडों में पंजीकृत कारोबारियों के मासिक और त्रैमासिक रिटर्न की जांच के दौरान कुछ फर्मों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। इसके बाद राज्य कर विभाग ने इन फर्मों का भौतिक सत्यापन कराया। जांच के दौरान कई जगह पंजीकृत पते पर कारोबार संचालित नहीं मिला। कुछ मामलों में कारोबारी मौके पर मौजूद नहीं थे, जबकि कुछ स्थानों पर कार्यालय तक नहीं मिला। कई जगह फर्म का बोर्ड भी नहीं लगा था।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जीएसटी रिटर्न और आईटीसी के आंकड़ों में अंतर मिलने के बाद संदिग्ध फर्मों को चिन्हित किया गया था। भौतिक सत्यापन में दस्तावेजों और वास्तविक कारोबार के बीच अंतर सामने आने पर उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
जांच रिपोर्ट में तीन प्रमुख फर्मों से जुड़े आईटीसी लेनदेन का भी उल्लेख किया गया है। एमएस राधे कृष्णा एंटरप्राइजेज के मामले में वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान ₹1 करोड़ 20 लाख 82 हजार 613 की आईटीसी संदिग्ध पाई गई। एमएस क्रिस्टल एजेंसीज के मामले में वर्ष 2020-21 में ₹5 करोड़ 17 लाख 33 हजार 718 और एमएस आरएस एंटरप्राइजेज के मामले में वर्ष 2022-23 तथा 2023-24 के दौरान ₹5 करोड़ 42 लाख 29 हजार 41 की आईटीसी पासऑन किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
एसी-1 शामली की जांच में अन्य फर्मों से जुड़ी भी बड़ी देनदारी सामने आई है। इनमें सिंह एंटरप्राइजेज पर ₹2.27 करोड़, श्री बालाजी ट्रेडर्स पर ₹3.40 करोड़, वर्णित एंटरप्राइजेज पर ₹1.22 करोड़, हरि ओम एंटरप्राइजेज पर ₹1.07 करोड़, एसके कॉन्ट्रैक्टर जेवी पर ₹92.85 लाख, स्टार एंटरप्राइजेज पर ₹1.28 करोड़, वीआर ट्रेडर्स पर ₹1.82 करोड़ और आर ट्रेडर्स पर ₹3.18 करोड़ की मांग निर्धारित की गई है।
जांच में फर्जी फर्मों के गठन के तरीके की भी जानकारी सामने आई है। विभाग के अनुसार, कथित तौर पर लोगों के पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों का विवरण हासिल कर उनके नाम पर फर्मों का पंजीयन कराया गया। इसके बाद बैंक खाते खुलवाकर कागजी कारोबार और फर्जी बिलिंग के जरिए लेनदेन दिखाए जाने का आरोप है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस स्तर पर और किन लोगों ने किया।
जांच के दौरान नेटवर्क के दूसरे राज्यों तक फैले होने के संकेत भी मिले हैं। विभाग के अनुसार, कथित लेनदेन के तार हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और बिहार से जुड़े मिले हैं। इन राज्यों में कन्फेक्शनरी, फल और अन्य कारोबार के नाम पर बिलिंग और लेनदेन की जांच की जा रही है।
विभाग ने 11 फर्मों का पंजीयन निरस्त करने के साथ 50 से अधिक अन्य संदिग्ध फर्मों को भी जांच के दायरे में रखा है। अधिकारियों के अनुसार, रिटर्न, आईटीसी दावों, बैंक खातों और वास्तविक कारोबार का मिलान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
