Close Menu
Bharat Speaks
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
What's Hot

बाल यौन शोषण सामग्री मिलने पर भारत में सीधे अधिकारियों को रिपोर्ट करेगा गूगल

September 22, 2026

गिरफ्तारी का आधार न बताने पर दोबारा गिरफ्तारी आसान नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तय की कड़ी प्रक्रिया

September 22, 2026

टेस्ला पर अश्वेत कर्मचारियों से भेदभाव के आरोपों की बड़ी सुनवाई शुरू, कंपनी को करोड़ों डॉलर के हर्जाने का खतरा

September 21, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) Instagram
Bharat Speaks
Subscribe
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
Bharat Speaks
Home»Policy Watch»गिरफ्तारी का आधार न बताने पर दोबारा गिरफ्तारी आसान नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तय की कड़ी प्रक्रिया
Policy Watch

गिरफ्तारी का आधार न बताने पर दोबारा गिरफ्तारी आसान नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तय की कड़ी प्रक्रिया

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 22, 2026No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter LinkedIn Telegram WhatsApp Email
अनुच्छेद 22(1) के उल्लंघन पर पहली गिरफ्तारी रद्द होने के बाद मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी अनिवार्य; लिखित आधार बताना होगा और चूक करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच होगी
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति की पहली गिरफ्तारी संविधान के अनुच्छेद 22(1) का पालन न करने के कारण गैरकानूनी घोषित कर उसे रिहा किया जाता है, तो पुलिस उसे अपनी मर्जी से सीधे दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकती। ऐसी स्थिति में दोबारा गिरफ्तारी के लिए संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। अदालत ने इसके साथ ही पहली गिरफ्तारी में संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी तय की है।
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल चंदुरकर की पीठ ने कहा कि एक बार अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन हो जाने के बाद दोबारा गिरफ्तारी की शक्ति उसी अधिकारी के विवेक पर नहीं छोड़ी जा सकती, जिसने पहली गिरफ्तारी में संवैधानिक प्रावधान का पालन नहीं किया था। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में दोबारा गिरफ्तारी की प्रक्रिया न्यायिक निगरानी के तहत होनी चाहिए, ताकि संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की पुनरावृत्ति न हो।
1. मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी: पहली गिरफ्तारी अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन कर गैरकानूनी ठहराए जाने के बाद पुलिस आरोपी को सीधे दोबारा गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। इसके लिए संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति लेनी होगी। दोबारा गिरफ्तारी की अनुमति तभी दी जाएगी, जब मजिस्ट्रेट संबंधित परिस्थितियों और गिरफ्तारी की जरूरत को लेकर उचित कारणों से संतुष्ट हो।
अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट को दोबारा गिरफ्तारी की अर्जी पर जल्द फैसला लेना चाहिए। यदि मजिस्ट्रेट को यह संतोष हो जाता है कि पहली गिरफ्तारी के समय उचित कारणों से गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए जा सके थे और बाद में आरोपी को वे आधार लिखित रूप में उपलब्ध करा दिए गए हैं, साथ ही दोबारा गिरफ्तारी वास्तव में आवश्यक है, तभी अनुमति दी जा सकती है।
2. लिखित आधार और वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी: दोबारा गिरफ्तारी की अर्जी से पहले आरोपी को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में बताने होंगे। अर्जी में पहली गिरफ्तारी के दौरान कारण न बताए जाने की वजह भी स्पष्ट करनी होगी और तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी। यानी पुलिस को यह बताना होगा कि पहली बार गिरफ्तारी के समय संवैधानिक आवश्यकता का पालन क्यों नहीं किया गया और अब दोबारा गिरफ्तारी की जरूरत किन परिस्थितियों में पैदा हुई है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 22(1) का अधिकार किसी एक विशेष आपराधिक कानून तक सीमित नहीं है। गिरफ्तारी चाहे सामान्य कानून के तहत हो या किसी विशेष कानून के तहत, गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी देने का संवैधानिक अधिकार बना रहता है। इसके उल्लंघन के लिए आरोपी को यह साबित करने की जरूरत नहीं होगी कि उसे अलग से कोई नुकसान या पूर्वाग्रह हुआ है, क्योंकि यह मौलिक अधिकार से जुड़ा मामला है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

3. दोषी अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई: पहली गिरफ्तारी में संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू होगी। जांच में दोष साबित होने पर विभागीय कार्रवाई के साथ सर्विस बुक में प्रतिकूल प्रविष्टि भी की जा सकती है। अदालत ने प्रशासनिक स्तर पर भी निर्देश दिया कि ऐसे मामले में आरोपी की दोबारा हिरासत की मंजूरी मांगने वाली अर्जी वरिष्ठ अधिकारी के सामने आने पर जांच किसी दूसरे अधिकारी को सौंपने की व्यवस्था की जाए।
पीठ ने कहा कि जिस अधिकारी की कार्रवाई के कारण पहली गिरफ्तारी अनुच्छेद 22(1) के उल्लंघन के चलते रद्द हुई, उसी अधिकारी को दोबारा गिरफ्तारी का फैसला करने की पूरी स्वतंत्रता देना उचित नहीं होगा। इसलिए न्यायिक अनुमति और वरिष्ठ स्तर की निगरानी दोनों जरूरी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में तय सिद्धांतों को विस्तार देते हुए कहा कि इन अतिरिक्त प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का उद्देश्य दोबारा गिरफ्तारी की शक्ति के संभावित दुरुपयोग को रोकना है। अदालत ने यह भी साफ किया कि ऐसी रिहाई को सामान्य जमानत पर रिहाई नहीं माना जाएगा। फैसला गिरफ्तारी के समय कारण बताए जाने के संवैधानिक दायित्व और पुलिस की जवाबदेही को और स्पष्ट करता है।
📲 Join Our WhatsApp Channel
Algoritha Registration
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
Previous Articleटेस्ला पर अश्वेत कर्मचारियों से भेदभाव के आरोपों की बड़ी सुनवाई शुरू, कंपनी को करोड़ों डॉलर के हर्जाने का खतरा
Next Article बाल यौन शोषण सामग्री मिलने पर भारत में सीधे अधिकारियों को रिपोर्ट करेगा गूगल
Team Bharat Speaks
  • Website

Related Posts

बाल यौन शोषण सामग्री मिलने पर भारत में सीधे अधिकारियों को रिपोर्ट करेगा गूगल

September 22, 2026

टेस्ला पर अश्वेत कर्मचारियों से भेदभाव के आरोपों की बड़ी सुनवाई शुरू, कंपनी को करोड़ों डॉलर के हर्जाने का खतरा

September 21, 2026

₹1,432 करोड़ के बिहार टेंडर पर घमासान, तीन बार बदली शर्तें; छोटे उद्यमियों के बाहर होने का आरोप

September 21, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Subscribe to Updates

Get the latest sports news from SportsSite about soccer, football and tennis.

Welcome to BharatSpeaks.com, where our mission is to keep you informed about the stories that matter the most. At the heart of our platform is a commitment to delivering verified, unbiased news from across India and beyond.

We're social. Connect with us:

Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
Top Insights
Get Informed

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 Bharat Speaks.
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.