चंदौली। बच्चों की तस्करी रोकने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन आहट’ के तहत आरपीएफ, सीआईबी और एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन की संयुक्त टीम ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर कामाख्या-गांधीधाम एक्सप्रेस से नौ नाबालिगों को बरामद किया। बच्चों को कथित तौर पर बाल श्रम के लिए गुजरात और लखनऊ ले जाया जा रहा था। टीम ने बच्चों के साथ यात्रा कर रहे तीन युवकों को मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया है।
कार्रवाई कामाख्या से गांधीधाम जाने वाली ट्रेन संख्या 15668 के जनरल कोच में की गई। जांच के दौरान टीम को नौ नाबालिगों के साथ तीन युवक मिले। पूछताछ में बच्चों से मिली जानकारी के आधार पर युवकों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। नाबालिगों ने पकड़े गए युवकों की पहचान ‘मुंशी’ के तौर पर की।
जांच में सामने आया कि बच्चों को उनके परिवारों से कथित तौर पर ₹1,500 से ₹3,000 तक एडवांस रकम दिलाकर दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था। आरोप है कि बच्चों को गुजरात और लखनऊ में काम कराने की योजना थी। टीम ने बच्चों को सुरक्षित तरीके से ट्रेन से उतारने के बाद उनके संबंध में जरूरी जानकारी जुटाई।
बरामद किए गए नौ बच्चों में तीन असम के उदालगुड़ी जिले के रहने वाले हैं। इनमें 13, 15 और 16 वर्ष के किशोर शामिल हैं। तीन अन्य बच्चे बिहार के अररिया जिले के हैं, जिनकी उम्र 13, 15 और 15 वर्ष बताई गई है। इसके अलावा असम के बोंगाईगांव जिले के तीन किशोर भी टीम को मिले। उनकी उम्र 15, 15 और 16 वर्ष बताई गई है।
पूछताछ में बच्चों और आरोपियों से उनके यात्रा मार्ग, परिवारों से संपर्क और मजदूरी के लिए ले जाए जाने की योजना से जुड़ी जानकारी ली गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बच्चों को किसके निर्देश पर ले जाया जा रहा था और उन्हें गुजरात तथा लखनऊ में किन लोगों के पास पहुंचाया जाना था।
तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब कथित मानव तस्करी नेटवर्क की अन्य कड़ियों की पड़ताल कर रही है। इसमें बच्चों के परिवारों से संपर्क कराने वाले लोगों, एडवांस रकम के लेन-देन और बच्चों को काम पर रखने वाले संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, बच्चों को बाल संरक्षण प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा गया है। उनके संबंध में जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जांच एजेंसियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि क्या गिरफ्तार किए गए तीन युवकों के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था और इससे पहले भी इसी तरीके से अन्य बच्चों को दूसरे राज्यों में ले जाया गया है या नहीं।
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में बच्चों की तस्करी रोकने के लिए ‘ऑपरेशन आहट’ के तहत निगरानी बढ़ाई गई है। इसी अभियान के दौरान डीडीयू जंक्शन पर की गई इस कार्रवाई में नौ नाबालिगों को संभावित बाल श्रम से बचाया गया। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
