रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में सीआईडी ने बोकारो के दुग्धा निवासी रितेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, रितेश को मामले का मुख्य सेटर माना जा रहा है और वह बीते एक महीने से फरार था। वह आईसीएन कंपनी के निदेशक मिथिलेश कुमार सिंह का करीबी रिश्तेदार बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को रितेश को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
सीआईडी की जांच में आरोप सामने आया है कि रितेश ने करीब 30 सफल अभ्यर्थियों की परीक्षा में कथित तौर पर सेटिंग कराई थी। वह अभ्यर्थियों को बोकारो, झरिया और अन्य स्थानों पर ले जाता था, जहां उन्हें परीक्षा से जुड़े प्रश्नों के उत्तर रटवाए जाते थे। जांच एजेंसी ने पूछताछ के दौरान रितेश से पूरे मामले में उसकी कथित भूमिका को लेकर जानकारी जुटाई।
सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ में सामने आया नाम
सीआईडी इससे पहले दीपक कुमार सिंह और उमेश राय समेत आठ सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ कर चुकी है। इन पूछताछ के दौरान रितेश कुमार सिंह का नाम प्रमुखता से सामने आया था। इसके बाद से जांच एजेंसी उसकी तलाश कर रही थी।
जांच में सीआईडी को रितेश सिंह, सफल अभ्यर्थियों और आईसीएन के निदेशक मिथिलेश कुमार सिंह के बीच कथित वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य भी मिले हैं। एजेंसी अब इन लेनदेन की पूरी कड़ी की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी के लिए किस स्तर पर रकम का लेनदेन हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
सीआईडी के अनुसार, पूछताछ में रितेश ने मामले में अपनी कथित संलिप्तता स्वीकार की है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में सुनवाई और आगे की जांच के बाद ही होगी।
मिथिलेश सिंह की तलाश जारी
रितेश की गिरफ्तारी के बाद सीआईडी अब आईसीएन के निदेशक मिथिलेश कुमार सिंह की तलाश कर रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, वह फिलहाल फरार है। पूछताछ में आईसीएन के अन्य निदेशक सोमांश प्रकाश और उनके करीबी राहुल कुमार ने भी कथित तौर पर मिथिलेश सिंह की भूमिका के बारे में जानकारी दी है।
सीआईडी का फोकस अब परीक्षा में अभ्यर्थियों की कथित सेटिंग, प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराने और संबंधित लोगों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने पर है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि 30 अभ्यर्थियों के अलावा इस नेटवर्क से और कितने परीक्षार्थी जुड़े थे।
जेपीएससी मामले में 36 अभ्यर्थियों से संपर्क का आरोप
इसी अखबार की कटिंग में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में कथित धांधली से जुड़ी अलग कार्रवाई का भी उल्लेख है। इस मामले में टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह पर 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) में शामिल कम से कम 36 अभ्यर्थियों के संपर्क में रहने का आरोप है। सीआईडी ने अदालत में कथित नेटवर्क, ओएमआर शीट में हेरफेर और अवैध वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्य पेश किए हैं।
जांच के अनुसार, 36 अभ्यर्थियों के साथ रामबीर सिंह के संपर्क का खुलासा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के आधार पर हुआ। आरोप है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल कराने के लिए ओएमआर शीट में खाली छोड़े गए गोलों को भरने और उत्तर पुस्तिकाओं में कथित फेरबदल में उसकी अहम भूमिका थी।
फर्जी अभ्यर्थी बन परीक्षा देने का भी आरोप
जांच में कंपनी के एकाउंटेंट रक्षक सिंह की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि रामबीर सिंह के कहने पर रक्षक सिंह ने फर्जी अभ्यर्थी बनकर जेपीएससी एफआरओ की परीक्षा दी थी। जांच एजेंसी के अनुसार, उसने ओएमआर शीट खाली छोड़ने के बावजूद परीक्षा में सफलता हासिल की।
सीआईडी ने रामबीर सिंह की पत्नी मीनू सिंह और अन्य करीबी लोगों के बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन का भी पता लगाया है। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के परिवार के लिए हवाई टिकट बुक कराए गए थे। एजेंसी इन लेनदेन और कथित परीक्षा अनियमितताओं के बीच संबंध की जांच कर रही है।
