लक्समबर्ग। यूरोप में सीमा पार स्मार्टफोन कारोबार के जरिए करीब ₹1,140 करोड़ के कथित वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) घोटाले का मामला सामने आया है। यूरोपीय लोक अभियोजक कार्यालय (EPPO) की जांच में इस मामले में साइप्रस, जर्मनी और इटली से पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी को संदेह है कि एक संगठित गिरोह ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच सीमा पार व्यापार से जुड़े कर नियमों का दुरुपयोग कर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की।
इस कथित घोटाले से स्वीडन को लगभग ₹800 करोड़ और जर्मनी को करीब ₹340 करोड़ का राजस्व नुकसान होने का अनुमान है। कार्रवाई के दौरान साइप्रस, ग्रीस और इटली में 12 ठिकानों पर तलाशी ली गई तथा बैंक खातों, कारों और अचल संपत्तियों सहित करीब ₹80 लाख तक की संपत्तियां फ्रीज या जब्त की गईं।
साइप्रस, जर्मनी और इटली में पांच संदिग्ध गिरफ्तार
यूरोपीय लोक अभियोजक कार्यालय के म्यूनिख स्थित कार्यालय के अनुरोध पर इस सप्ताह पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से तीन को साइप्रस, एक को जर्मनी और एक को इटली से पकड़ा गया। यह कार्रवाई ‘मिडास’ नाम से चल रही जांच से जुड़े कथित अंतरराष्ट्रीय वैट घोटाले के सिलसिले में की गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार संदिग्धों पर कथित कर धोखाधड़ी की योजना तैयार करने और उसे नियंत्रित करने में भूमिका निभाने का संदेह है। कार्रवाई के दौरान संबंधित देशों की विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों ने जांचकर्ताओं को सहयोग दिया। साइप्रस, ग्रीस और इटली में संदिग्धों तथा जांच के दायरे में आई कंपनियों से जुड़े 12 परिसरों की तलाशी ली गई।
जांच का उद्देश्य कथित घोटाले के पूरे नेटवर्क का पता लगाना, कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की कड़ियां जोड़ना और यह निर्धारित करना है कि कर चोरी से हासिल धन कहां भेजा गया। फिलहाल, गिरफ्तार लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के तहत जांच की जाएगी।
स्मार्टफोन कारोबार को बनाया कथित टैक्स चोरी का जरिया
जांचकर्ताओं को संदेह है कि कथित आपराधिक संगठन ने यूरोपीय संघ के देशों के बीच होने वाले सीमा पार व्यापार की व्यवस्था का फायदा उठाकर वैट चोरी की। इस तरह की धोखाधड़ी को आम तौर पर ‘वैट कैरोसेल फ्रॉड’ कहा जाता है। इसमें कई कंपनियों के माध्यम से वस्तुओं की खरीद-बिक्री दिखाई जाती है और अलग-अलग देशों की कर व्यवस्था के बीच मौजूद प्रक्रियागत अंतर का दुरुपयोग किया जाता है।
इस मामले में स्मार्टफोन की खरीद-बिक्री के लिए जर्मनी, अल्बानिया और स्वीडन में स्थित कंपनियों तथा कथित तौर पर टैक्स भुगतान से बचने वाले कारोबारियों का इस्तेमाल किए जाने का संदेह है। यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच पात्र सीमा पार लेनदेन पर वैट में छूट संबंधी नियमों का कथित दुरुपयोग कर पूरे नेटवर्क को संचालित किए जाने की आशंका है।
ऐसी योजनाओं में माल का वास्तविक या कागजी लेनदेन कई कंपनियों के माध्यम से दिखाया जा सकता है। कुछ कारोबारी बिक्री पर कर वसूलने के बावजूद उसे सरकारी खजाने में जमा नहीं करते, जबकि संबंधित कंपनियां कर वापसी या अन्य कर लाभ लेने का प्रयास कर सकती हैं। हालांकि, इस मामले में इस्तेमाल किए गए प्रत्येक तरीके और संबंधित कंपनियों की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
स्वीडन और जर्मनी को हुआ भारी राजस्व नुकसान
जांच एजेंसी के अनुमान के मुताबिक, कथित घोटाले से स्वीडन को लगभग €80 मिलियन यानी करीब ₹800 करोड़ का टैक्स नुकसान हुआ। वहीं, जर्मनी को €34 मिलियन यानी लगभग ₹340 करोड़ के राजस्व नुकसान का अनुमान है। दोनों देशों को मिलाकर कुल नुकसान €114 मिलियन, अर्थात करीब ₹1,140 करोड़ बताया गया है।
यह राशि कर राजस्व के अनुमानित नुकसान को दर्शाती है। इसे गिरफ्तार आरोपियों से बरामद रकम या जब्त संपत्तियों के मूल्य के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। जांच एजेंसी अभी कथित वित्तीय लेनदेन, कंपनियों की भूमिका और कर चोरी से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
तीन देशों में छापेमारी, संपत्तियां फ्रीज
कार्रवाई के दौरान साइप्रस, ग्रीस और इटली में संदिग्धों तथा संबंधित कंपनियों के परिसरों की तलाशी ली गई। जांच के तहत बैंक खातों में मौजूद धनराशि को फ्रीज करने के साथ कारों और अचल संपत्तियों को भी जब्त किया गया। फ्रीज या जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य €80,000 तक, यानी लगभग ₹80 लाख बताया गया है।
इस कार्रवाई में साइप्रस, जर्मनी, ग्रीस और इटली के राष्ट्रीय अधिकारियों ने सहयोग किया। जांच में कर विभागों, पुलिस, वित्तीय खुफिया इकाइयों और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। विभिन्न देशों के बीच समन्वय का उद्देश्य संदिग्ध लेनदेन, कंपनियों के रिकॉर्ड और संपत्तियों से संबंधित जानकारी जुटाना है।
अंतरराष्ट्रीय जांच जारी, आरोपियों को दोषी साबित होना बाकी
यूरोपीय लोक अभियोजक कार्यालय यूरोपीय संघ के वित्तीय हितों को प्रभावित करने वाले अपराधों की जांच और अभियोजन के लिए जिम्मेदार स्वतंत्र निकाय है। इस मामले में एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित घोटाले में कितनी कंपनियां शामिल थीं, संदिग्धों ने किस तरह लेनदेन को अंजाम दिया और सरकारी राजस्व को हुए नुकसान की भरपाई की कितनी संभावना है।
फिलहाल, पांचों संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि संबंधित व्यक्तियों को सक्षम जर्मन अदालत में दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाएगा। ₹1,140 करोड़ के अनुमानित टैक्स नुकसान वाले इस मामले में आगे की जांच से कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेनदेन के बारे में अतिरिक्त जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
