मुंबई। ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल फोन पर तेज आवाज में वीडियो देखने, संगीत चलाने या स्पीकर मोड पर बातचीत करने से दूसरे यात्रियों को परेशानी हो सकती है। इसी समस्या को रोकने के लिए भारतीय रेलवे के विभिन्न जोन यात्रियों को जागरूक करने और सार्वजनिक स्थानों पर मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। दक्षिणी रेलवे ने 6 अक्टूबर को इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया है। इसमें यात्रियों को ट्रेनों और रेलवे परिसरों में तेज आवाज में मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से बचने की हिदायत दी गई है। हालांकि, ₹1,000 तक के जुर्माने और छह महीने तक की जेल के दावे के साथ लागू होने वाले कानूनी प्रावधानों की सटीक स्थिति को समझना भी जरूरी है।
ट्रेनों में तेज आवाज पर रोक लगाने की तैयारी
रेलवे का उद्देश्य ट्रेन के डिब्बों और स्टेशनों पर ऐसा माहौल बनाए रखना है, जिसमें यात्रियों को अनावश्यक शोर का सामना न करना पड़े। इसके लिए रेलवे जोन सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणालियों के माध्यम से यात्रियों को जागरूक करेंगे। उन्हें मोबाइल फोन पर तेज आवाज में संगीत या वीडियो चलाने से बचने और दूसरों की सुविधा का ध्यान रखने के लिए कहा जाएगा।
दक्षिणी रेलवे के परिपत्र में स्पीकर मोड पर संगीत और वीडियो चलाने से होने वाली परेशानी का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा तेज आवाज में बातचीत करने से दूसरे यात्रियों को होने वाली असुविधा को भी गंभीरता से लेने की बात कही गई है। रेलवे का जोर केवल निर्देश जारी करने पर नहीं, बल्कि यात्रियों के व्यवहार में बदलाव लाने पर भी है।
उत्तरी रेलवे और पश्चिमी रेलवे ने भी ट्रेनों में मोबाइल फोन के अनुचित इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं को रोकने के लिए कदम उठाने का फैसला किया है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यात्रियों को हेडफोन का इस्तेमाल करने और सार्वजनिक स्थानों पर आवाज सीमित रखने के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
शिकायतों के बाद बढ़ी चिंता
ट्रेनों में मोबाइल फोन से तेज आवाज में वीडियो और संगीत चलाने की समस्या को लेकर रेलवे को रेल मदद शिकायत निवारण प्रणाली के माध्यम से कई शिकायतें मिली हैं। यात्रियों ने विशेष रूप से वातानुकूलित डिब्बों में सहयात्रियों द्वारा तेज आवाज में संगीत चलाने की शिकायत की है। ऐसी स्थिति में आराम करने, पढ़ने या सोने की कोशिश कर रहे यात्रियों को परेशानी होती है।
मोबाइल इंटरनेट की बढ़ती पहुंच और वीडियो सामग्री के व्यापक इस्तेमाल के साथ यह समस्या अधिक दिखाई देने लगी है। कई यात्री मोबाइल फोन पर वीडियो देखते समय उसकी आवाज कम नहीं करते या हेडफोन का इस्तेमाल नहीं करते। इससे आसपास बैठे यात्रियों को भी अनचाहे शोर का सामना करना पड़ता है।
रेलवे का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट निर्देश और नियमित जागरूकता अभियान इस समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। विशेष रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा और आपसी सहयोग बनाए रखने के लिए ऐसे कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
जुर्माने और जेल के दावे पर क्या ध्यान दें?
दक्षिणी रेलवे के परिपत्र से संबंधित जानकारी में नियमों के उल्लंघन पर ₹1,000 तक के जुर्माने और छह महीने तक की कैद का उल्लेख किया गया है। हालांकि, केवल परिपत्र जारी होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि मोबाइल पर तेज आवाज में वीडियो चलाने के हर मामले में यही सजा स्वतः लागू होगी। कार्रवाई संबंधित कानून, लागू प्रावधानों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर तय होगी।
रेलवे अधिकारियों ने संबंधित कानूनी प्रावधानों में संशोधन किए जाने की बात कही है। ऐसे में यात्रियों के लिए जरूरी है कि वे निर्देशों का पालन करें और किसी भी दंडात्मक कार्रवाई के बारे में जानकारी लेते समय संबंधित नियम की कानूनी स्थिति भी समझें।
नियम लागू कराने में क्या होंगी चुनौतियां?
पश्चिमी रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हालिया बदलावों के बाद मोबाइल फोन से जुड़ी शिकायतों पर अधिक सख्ती से कार्रवाई करने की गुंजाइश बनी है। इसके बावजूद नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करना आसान नहीं होगा।
नागपुर स्थित रेलवे यात्री संघ के प्रतिनिधि बसंत कुमार शुक्ला ने चिंता जताई है कि केवल परिपत्र जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने रेलवे सुरक्षा बल के जवानों और ट्रेन टिकट परीक्षकों की कमी की ओर ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, कर्मचारियों की कमी के कारण अनधिकृत प्रवेश, बर्थ पर कब्जा और स्वच्छता जैसी समस्याओं से जुड़ी शिकायतों पर भी प्रभावी कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
रेलवे के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर यात्रियों को मोबाइल फोन के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए जागरूक करना है, वहीं दूसरी ओर शिकायत मिलने पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी है। यात्रियों से अपेक्षा है कि वे वीडियो और संगीत सुनते समय हेडफोन का इस्तेमाल करें, फोन की आवाज सीमित रखें और दूसरे यात्रियों की सुविधा का सम्मान करें।
