मुंबई। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कथित नियामकीय उल्लंघनों के मामले में ब्लिंकिट के भिवंडी स्थित वेयरहाउस का खाद्य कारोबार लाइसेंस निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई ₹32.71 लाख से अधिक मूल्य के एक्सपायरी, क्षतिग्रस्त और अस्वीकृत खाद्य उत्पादों के निपटान में अनियमितताओं के आरोपों के बाद की गई। विभाग की शिकायत पर कंपनी के प्रमुख अधिकारियों, वेयरहाउस प्रबंधन और स्क्रैप निपटान से जुड़े कई विक्रेताओं के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।
FDA के मुताबिक, 21 अक्टूबर को किए गए निरीक्षण में करीब 18,405 ऐसे खाद्य उत्पादों का पूरा हिसाब और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सका, जिन्हें एक्सपायरी, क्षतिग्रस्त या अस्वीकृत होने के कारण बिक्री के लिए अनुपयुक्त श्रेणी में रखा गया था। जांच के दौरान इन उत्पादों की आपूर्ति शृंखला में आवाजाही का पूरा रिकॉर्ड यानी एंड-टू-एंड ट्रेसबिलिटी और उन्हें नियमानुसार नष्ट किए जाने का प्रमाण भी नहीं मिला।
विभाग ने आशंका जताई कि बिक्री के लिए अनुपयुक्त घोषित किए गए उत्पादों का हिसाब नहीं मिलने से उन्हें दोबारा बाजार में भेजे जाने का जोखिम पैदा हो सकता है। इससे उपभोक्ताओं की सेहत को खतरा पहुंचने की आशंका थी। इसी आधार पर FDA ने संबंधित परिसर में लाइसेंस के तहत संचालित गतिविधियों को तत्काल रोकने का आदेश दिया।
कंपनी के अधिकारियों और विक्रेताओं पर प्राथमिकी
लाइसेंस निलंबित करने के बाद FDA ने भिवंडी तालुका पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया। प्राथमिकी में ब्लिंकिट का संचालन करने वाली कंपनी ब्लिंक कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के एक पूर्णकालिक निदेशक, वेयरहाउस से जुड़े प्रबंधकों और स्क्रैप निपटान में शामिल कई विक्रेताओं को आरोपी बनाया गया है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित विभिन्न धाराओं के साथ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 59(1) के तहत कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि एक्सपायरी खाद्य उत्पादों को नष्ट करने के बजाय आर्थिक लाभ के लिए दोबारा बेचने की कथित साजिश रची गई हो सकती है।
हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ आरोप साबित होना नहीं है। मामले की जांच जारी है और आरोपियों की भूमिका का निर्धारण जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगा।
एक्सपायरी खाद्य उत्पादों की दोबारा बिक्री पर निगरानी
भिवंडी वेयरहाउस पर हुई कार्रवाई महाराष्ट्र FDA की व्यापक जांच और प्रवर्तन अभियान का हिस्सा है। विभाग राज्य में गोदामों, डार्क स्टोर्स और कचरा या स्क्रैप निपटान से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रहा है। संदेह है कि बिक्री के लिए अनुपयुक्त घोषित किए गए खाद्य उत्पादों को नष्ट करने के बजाय स्थानीय व्यापारियों और डिस्काउंट स्टोर तक पहुंचाया जा रहा है।
जांच के दौरान यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि खाद्य कंपनियों और आपूर्तिकर्ताओं की ओर से नष्ट करने के लिए चिह्नित उत्पादों को निर्धारित प्रक्रिया से हटाकर दोबारा बाजार में पहुंचाया गया या नहीं। नियमानुसार, एक्सपायरी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों का निपटान इस तरह किया जाना चाहिए कि वे दोबारा उपभोक्ताओं तक न पहुंच सकें।
इससे पहले की गई संबंधित जांचों के सिलसिले में खाद्य कंपनियों, वेयरहाउस, निपटान एजेंसियों और स्थानीय कारोबारियों से जुड़े 10 लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अधिकारियों की जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि उत्पादों को नष्ट करने की जिम्मेदारी जिन एजेंसियों को सौंपी गई थी, उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया या नहीं।
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
भिवंडी मामले ने एक्सपायरी और खराब खाद्य उत्पादों के भंडारण, रिकॉर्ड रखने और नष्ट करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे उत्पादों का सही हिसाब रखना जरूरी है, ताकि वे गलती से या जानबूझकर दोबारा बिक्री के लिए उपलब्ध न हो सकें। खासकर त्वरित डिलीवरी और ऑनलाइन किराना कारोबार में बड़े गोदामों से लेकर स्थानीय वितरण केंद्रों तक उत्पादों की आवाजाही का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होता है।
FDA की कार्रवाई का उद्देश्य कथित अनियमितताओं की जांच करना और यह सुनिश्चित करना है कि बिक्री के लिए अनुपयुक्त खाद्य सामग्री उपभोक्ताओं तक न पहुंचे। आगे की जांच में यह स्पष्ट किया जाना है कि संबंधित उत्पादों का निपटान कैसे हुआ, रिकॉर्ड क्यों उपलब्ध नहीं थे और क्या किसी स्तर पर उन्हें दोबारा बेचने की कोशिश की गई।
मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल लाइसेंस निलंबन और प्राथमिकी दर्ज होने से ब्लिंकिट के भिवंडी वेयरहाउस में खाद्य उत्पादों के प्रबंधन और निपटान की प्रक्रिया नियामकीय जांच के दायरे में आ गई है।
